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Ayodhya News: 1008 कमल पुष्पों से किया मुनि सुव्रतनाथ का सहस्रनाम पूजन
Mon, 12 Oct 2026 12:29 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 12 Oct 2026 12:29 AM IST
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अयोध्या। शनिश्चरी अमावस्या पर रायगंज स्थित जैन मंदिर में 20वें तीर्थंकर भगवान मुनि सुव्रतनाथ की विशेष पूजा-अर्चना की गई। पंचामृत और दिव्य औषधियों से अभिषेक के बाद 1008 कमल पुष्पों से सहस्रनाम आराधना हुई। अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और सुख-शांति के साथ धर्म के मार्ग पर चलने की कामना की।
प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन के मार्गदर्शन में सभी धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने कमल पुष्प अर्पित कर भगवान की आराधना की। इस अवसर पर गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता, चंदनामती माता और अनेक जैन तीर्थों के उन्नायक एवं पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी का सानिध्य और आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
श्रीराम के समकालीन माने जाते हैं मुनि सुव्रतनाथ : रवींद्रकीर्ति
दिगंबर जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि शनि से भयभीत होने के बजाय धैर्य, धर्म और समर्पण के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए। शनि को धैर्य और कर्म की परीक्षा लेने वाला माना जाता है। तीर्थंकरों की आराधना आत्मचिंतन की प्रेरणा देती है और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का संबल प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में भगवान मुनि सुव्रतनाथ को भगवान श्रीराम का समकालीन माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते रामनगरी अयोध्या में उनके प्रति विशेष श्रद्धा है।
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प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन के मार्गदर्शन में सभी धार्मिक अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुए। श्रद्धालुओं ने कमल पुष्प अर्पित कर भगवान की आराधना की। इस अवसर पर गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माता, चंदनामती माता और अनेक जैन तीर्थों के उन्नायक एवं पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी का सानिध्य और आशीर्वाद भी श्रद्धालुओं को प्राप्त हुआ।
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श्रीराम के समकालीन माने जाते हैं मुनि सुव्रतनाथ : रवींद्रकीर्ति
दिगंबर जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि शनि से भयभीत होने के बजाय धैर्य, धर्म और समर्पण के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना करना चाहिए। शनि को धैर्य और कर्म की परीक्षा लेने वाला माना जाता है। तीर्थंकरों की आराधना आत्मचिंतन की प्रेरणा देती है और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ने का संबल प्रदान करती है। उन्होंने बताया कि जैन परंपरा में भगवान मुनि सुव्रतनाथ को भगवान श्रीराम का समकालीन माना जाता है। इसी धार्मिक मान्यता के चलते रामनगरी अयोध्या में उनके प्रति विशेष श्रद्धा है।
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