Ayodhya: रामनगरी पहुंचे नृपेंद्र मिश्र ने दान प्रकरण पर साधी चुप्पी, बोले- मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं
रामनगरी पहुंचे नृपेंद्र मिश्र ने दान प्रकरण पर चुप्पी साधे रखी। उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं। दान गबन मामले के बीच उन्होंने मंदिर से जुड़ी परियोजनाओं की समीक्षा की। आगे पढ़ें पूरी खबर...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राम मंदिर के दान पात्र से धन गबन प्रकरण की जांच के बीच शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे। उनके दौरे पर सबकी निगाहें दान विवाद को लेकर संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी थीं, लेकिन उन्होंने इस पूरे मामले पर टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया।
महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में जब उनसे दान गड़बड़ी प्रकरण को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “मैं केवल निर्माण कार्य देखता हूं और कुछ नहीं।” इसके बाद उन्होंने दान प्रकरण से जुड़े किसी भी अन्य सवाल का जवाब नहीं दिया।
विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की
नृपेंद्र मिश्र का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब राम मंदिर में दान राशि के गबन को लेकर ट्रस्ट और पुलिस स्तर पर जांच चल रही है। मामले में कई कर्मचारियों से पूछताछ और कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। दूसरी ओर, अयोध्या प्रवास के दौरान नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रही विभिन्न निर्माण परियोजनाओं की समीक्षा की।
उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से बनाई जा रही बाउंड्री वॉल, ट्रस्ट कार्यालय, श्रद्धालु विश्रामालय, शंकराचार्य द्वार और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत रास, ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, गोपाल राव, आर्किटेक्ट आशीष सोमपुरा समेत अन्य मौजूद रहे।
सुरक्षा दीवार का लगभग 40 प्रतिशत कार्य पूरा
समीक्षा बैठक में उन्हें बताया गया कि मंदिर परिसर की सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) का लगभग 40 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। दीवार पर आधुनिक सुरक्षा उपकरण स्थापित करने का काम भी शुरू कर दिया गया है। निर्माण एजेंसियों का लक्ष्य दिसंबर तक प्रमुख शेष कार्यों को पूरा करना है। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि मंदिर निर्माण परियोजना से जुड़े एल एंड टी और टाटा के इंजीनियर 30 जून तक अपना कार्य पूरा कर वापस लौट सकते हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों को निर्धारित समय सीमा में पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।