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Ayodhya News: एंटीडोट के रूप में लगता प्रोटामिन सल्फेट तो बच सकती थी जान

Sat, 10 Jan 2026 08:37 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 10 Jan 2026 08:37 PM IST
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Protamine sulfate, as an antidote, could have saved lives
अयोध्या। हिपेरिन की ओवरडोज देने के बाद एंटीडोट के रूप में यदि प्रोटामिन सल्फेट लग जाता तो महिला की जान बच सकती थी। अस्पताल प्रबंधन ने इसके बजाय विटामिन-के की खुराक दे दी थी। स्टाफ नर्सों के बयान के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इसका खुलासा किया है और हर स्तर पर लापरवाही की बात स्वीकारी है।
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15 दिसंबर की सुबह निर्मला अस्पताल में भर्ती हलकारा का पुरवा निवासी सरोज कौशल को स्टाफ नर्स ने हिपेरिन नामक इंजेक्शन लगाया था। आरोप है कि नर्स ने एक बार में पूरी वायल इंजेक्शन मरीज को लगा दिया, जिससे उनकी हालत बिगड़ गई। रात में 12:08 बजे लखनऊ के एक निजी अस्पताल में महिला की मौत हो गई तो परिजनों ने हंगामा किया और जांच की मांग की। स्वास्थ्य विभाग की टीम इस मामले की जांच कर रही है।
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शुक्रवार को दोनों नर्सों के बयान के बाद कई रहस्यों से पर्दा उठा है। इसमें पता चला है कि इंजेक्शन लगाने के समय कोई चिकित्सक वहां मौजूद नहीं था। मरीज की फाइल पर तीन टाइम में हिपेरिन इंजेक्शन देने का जिक्र होने के आधार पर इंजेक्शन लगाया था।
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जांच अधिकारी व डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश चौधरी ने बताया कि इंजेक्शन लगने के बाद कोई चिकित्सक एक बजे तक मरीज को देखने तक नहीं आया। दूसरी नर्स दोपहर की खुराक देने आई तो सुबह ही खोली गई नई वॉयल नहीं मिली। ऐसे में सुबह ही इंजेक्शन की ओवरडोज लगने की बात सामने आई। इसके बाद भी मरीज को एंटीडोट नहीं दिया गया। इसके स्थान पर विटामिन-के दिया गया, जो ओवरडोज के दुष्प्रभाव रोकने में कारगर नहीं है।
उन्होंने बताया कि मरीज के इलाज के दौरान हर कदम पर लापरवाही बरती गई। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही जाहिर है। विस्तृत जांच आख्या सोमवार, मंगलवार तक उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।

इनसेट
खून के थक्के रोकने के लिए लगता है हिपेरिन
डिप्टी सीएमओ डॉ. राजेश चौधरी ने बताया कि मरीज के शरीर में खून के थक्के बनने से रोकने के लिए हिपेरिन दिया जाता है। यह खून को पतला करती है। इसकी ओवरडोज लगने पर प्रोटामिन सल्फेट एंटीडोट के रूप में दिया जाता है। यह हिपेरिन के असर को न्यूट्रलाइज करता है और उससे होने वाले अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। इसे न देकर अस्पताल प्रबंधन ने विटामिन-के की खुराक दी, जो उनकी लापरवाही को दर्शाता है।
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