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Ayodhya News: चिरस्थायी शहर के रूप में विकसित हाेगी रामनगरी
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मंडलायुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते मंडलायुक्त गौरव दयाल।-संवाद
अयोध्या। रामनगरी को एक चिरस्थायी शहर के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके लिए पौधरोपण के साथ जल स्रोतों का संरक्षण करते हुए प्राकृतिक लैंडस्केपिंग व पर्यावरण के क्षेत्र में जनजागरुकता को बढ़ावा दिया जाएगा। इसी कड़ी में अयोध्या विकास प्राधिकरण बोर्ड ने अयोध्या ग्रीन फंड विकसित करने की स्वीकृति दे दी है।
इस फंड के स्वीकृति समिति की बैठक सोमवार को कमिश्नर गौरव दयाल की अध्यक्षता में हुई। कमिश्नर ने बताया कि इस फंड के कई स्त्रोत हाेंगे। प्राधिकरण की ओर से विकसित की जाने वाली आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की लागत में पांच प्रतिशत धनराशि अयोध्या ग्रीन फंड के नाम से भारित की जाएगी।
फैसिलिटी मैनेजमेंट के तहत विभिन्न फर्मों से प्राप्त लीज रेंट की 10 प्रतिशत धनराशि भी हस्तांतरित की जाएगी। इसके अलावा अन्य फर्म, कंपनी व व्यक्ति से सीएसआर व दान के माध्यम से मिलने वाली धनराशि फंड के आय का माध्यम बनेगी।
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इस फंड के माध्यम से अयोध्या परिक्षेत्र में पौधरोपण और वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदूषण की रोकथाम के लिए कई स्तर पर प्रयास होंगे। सामाजिक वानिकी व मियावाॅकी पद्धति से पौधरोपण को प्रोत्साहन दिया जाएगा। रोपित किए गए पौधों की सतत् निगरानी और अनुरक्षण की व्यवस्था प्रभावी की जाएगी। अयोध्या के जल स्रोतों का संरक्षण व पुनरूद्धार किया जाएगा। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम होंगे।
प्रथम चरण में जुलाई से सितंबर तक के लिए प्रस्तावित किए गए कार्य
बैठक में प्रथम चरण में जुलाई से सितंबर तक फंड के माध्यम से प्रस्तावित विभिन्न कार्यों पर चर्चा हुई। तय किया गया कि एक नर्सरी स्थापित की जाएगी। इसमें वृहद स्तर पर पौधरोपण के लिए पौधे तैयार किए जाएंगे। नर्सरी के संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में माली व सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। अयोध्या के 108 कुंडों व जल स्त्रोतों पर पौधरोपण कराया जाएगा।
नगर निगम के 66 पार्कों पर भी पौधे रोपित किए जाएंगे। इसमें 50 तरह के रामायणकालीन व स्थानीय पौधे शामिल होंगे। बैठक में प्रभारी डीएम व सीडीओ ऋषिराज, नगर आयुक्त संतोष शर्मा, अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अश्विनी पांडेय, प्रभागीय वनाधिकारी प्रणव जैन व जिला उद्यान अधिकारी मौजूद रहे।
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इस फंड के स्वीकृति समिति की बैठक सोमवार को कमिश्नर गौरव दयाल की अध्यक्षता में हुई। कमिश्नर ने बताया कि इस फंड के कई स्त्रोत हाेंगे। प्राधिकरण की ओर से विकसित की जाने वाली आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की लागत में पांच प्रतिशत धनराशि अयोध्या ग्रीन फंड के नाम से भारित की जाएगी।
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फैसिलिटी मैनेजमेंट के तहत विभिन्न फर्मों से प्राप्त लीज रेंट की 10 प्रतिशत धनराशि भी हस्तांतरित की जाएगी। इसके अलावा अन्य फर्म, कंपनी व व्यक्ति से सीएसआर व दान के माध्यम से मिलने वाली धनराशि फंड के आय का माध्यम बनेगी।
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इस फंड के माध्यम से अयोध्या परिक्षेत्र में पौधरोपण और वानिकी को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रदूषण की रोकथाम के लिए कई स्तर पर प्रयास होंगे। सामाजिक वानिकी व मियावाॅकी पद्धति से पौधरोपण को प्रोत्साहन दिया जाएगा। रोपित किए गए पौधों की सतत् निगरानी और अनुरक्षण की व्यवस्था प्रभावी की जाएगी। अयोध्या के जल स्रोतों का संरक्षण व पुनरूद्धार किया जाएगा। वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम होंगे।
प्रथम चरण में जुलाई से सितंबर तक के लिए प्रस्तावित किए गए कार्य
बैठक में प्रथम चरण में जुलाई से सितंबर तक फंड के माध्यम से प्रस्तावित विभिन्न कार्यों पर चर्चा हुई। तय किया गया कि एक नर्सरी स्थापित की जाएगी। इसमें वृहद स्तर पर पौधरोपण के लिए पौधे तैयार किए जाएंगे। नर्सरी के संचालन के लिए पर्याप्त संख्या में माली व सिक्योरिटी गार्ड तैनात किए जाएंगे। अयोध्या के 108 कुंडों व जल स्त्रोतों पर पौधरोपण कराया जाएगा।
नगर निगम के 66 पार्कों पर भी पौधे रोपित किए जाएंगे। इसमें 50 तरह के रामायणकालीन व स्थानीय पौधे शामिल होंगे। बैठक में प्रभारी डीएम व सीडीओ ऋषिराज, नगर आयुक्त संतोष शर्मा, अयोध्या विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष अश्विनी पांडेय, प्रभागीय वनाधिकारी प्रणव जैन व जिला उद्यान अधिकारी मौजूद रहे।