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Ayodhya News: छह घर नदी में समाए, नहीं मिला मुआवजा
Mon, 21 Sep 2026 11:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 21 Sep 2026 11:47 PM IST
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55-पटरंगा मांझा में जारी कटान का दृश्य।-संवाद
रुदौली/शुजागंज। सरयू नदी का जलस्तर घटने के बाद भी रुदौली तहसील के बाढ़ प्रभावित गांवों में ग्रामीणों की दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। नदी की कटान में छह छप्परनुमा घर समा चुके हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों को अभी मुआवजा नहीं मिला है। जलस्तर घटकर 91.85 मीटर पहुंच गया है। इसके साथ ही पटरंगा माझा में कटान तेज होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उन्हें फसल के साथ कृषि भूमि के कटान का भी डर सता रहा है।
कैथी माझा और पटरंगा माझा में कई छप्परनुमा घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सैकड़ों बीघा गन्ना और धान की फसल कटान की भेंट चढ़ गई है। रजनीश ने बताया कि संपर्क मार्ग कटने से आवागमन बाधित है। फूल बहादुर ने घरों में जहरीले जंतुओं के खतरे की बात कही। राजेंद्र ने बताया कि लेखपालों ने नुकसान का सर्वे किया है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों को रुदौली तहसील का निवासी नहीं माना जा रहा है। तहसीलदार विजय गुप्ता ने बताया कि संबंधित लोग गोंडा जिले के हैं और रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजी गई है। वहीं, ग्रामीणों का दावा है कि वे दस साल से अधिक समय से पटरंगा माझा में रह रहे हैं।
रास्तों पर पानी, बच्चों और किसानों की बढ़ी परेशानी
अब्बूपुर, कैथी माझा, कोयलावर और बरई जाने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरा है। कैथी माझा और सल्लाहपुर में भी रास्ते प्रभावित हैं। ग्रामीण रामकरन, नागेंद्र सिंह, श्यामा देवी और विद्यावती ने बताया कि पानी और कटे रास्तों के कारण खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी हो रही है।
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राहत कैंप बंद, घर लौटे बाढ़ पीड़ित
सोहावल। मांझा कला में सरयू का पानी उतर गया है, लेकिन रास्तों पर कीचड़ के कारण आवागमन प्रभावित है। स्टीमर हटा दिए गए हैं, जरूरतमंदों के लिए नाव उपलब्ध है। राहत कैंप बंद होने के बाद परिवार घर लौट गए हैं। बच्चे हाईवे किनारे स्थित स्कूलों में जा रहे हैं। गांव में सड़क और बिजली की सुविधा पहले से नहीं है। बाढ़ के बाद भी ग्रामीण लालटेन और मोमबत्ती के सहारे हैं।
तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ की समस्या लगभग समाप्त हो रही है। फसल नुकसान की भरपाई के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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कैथी माझा और पटरंगा माझा में कई छप्परनुमा घर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, सैकड़ों बीघा गन्ना और धान की फसल कटान की भेंट चढ़ गई है। रजनीश ने बताया कि संपर्क मार्ग कटने से आवागमन बाधित है। फूल बहादुर ने घरों में जहरीले जंतुओं के खतरे की बात कही। राजेंद्र ने बताया कि लेखपालों ने नुकसान का सर्वे किया है, लेकिन प्रभावित ग्रामीणों को रुदौली तहसील का निवासी नहीं माना जा रहा है। तहसीलदार विजय गुप्ता ने बताया कि संबंधित लोग गोंडा जिले के हैं और रिपोर्ट जिला स्तर पर भेजी गई है। वहीं, ग्रामीणों का दावा है कि वे दस साल से अधिक समय से पटरंगा माझा में रह रहे हैं।
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रास्तों पर पानी, बच्चों और किसानों की बढ़ी परेशानी
अब्बूपुर, कैथी माझा, कोयलावर और बरई जाने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरा है। कैथी माझा और सल्लाहपुर में भी रास्ते प्रभावित हैं। ग्रामीण रामकरन, नागेंद्र सिंह, श्यामा देवी और विद्यावती ने बताया कि पानी और कटे रास्तों के कारण खेतों तक पहुंचना मुश्किल है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भी परेशानी हो रही है।
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राहत कैंप बंद, घर लौटे बाढ़ पीड़ित
सोहावल। मांझा कला में सरयू का पानी उतर गया है, लेकिन रास्तों पर कीचड़ के कारण आवागमन प्रभावित है। स्टीमर हटा दिए गए हैं, जरूरतमंदों के लिए नाव उपलब्ध है। राहत कैंप बंद होने के बाद परिवार घर लौट गए हैं। बच्चे हाईवे किनारे स्थित स्कूलों में जा रहे हैं। गांव में सड़क और बिजली की सुविधा पहले से नहीं है। बाढ़ के बाद भी ग्रामीण लालटेन और मोमबत्ती के सहारे हैं।
तहसीलदार प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि बाढ़ की समस्या लगभग समाप्त हो रही है। फसल नुकसान की भरपाई के लिए नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।