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नवाचार की सुरक्षा से ही बनेगा ज्ञान महाशक्ति भारत: कुलपति
Thu, 06 Aug 2026 09:02 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 06 Aug 2026 09:02 PM IST
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अयोध्या। ज्ञान-आधारित वैश्विक अर्थव्यवस्था में शोध और नवाचार की वास्तविक पहचान तभी बनती है, जब उन्हें बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के माध्यम से संरक्षित किया जाए। आने वाले समय में वही देश वैश्विक नेतृत्व करेगा, जिसके पास सर्वाधिक बौद्धिक संपदा होगी। ये बातें अवध विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने दीक्षांत समारोह सप्ताह के अंतर्गत सिविल इंजीनियरिंग विभाग की ओर से आयोजित बौद्धिक संपदा अधिकार (पेटेंट) एवं नवाचार विषयक विशेष व्याख्यान में कही।
श्रीराम शोधपीठ में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं हैं। युवाओं को अपनी तार्किक क्षमता विकसित करते हुए मौलिक अनुसंधान और नवाचार को पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
मुख्य वक्ता उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ के सलाहकार एवं बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) हरिकेश बहादुर सिंह ने पेटेंट की आवश्यकता, आवेदन प्रक्रिया, पेटेंट योग्य नवाचारों की पहचान और उनके औद्योगिक व सामाजिक व्यावसायीकरण पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सौहार्द ओझा, कन्हैया लाल पांडेय, डॉ. प्रिंस पोद्दार और डॉ. नवीन पटेल सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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श्रीराम शोधपीठ में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति ने कहा कि भारत ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है, लेकिन बौद्धिक संपदा अधिकार के क्षेत्र में अभी काफी संभावनाएं हैं। युवाओं को अपनी तार्किक क्षमता विकसित करते हुए मौलिक अनुसंधान और नवाचार को पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
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मुख्य वक्ता उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, लखनऊ के सलाहकार एवं बीएचयू के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) हरिकेश बहादुर सिंह ने पेटेंट की आवश्यकता, आवेदन प्रक्रिया, पेटेंट योग्य नवाचारों की पहचान और उनके औद्योगिक व सामाजिक व्यावसायीकरण पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम में सिविल इंजीनियरिंग विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार चौधरी, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सौहार्द ओझा, कन्हैया लाल पांडेय, डॉ. प्रिंस पोद्दार और डॉ. नवीन पटेल सहित विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
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