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अनियमितता : बिना ग्राम सचिव के हस्ताक्षर हो रहा भुगतान
Wed, 28 Jan 2026 08:50 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 28 Jan 2026 08:50 PM IST
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पूरा बाजार। विकासखंड पूरा बाजार की ग्राम पंचायत तिहुरा माझा में सरकारी धन के भुगतान को लेकर गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। आरोप है कि पंचायत में ग्राम सचिव के हस्ताक्षर के बिना ही सामुदायिक शौचालय के केयरटेकर मानदेय एवं स्वच्छता मद से हजारों रुपये का भुगतान कर दिया गया, जो स्पष्ट रूप से पंचायत नियमों का उल्लंघन है।
ई-स्वराज पोर्टल से प्राप्त दस्तावेज़ों पर विश्वास करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसंबर माह में ग्राम पंचायत की ओर से 54 हजार रुपये का भुगतान किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित भुगतान अभिलेखों, वाउचर और रसीदों पर ग्राम सचिव के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जबकि पंचायत वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी भुगतान के लिए सचिव की संस्तुति और हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं।
सूत्रों के मुताबिक यह भुगतान पंद्रहवें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान के अंतर्गत सामुदायिक स्वच्छता एवं जल आपूर्ति मद में दर्शाया गया है। वहीं सामुदायिक शौचालय के केयरटेकर मानदेय से जुड़ी रसीदों में केवल हस्तलिखित विवरण और हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन सचिव की औपचारिक स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किए जा रहे हैं। कुछ जिम्मेदार लोग मनमाने ढंग से सरकारी धन की निकासी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह उठता है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो बिना सचिव के हस्ताक्षर यह भुगतान कैसे और किसके आदेश पर किया गया। यह मामला न केवल पंचायत के वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्राम पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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एडीओ पंचायत रवींद्र वर्मा ने बताया कि बिना पंचायत सचिव के हस्ताक्षर किसी भी मद में भुगतान नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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ई-स्वराज पोर्टल से प्राप्त दस्तावेज़ों पर विश्वास करें तो वित्तीय वर्ष 2025-26 के दिसंबर माह में ग्राम पंचायत की ओर से 54 हजार रुपये का भुगतान किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित भुगतान अभिलेखों, वाउचर और रसीदों पर ग्राम सचिव के हस्ताक्षर नहीं पाए गए, जबकि पंचायत वित्तीय नियमों के अनुसार किसी भी भुगतान के लिए सचिव की संस्तुति और हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं।
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सूत्रों के मुताबिक यह भुगतान पंद्रहवें वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान के अंतर्गत सामुदायिक स्वच्छता एवं जल आपूर्ति मद में दर्शाया गया है। वहीं सामुदायिक शौचालय के केयरटेकर मानदेय से जुड़ी रसीदों में केवल हस्तलिखित विवरण और हस्ताक्षर मौजूद हैं, लेकिन सचिव की औपचारिक स्वीकृति का कोई प्रमाण नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में लंबे समय से नियमों को ताक पर रखकर भुगतान किए जा रहे हैं। कुछ जिम्मेदार लोग मनमाने ढंग से सरकारी धन की निकासी कर रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह उठता है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो बिना सचिव के हस्ताक्षर यह भुगतान कैसे और किसके आदेश पर किया गया। यह मामला न केवल पंचायत के वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्राम पंचायत व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
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एडीओ पंचायत रवींद्र वर्मा ने बताया कि बिना पंचायत सचिव के हस्ताक्षर किसी भी मद में भुगतान नहीं किया जा सकता। यदि ऐसा हुआ है तो मामले की जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।