{"_id":"69b2f12199e69a4fb70a71d2","slug":"report-filed-against-two-people-including-accountant-for-grabbing-temple-land-ayodhya-news-c-97-1-ayo1044-144907-2026-03-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: मंदिर की जमीन हड़पने के मामले में लेखपाल सहित दो पर रिपोर्ट दर्ज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: मंदिर की जमीन हड़पने के मामले में लेखपाल सहित दो पर रिपोर्ट दर्ज
Thu, 12 Mar 2026 10:30 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 12 Mar 2026 10:30 PM IST
विज्ञापन
अयोध्या। ठाकुर राम जानकी मंदिर की करोड़ों रुपये की जमीन फर्जी तरीके से हड़पने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट ने लेखपाल सर्वेश मिश्रा और विवेक दास उर्फ बजरंग दास के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश दिया है। अदालत ने थाना कोतवाली नगर पुलिस को तीन दिन के भीतर प्राथमिकी दर्ज कर न्यायालय को सूचित करने का निर्देश दिया है।
सीजेएम सुधांशु शेखर उपाध्याय ने मामले की प्रारंभिक जांच जिलाधिकारी के माध्यम से कराई थी, जिसमें न्यायालय में फर्जी शपथ पत्र दाखिल करने की पुष्टि हुई। यह मामला अयोध्या के राम कोट स्थित ठाकुर राम जानकी मंदिर की संपत्ति से जुड़ा है। न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, मंदिर के महंत जय राम दास ने वर्ष 1993 में शशिकांत दास को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। वर्ष 2017 में जयराम दास की मृत्यु के बाद शशिकांत दास ने नामांतरण के लिए आवेदन किया। इसी दौरान पता चला कि विवेक दास ने लेखपाल सर्वेश मिश्रा के साथ मिलकर मंदिर की जमीन अपने नाम दर्ज करवा ली थी। गवाह के रूप में राजेंद्र प्रसाद चौबे का फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे उन्होंने रेजिडेंट मजिस्ट्रेट के सामने अस्वीकार कर दिया।
विज्ञापन
सीजेएम सुधांशु शेखर उपाध्याय ने मामले की प्रारंभिक जांच जिलाधिकारी के माध्यम से कराई थी, जिसमें न्यायालय में फर्जी शपथ पत्र दाखिल करने की पुष्टि हुई। यह मामला अयोध्या के राम कोट स्थित ठाकुर राम जानकी मंदिर की संपत्ति से जुड़ा है। न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, मंदिर के महंत जय राम दास ने वर्ष 1993 में शशिकांत दास को अपना उत्तराधिकारी बनाया था। वर्ष 2017 में जयराम दास की मृत्यु के बाद शशिकांत दास ने नामांतरण के लिए आवेदन किया। इसी दौरान पता चला कि विवेक दास ने लेखपाल सर्वेश मिश्रा के साथ मिलकर मंदिर की जमीन अपने नाम दर्ज करवा ली थी। गवाह के रूप में राजेंद्र प्रसाद चौबे का फर्जी शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसे उन्होंने रेजिडेंट मजिस्ट्रेट के सामने अस्वीकार कर दिया।
विज्ञापन