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संयम और सदाचार से ही जीवन बनेगा सार्थक: ज्ञानमती
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प्रवचन करतीं जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी-
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अयोध्या। रायगंज स्थित जैन मंदिर में रविवार को प्रवचन सत्र का आयोजन किया गया। जैन धर्म की सर्वोच्च साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने श्रद्धालुओं को संयम, अहिंसा और आत्मशुद्धि का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि संयम और सदाचार से ही जीवन सार्थक बनता है। मनुष्य के जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाना नहीं, बल्कि अपने भीतर के विकारों को दूर कर आत्मकल्याण की ओर बढ़ना है। मन, वचन और कर्म की शुद्धता के बिना धर्म की साधना पूर्ण नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ मनुष्य के जीवन में अशांति के प्रमुख कारण हैं। इन पर नियंत्रण के लिए नियमित आत्मचिंतन और संयम आवश्यक है। दूसरों के प्रति करुणा और मैत्री का भाव रखते हुए किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के साथ उनके संदेश को अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारना ही सच्ची धर्म साधना है। जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामी ने कहा कि आत्मचिंतन, सदाचार और संयम का मार्ग अपनाकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। कोई भी साधना तभी सार्थक होती है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और जीवन में दिखाई दे।
संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया। प्रवचन सत्र में आर्यिका चंदनामती, विजय जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, आदेश जैन और पारस जैन समेत दिल्ली, झांसी, भोपाल, कानपुर, लखनऊ, सीतापुर सहित विभिन्न शहरों से आए करीब 200 श्रद्धालु मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि क्रोध, मान, माया और लोभ मनुष्य के जीवन में अशांति के प्रमुख कारण हैं। इन पर नियंत्रण के लिए नियमित आत्मचिंतन और संयम आवश्यक है। दूसरों के प्रति करुणा और मैत्री का भाव रखते हुए किसी भी जीव को कष्ट नहीं पहुंचाना चाहिए। धार्मिक आयोजनों में शामिल होने के साथ उनके संदेश को अपने व्यवहार और दैनिक जीवन में उतारना ही सच्ची धर्म साधना है। जैन मंदिर के पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामी ने कहा कि आत्मचिंतन, सदाचार और संयम का मार्ग अपनाकर जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है। कोई भी साधना तभी सार्थक होती है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के आचरण और जीवन में दिखाई दे।
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संचालन डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने किया। प्रवचन सत्र में आर्यिका चंदनामती, विजय जैन, सुरेंद्र जैन, मनोज जैन, आदेश जैन और पारस जैन समेत दिल्ली, झांसी, भोपाल, कानपुर, लखनऊ, सीतापुर सहित विभिन्न शहरों से आए करीब 200 श्रद्धालु मौजूद रहे।
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