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Ayodhya News: संस्थागत प्रसव में रुदौली अव्वल, हैरिंग्टनगंज फिसड्डी
Mon, 01 Sep 2025 10:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 01 Sep 2025 10:30 PM IST
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अयोध्या। सरकारी अस्पतालों से दलाली प्रथा पर अंकुश लगाने के लिए सीएमओ की कार्रवाई कारगर साबित हो रही है। इसी का नतीजा है कि जिले में अब संस्थागत प्रसव का ग्राफ बढ़ने लगा है। अगस्त में ही 2,931 प्रसव इन अस्पतालों में हो चुके हैं। इनमें 401 प्रसव कराकर रुदौली अव्वल है। वहीं, 116 प्रसव कराने वाला हैरिंग्टनगंज ब्लॉक इस मामले में फिसड्डी साबित हुआ है।
सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के मामले में इजाफा नहीं हो रहा था। पलक झपकते ही अस्पतालों से मरीज निजी केंद्रों तक पहुंच जाता था। इसमें आशा बहू की भी भूमिका होती थी। सीएमओ डॉ. सुशील बानियान ने इसे लेकर सख्ती की, जिसका अब असर दिखने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष अगस्त तक जिले में 9,404 प्रसव हुए थे। इस बार यह संख्या बढ़कर 9,845 हो गई है। इनमें सिर्फ अगस्त के आंकड़ों पर गौर करें तो महिला अस्पताल में सर्वाधिक 428 प्रसव हुए हैं। 401 प्रसव करने वाली सीएचसी रुदौली दूसरे स्थान पर है। वहीं, सीएचसी सोहावल में 299, बीकापुर में 224, मेडिकल कॉलेज में 244, तारुन में 201, मिल्कीपुर में 179 और मवई में 190 प्रसव हुए हैं।
सीएमओ की सख्ती का ही असर है कि तहसील स्तरीय पांच प्रथम संदर्भ इकाई (एफआरयू) पर भी सिजेरियन प्रसव बढ़ने लगे हैं। पांच माह में ही यहां 408 ऑपरेशन हो चुके हैं। इस मामले में भी सीएचसी रुदौली सबसे आगे है। यहां अगस्त में सर्वाधिक 55 ऑपरेशन हुए हैं। इसके अलावा सोहावल में 38, बीकापुर में 28, मिल्कीपुर में 32 और सबसे कम पूरा बाजार में 14 ऑपरेशन हुए हैं।
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सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि प्राथमिकता थी, जिसका शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जा रहा है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को नजदीकी सरकारी अस्पताल में प्रसव संबंधी सुविधाएं मिल रही हैं, यह बड़ी उपलब्धि है। अन्य अस्पतालों को भी रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव के मामले में इजाफा नहीं हो रहा था। पलक झपकते ही अस्पतालों से मरीज निजी केंद्रों तक पहुंच जाता था। इसमें आशा बहू की भी भूमिका होती थी। सीएमओ डॉ. सुशील बानियान ने इसे लेकर सख्ती की, जिसका अब असर दिखने लगा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष अगस्त तक जिले में 9,404 प्रसव हुए थे। इस बार यह संख्या बढ़कर 9,845 हो गई है। इनमें सिर्फ अगस्त के आंकड़ों पर गौर करें तो महिला अस्पताल में सर्वाधिक 428 प्रसव हुए हैं। 401 प्रसव करने वाली सीएचसी रुदौली दूसरे स्थान पर है। वहीं, सीएचसी सोहावल में 299, बीकापुर में 224, मेडिकल कॉलेज में 244, तारुन में 201, मिल्कीपुर में 179 और मवई में 190 प्रसव हुए हैं।
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सीएमओ की सख्ती का ही असर है कि तहसील स्तरीय पांच प्रथम संदर्भ इकाई (एफआरयू) पर भी सिजेरियन प्रसव बढ़ने लगे हैं। पांच माह में ही यहां 408 ऑपरेशन हो चुके हैं। इस मामले में भी सीएचसी रुदौली सबसे आगे है। यहां अगस्त में सर्वाधिक 55 ऑपरेशन हुए हैं। इसके अलावा सोहावल में 38, बीकापुर में 28, मिल्कीपुर में 32 और सबसे कम पूरा बाजार में 14 ऑपरेशन हुए हैं।
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सीएमओ डॉ. सुशील कुमार बानियान ने बताया कि संस्थागत प्रसव में वृद्धि प्राथमिकता थी, जिसका शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जा रहा है। खासतौर से ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को नजदीकी सरकारी अस्पताल में प्रसव संबंधी सुविधाएं मिल रही हैं, यह बड़ी उपलब्धि है। अन्य अस्पतालों को भी रफ्तार बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।