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Ayodhya News: इलाज के दौरान नवजात की मौत, परिजनों ने किया हंगामा
Mon, 12 May 2025 10:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 12 May 2025 10:54 PM IST
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अयोध्या। शहर के साकेतपुरी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती नवजात की हालत गंभीर हो गई। परिजन उसे दूसरे निजी अस्पताल ले गए, जहां पहुंचते ही उसकी मौत हो गई। इसके बाद आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया और चिकित्सक पर लापरवाही समेत अन्य कईआरोप लगाए।
सुल्तानपुर के कूरेभार क्षेत्र के गौरापट्टी निवासी गौरव मिश्रा शहर के सहादतगंज के पास रहते हैं। उन्होंने पत्नी आराधना मिश्रा को रिकाबगंज के पास स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। नौ मई को प्रसव के बाद शिशु प्रीमेच्योर पैदा हुआ तो उसे साकेतपुरी कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस दौरान शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने व तीन-चार दिन में स्वस्थ होने का दावा किया गया था।
आराधना ने बताया कि जन्म के समय वह पूर्णरूप से स्वस्थ था। प्रीमेच्योर होने के कारण बच्चे को अस्पताल लाया गया। रविवार को उसे ठीक हालत में देखकर गौरव गए थे। एक दिन भी डॉक्टर परिजन से नहीं मिले।
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गौरव ने बताया कि रोज 18-18 हजार की सुई लगाई जाती थी। परिजन वहीं मौजूद थे, फिर भी बिना बताए बच्चे को वेंटीलेटर पर रख दिया गया। सिर्फ पैसा देने के लिए बुलाया जाता है। तीन दिन में तीन लाख रुपये खर्च हो गए। दूसरे डॉक्टर को दिखाने गए तो उन्होंने बताया कि ढाई घंटे पहले ही बच्चे की मौत हो गई थी।
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सुल्तानपुर के कूरेभार क्षेत्र के गौरापट्टी निवासी गौरव मिश्रा शहर के सहादतगंज के पास रहते हैं। उन्होंने पत्नी आराधना मिश्रा को रिकाबगंज के पास स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया था। नौ मई को प्रसव के बाद शिशु प्रीमेच्योर पैदा हुआ तो उसे साकेतपुरी कॉलोनी स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस दौरान शिशु को सांस लेने में तकलीफ होने व तीन-चार दिन में स्वस्थ होने का दावा किया गया था।
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आराधना ने बताया कि जन्म के समय वह पूर्णरूप से स्वस्थ था। प्रीमेच्योर होने के कारण बच्चे को अस्पताल लाया गया। रविवार को उसे ठीक हालत में देखकर गौरव गए थे। एक दिन भी डॉक्टर परिजन से नहीं मिले।
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गौरव ने बताया कि रोज 18-18 हजार की सुई लगाई जाती थी। परिजन वहीं मौजूद थे, फिर भी बिना बताए बच्चे को वेंटीलेटर पर रख दिया गया। सिर्फ पैसा देने के लिए बुलाया जाता है। तीन दिन में तीन लाख रुपये खर्च हो गए। दूसरे डॉक्टर को दिखाने गए तो उन्होंने बताया कि ढाई घंटे पहले ही बच्चे की मौत हो गई थी।