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Ayodhya: राम मंदिर चढ़ावा चोरी में बड़ा खुलासा, पांच जून को ही ट्रस्ट ने आरोपियों से बरामद कराए थे 58 लाख

Sun, 28 Jun 2026 07:42 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या
सतीश पाठक, अमर उजाला, अयोध्या Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Sun, 28 Jun 2026 07:42 PM IST
सार

राम मंदिर ट्रस्ट ने चोरी हुए चढ़ावे में 80 लाख रुपये बरामद कर लिए गए थे। इसके बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं करवाई गई। वहीं, रिकवरी के लिए भी ट्रस्ट का वाहन इस्तेमाल नहीं किया गया।

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Ram Mandir Trust had recovered ₹58 lakh from the accused as early as June 5.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने पर पांच जून को ही ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने आरोपियों से लगभग 58 लाख रुपये बरामद कर लिए थे। शेष रुपये आरोपियों ने बैंक खातों से निकलवाकर आठ जून तक वापस कर दिए थे। इसके बावजूद एफआईआर न दर्ज कराने से ट्रस्ट के पदाधिकारी लगातार निशाने पर हैं।

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राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला छह जून को सार्वजनिक जरूर हुआ था लेकिन मंदिर ट्रस्ट के लोगों को चार जून को इसकी भनक लग गई थी। पांच जून को ही ट्रस्ट के पदाधिकारी और परिसर में तैनात एसआईएस के सुरक्षाकर्मियों ने आरोपियों के घर से रकम बरामद की। पहले ही दिन 58 लाख रुपये बरामद कर लिए गए। इनमें टीम अधिकांश के घर गई, जहां आरोपियों ने स्वयं लाकर रुपये रिसीव कराए।
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इसके साथ ही उनसे लिखित रूप से प्राप्ति ली गई, जिस पर उनके परिजनों के हस्ताक्षर भी कराए गए। शेष रकम आरोपियों ने अपने बैंक खाते में जमा करवा दिए थे, जिन्हें परिजनों के साथ निकलवाकर ट्रस्ट को सौंपा गया। आठ जून तक यह रकम 79.85 लाख रुपये बरामद कर लिए। इसके बावजूद 20 दिन तक आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट नहीं दर्ज कराई गई। इसी से ट्रस्ट की भूमिका लगातार सवालों के घेरे में है और ट्रस्ट के पदाधिकारियों पर भी तरह-तरह के आरोप लग रहे हैं।

अधिक हो सकती है चोरी की रकम
सूत्रों के अनुसार, गणना कार्य में लगे कर्मचारी लंबे समय से रकम पार कर रहे थे। ऐसे में चोरी की रकम अधिक होने की उम्मीद है। सबसे ज्यादा शक की सुई टिन्नू यादव की ओर घूम रही है, जिसके पास बड़ी मात्रा में चढ़ावा में प्राप्त हुए धातुएं भी मिलने का दावा किया जा रहा है। ट्रस्ट से जुड़े लोग सामाजिक प्रतिष्ठा बचाने के लिए ऐसा करने की बात कर रहे हैं, जबकि आमजन इसमें उनकी संलिप्तता की भी आशंका जता रहे हैं।

पहले दिन से ही टिन्नू को मिलता रहा मौका
चोरी का मामला उजागर होने के बावजूद टिन्नू की हनक बरकरार थी। ट्रस्ट और एसआईएस के सुरक्षाकर्मी आरोपियों के घर या ठिकानों पर जाकर रिकवरी करते रहे लेकिन टिन्नू के घर कोई नहीं गया। बल्कि पूछताछ के बाद टिन्नू ने स्वयं एक लाख रुपये मंगवाकर दिए थे। ऐसे में आशंका है कि उसे रुपये व सामान ठिकाने लगाने का मौका दिया गया। वहीं, अविनाश शुक्ला के कौशलपुरी कॉलोनी स्थित आवास पर 14 लाख रुपये पांच जून को ही बरामद हुए थे। बाद में उसके भाई ने छह लाख रुपये और वापस किए। करुणेश पांडेय के घर से रुपये मिले। मनीष यादव ने दो लाख रुपये घर से लाकर दिए। इसी तरह अन्य आरोपियों के घर भी टीम गई और रुपये बरामद हुए।

नहीं निकला ट्रस्ट का वाहन, निजी वाहन का हुआ था प्रयोग

सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट का वाहन किसी भी कार्य से बाहर निकलने पर लॉगबुक में एंट्री करना जरूरी होता है। शायद इसीलिए चढ़ावा चोरी की रिकवरी कराने के लिए ट्रस्ट के लोग आरोपियों के घर व उनके बताए ठिकानों पर जाते समय ट्रस्ट के वाहन का प्रयोग नहीं किया। वह लोग निजी वाहनों से ही आरोपियों के घर गए। इससे बाहरी लोगों को रिकवरी कराने वालों की भनक भी नहीं लगी।

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