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बाहरी आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मसंयम : ज्ञानमती
Sun, 20 Sep 2026 11:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:39 PM IST
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43- जैन मंदिर में माता ज्ञानमती का पूजन करते जैन श्रद्धालु- संवाद
अयोध्या। रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे दशलक्षण महापर्व के छठवें दिन रविवार को उत्तम संयम धर्म की आराधना की गई। संयम धर्म की व्याख्या करते हुए गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने कहा कि संयम का अर्थ केवल खान-पान या व्यवहार पर नियंत्रण रखना नहीं, बल्कि मन, वचन और कर्म को अनुशासित करना है। उन्होंने कहा कि बाहरी आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण आत्मसंयम है। संयम मनुष्य को विकारों से दूर कर आत्मकल्याण के मार्ग पर ले जाता है।
उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपनी इंद्रियों को विषयों की ओर अनियंत्रित रूप से जाने से रोकता है और प्रत्येक जीव के प्रति करुणा व अहिंसा का भाव रखता है, तभी वास्तविक संयम की साधना होती है। चंदनामती माता ने अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं से कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मनिरीक्षण का अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को इन दस धर्मों के माध्यम से अपने भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ और अन्य विकारों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। संयम का पालन जीवन में शांति और अनुशासन लाता है।
इससे पहले सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं की चहल-पहल रही। विभिन्न प्रांतों से पहुंचे जैन श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा और पूजन में हिस्सा लिया। मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुए। प्रवचन सत्र का संचालन डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन ने किया। श्रद्धालुओं ने गणिनी प्रमुख का भी पूजन किया। इस दौरान अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, अंशुल जैन, पारस जैन सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि मनुष्य जब अपनी इंद्रियों को विषयों की ओर अनियंत्रित रूप से जाने से रोकता है और प्रत्येक जीव के प्रति करुणा व अहिंसा का भाव रखता है, तभी वास्तविक संयम की साधना होती है। चंदनामती माता ने अपने प्रवचन में श्रद्धालुओं से कहा कि दशलक्षण पर्व आत्मनिरीक्षण का अवसर है। प्रत्येक व्यक्ति को इन दस धर्मों के माध्यम से अपने भीतर के क्रोध, मान, माया, लोभ और अन्य विकारों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। संयम का पालन जीवन में शांति और अनुशासन लाता है।
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इससे पहले सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर श्रद्धालुओं की चहल-पहल रही। विभिन्न प्रांतों से पहुंचे जैन श्रद्धालुओं ने अभिषेक, शांतिधारा और पूजन में हिस्सा लिया। मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विजय जैन के निर्देशन में संपन्न हुए। प्रवचन सत्र का संचालन डॉक्टर जीवन प्रकाश जैन ने किया। श्रद्धालुओं ने गणिनी प्रमुख का भी पूजन किया। इस दौरान अध्यात्म जैन, अर्पिता जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, अंशुल जैन, पारस जैन सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
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