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Ayodhya News: जागरूकता की कमी और देर से जांच बढ़ा रही हेपेटाइटिस का खतरा

Mon, 27 Jul 2026 10:39 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 27 Jul 2026 10:39 PM IST
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Lack of awareness and delayed diagnosis are increasing the risk of hepatitis
मेडिकल कॉलेज की मेडिसिन ओपीडी में मरीजों का इलाज करते एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा और उन
विश्व हेपेटाइटिस दिवस विशेष
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अयोध्या। जागरूकता की कमी और समय पर जांच न कराने से लोग तेजी से हेपेटाइटिस की चपेट में आ रहे हैं। साइलेंट किलर बन चुकी यह बीमारी लोगों की सेहत के लिए गंभीर चुनौती बनती जा रही है। विशेषज्ञों ने टीकाकरण, समय पर जांच और जागरूकता को ही इससे बचाव का सबसे कारगर उपाय बताया है।

विशेषज्ञों के अनुसार हेपेटाइटिस लिवर को प्रभावित करने वाली वायरल बीमारी है, जो शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बढ़ती रहती है। यही वजह है कि अधिकांश मरीजों में संक्रमण का पता तब चलता है, जब बीमारी लिवर को काफी नुकसान पहुंचा चुकी होती है। समय रहते पहचान और उपचार न मिलने पर यह लिवर सिरोसिस, लिवर फेल्योर और लिवर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
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जिले में भी हेपेटाइटिस संक्रमण के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जिला अस्पताल की पैथोलॉजी लैब में प्रतिदिन औसतन 10 से 12 मरीजों में हेपेटाइटिस संक्रमण की पुष्टि हो रही है। वहीं, मेडिकल कॉलेज की लैब में भी कमोवेश यही स्थिति है।
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इनसेट

शुरुआती लक्षण न करें नजरअंदाज : डॉ. वीरेंद्र

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि कई मरीज शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी या थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जब आंखों में पीलापन, भूख न लगना, गहरे रंग का पेशाब या पेट में दर्द जैसी शिकायतें बढ़ जाती हैं, तब जांच कराते हैं। इससे उपचार जटिल होने के साथ लिवर को स्थायी नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है। बताया कि हेपेटाइटिस-बी और सी संक्रमित रक्त चढ़ाने, एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल, संक्रमित ब्लेड और असुरक्षित यौन संबंधों से फैल सकता है। हेपेटाइटिस-ए और ई दूषित भोजन और पानी के जरिये फैलता है। हेपेटाइटिस-बी का सुरक्षित और प्रभावी टीका उपलब्ध है।




साफ पानी, सुरक्षित इंजेक्शन और टीकाकरण से होगा बचाव

डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने बताया कि किसी भी स्थिति में इस्तेमाल की हुई सुई या सिरिंज का प्रयोग न करें। रक्त चढ़ाने से पहले उसकी अनिवार्य स्क्रीनिंग सुनिश्चित करें। बाहर टैटू बनवाते समय स्वच्छ उपकरणों का इस्तेमाल हो, इस पर ध्यान दें। दूषित भोजन और पानी से बचें। व्यक्तिगत उपयोग की वस्तुएं, जैसे रेजर, टूथब्रश और नेल कटर साझा न करें। थोड़ी-सी सतर्कता और समय पर जांच इस साइलेंट किलर से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।



मेडिकल कॉलेज में मिले हेपेटाइटिस के मरीजों की संख्या

वर्ष हेपेटाइटिस बी हेपेटाइटिस सी

2024 203 101

2025 302 166

2026 141 93
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