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Ayodhya News: छोटे और छूटे कलाकारों को मिलेगा मंच, बनेगी पहचान

Mon, 29 Sep 2025 10:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 29 Sep 2025 10:17 PM IST
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Small and marginalized artists will get a platform and recognition
02- राम की पैड़ी परिसर में प्रस्तुति देते कलाकार। संवाद (फाइल फोटो)
नितिन मिश्र
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अयोध्या। कला और संस्कृति की धरती अयोध्या से एक नई पहल शुरू हुई है। संस्कृति विभाग ने छोटे और छूटे ( अवसर न पाने वाले) कलाकारों को मंच देने के मकसद से ‘सुर साधना योजना’ की शुरुआत की है। इस योजना के लिए प्रदेश के 23 जिलों को चुना गया है। यहां स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें रोजगार देने का अवसर दिया जाएगा।
योजना का आगाज बीते शनिवार को अयोध्या में राम की पैड़ी से किया गया। यहां कलाकारों ने भजन, शास्त्रीय गायन, लोकगीत और वादन प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। विभाग ने तय किया है कि हर शनिवार और रविवार को इस तरह का आयोजन होगा, ताकि कलाकारों को नियमित मंच उपलब्ध हो सके और स्थानीय सांस्कृतिक वातावरण जीवंत बना रहे। सुर साधना योजना के नोडल अधिकारी व अंतरराष्ट्रीय रामायण वैदिक शोध संस्थान के सलाहकार आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि अक्सर छोटे कस्बों और गांवों के कलाकार मंच न मिलने के कारण पीछे छूट जाते हैं। यह योजना उनकी प्रतिभा को सामने लाने का प्रयास है।
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साथ ही, दर्शकों को भी अपनी संस्कृति और परंपरा से जुड़े रहने का अवसर मिलेगा। आने वाले दिनों में यह कार्यक्रम दूसरे जिलों में भी आयोजित किए जाएंगे। इससे हजारों कलाकारों को सांस्कृतिक पहचान मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या में राम की पैड़ी परिसर को इस योजना के लिए चुना गया है। बगल में होने वाली सरयू आरती के बीच सांस्कृतिक प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए एक नया अनुभव होंगी और पर्यटन बढ़ेगा।
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लोकनृत्य के लिए 15 और गायन के लिए मिलेंगे 10 हजार

आशुतोष द्विवेदी ने बताया कि कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। कलाकारों का मानदेय भी निर्धारित किया गया है। लोकनृत्य के लिए 15 हजार, लोक भजन, गायन के लिए 10 हजार और अन्य विधाओं जैसे जादू, कठपुतली, किस्सा गोई, काव्य पाठ के लिए पांच हजार रुपये मानदेय के रूप में दिए जाएंंगे। इससे छोटे कलाकारों को रोजगार प्राप्त होगा। इसमें जिन कलाकारों का प्रदर्शन अच्छा होगा उन्हें धार्मिक, आध्यात्मिक, शैक्षणिक और गैर सरकारी संस्थानों एवं अतिथि गृहों में अपनी कला का प्रदर्शन करने का अवसर भी दिया जाएगा।
योजना का मकसद
-पंजीकृत लोक कलाकारों को मंच प्रदान करना
- सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा
- पारंपरिक लोक कलाकारों का संरक्षण एवं संवर्धन
- शहरी/ग्रामीण दर्शकों को लोक संस्कृति से जोड़ना
- सांस्कृतिक चेतना विकसित करना

इन जिलों में हर सप्ताह होंगे कार्यक्रम
कुसुमवन सरोवर मथुरा, झांसी का किला झांसी, रामघाट चित्रकूट, नया अस्सी घाट वाराणसी, त्रिवेणी घाट प्रयागराज, कुड़िया घाट लखनऊ, शिल्पग्राम आगरा, डाइट ऑडीटोरियम विकास भवन बदायूं, जनेश्वर मिश्र पार्क लखनऊ, नैमिषारण्य धाम सीतापुर, राम की पैड़ी अयोध्या, रामगढ़ ताल गोरखपुर, सामौर बाबा धाम फिरोजाबाद, सीता समाहित स्थल भदोही, बटेश्वर धाम आगरा, पाल्हमेश्वरी देवी मंदिर आजमगढ़, विंध्यवासिनी देवी मंदिर विध्यांचल, प्रेम मंदिर वृंदावन, शुक्र तीर्थ मुजफ्फरनगर, देवीपाटन मंदिर बलरामपुर, गढ़मुक्तेश्वर हापुड़, मां शाकुंभरी देवी मंदिर सहारनपुर, शीतला माता मंदिर मैनपुरी

यहां करे पंजीकरण
कलाकार अपना पंजीकरण कराने के लिए upsanskriti.com पर लॉगिन कर सकते हैं। योजना का हिस्सा बनने के लिए तुलसी स्मारक भवन स्थित अयोध्या शोध संस्थान में संपर्क कर सकते हैं।
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