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Ayodhya News: अब पढ़ाने के साथ निर्माण कार्यों की निगरानी भी करेंगे प्रोफेसर

Tue, 25 Mar 2025 08:57 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 25 Mar 2025 08:57 PM IST
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Now along with teaching, the professor will also supervise the construction work
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के वरिष्ठ प्रोफेसर अब विद्यार्थियों को पढ़ाने के साथ आवासीय परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की निगरानी भी करेंगे। इन्हें अपने संकाय और विभाग में पठन-पाठन कराने के साथ निर्माण कार्य करवा रही कार्यदायी संस्था पर नकेल कसते हुए अभियंता से समन्वय की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।
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विश्वविद्यालय में इस समय फार्मेसी भवन व मल्टीपरपज हॉल के साथ कुलपति, कुलसचिव, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी समेत प्रोफेसरों के नए आवासों का निर्माण चल रहा है। पिछले दिनों प्रदेश की राज्यपाल व राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल के साथ उनके अपर मुख्य सचिव डॉ. सुधीर एम बोबड़े और विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जानी ने इन सभी निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर इसकी प्रगति की समीक्षा की थी। इसके बाद राजभवन की ओर से अपेक्षा की गई कि सभी निर्माण कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से कराने के लिए वरिष्ठ प्रोफेसरों को इनकी निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
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इसके बाद विश्वविद्यालय भवन निर्माण समिति की बैठक में कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल के निर्देश पर विज्ञान संकायाध्यक्ष व चीफ प्रॉक्टर प्रो. एसएस मिश्र को फार्मेसी भवन और वाणिज्य संकायाध्यक्ष प्रो. हिमांशु शेखर सिंह को मल्टीपरपज हॉल का भवन प्रभारी बनाया गया है। इसी के साथ कुछ अन्य वरिष्ठ प्रोफेसरों को अन्य भवनों के प्रभारी का दायित्व सौंपा गया है। फार्मेसी भवन का निर्माण पूरा होने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है। हालांकि अभी बहुत काम होना बाकी है। ऐसे में यहां पर श्रमिकों के साथ संसाधनों में इजाफा करने के निर्देश कार्यदायी संस्था को दिए गए हैं।
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अवध विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. प्रतिभा गोयल पिछले दो साल से अधिक समय से विश्वविद्यालय परिसर के गेंदा लाल दीक्षित अतिथि गृह में निवास कर रही हैं। इतने लंबे समय तक गेस्ट हाउस में निवास करने वाली संभवत: वह विश्वविद्यालय की पहली कुलपति हैं। ऐसा इसलिए कि वर्ष 2022 के नवंबर में प्रो. गोयल के कार्यभार ग्रहण करने से पहले ही महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के निर्माण के लिए कुलपति समेत विश्वविद्यालय प्रशासन के अफसरों, प्रोफेसरों व कर्मचारियों के करीब 36 आवासों का अधिग्रहण कर लिया गया था। इसी के चलते कुलपति को यहां आने के बाद गेस्ट हाउस की शरण लेनी पड़ी। जबकि वित्त अधिकारी समेत अन्य अफसर नाका स्थित विश्वविद्यालय के अटल अतिथि गृह में रहते हैं।
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