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Ayodhya News: मानदंडों के दस्तावेजीकरण से पैटर्न तक पर किया मंथन
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19- अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में नैक मूल्यांकन की तैयारियों समीक्षा बैठक म
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अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कौटिल्य प्रशासनिक सभागार में नैक मूल्यांकन की तैयारियों के तहत राजभवन के साथ हाइब्रिड मोड (ऑनलाइन व ऑफलाइन) में बैठक की गई। बैठक में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के विशेष कार्याधिकारी सुधीर एम बोबड़े व डॉ. पंकज एल जानी ने नैक मूल्यांकन की तैयारियों की प्रगति को परखा। एक से 11 तक सभी मानदंडों के दस्तावेजीकरण से लेकर पैटर्न तक के प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की।
इस दौरान राज्यपाल के दोनों विशेष कार्याधिकारी ने मानदंड (एट्रिब्यूट) पांच के तहत प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, गेम बेस्ड लर्निंग व टेक्नोलॉजी बेस्ड लर्निंग के साथ पीयर टीचिंग के बिंदुओं को अपडेट किए जाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में इंडस्ट्री और एकेडेमिया के आपसी तालमेल पर विशेष ध्यान देने की नसीहत दी।
इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका को स्पष्ट करने के साथ उनके व्याख्यान के आयोजन और छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप व ट्रेनिंग के प्रमाण पत्रों के संदर्भ में प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति के आगे के क्रम में फील्ड इंडस्ट्री विजिट, फील्ड ट्रेनिंग, क्विज, केस स्टडी, असाइनमेंट, सेमिनार प्रेजेंटेशन और सेल्फ असेसमेंट जैसे बिंदुओं पर चर्चा की गई।
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टीचिंग, राइटिंग और परीक्षा में भारतीय भाषाओं को शामिल करने पर भी चर्चा हुई। विशेष कार्याधिकारी ने मानदंड सात और नौ के प्रमुख बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेजों के पैटर्न पर सुझाव दिया। इस दौरान कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि नैक मूल्यांकन विश्वविद्यालय की गुणवत्ता का आकलन और उन्हें मान्यता देने की एक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य शिक्षा के मानकों में सुधार लाना और छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देना है।
बैठक में कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंदु शुक्ल, प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. सीके मिश्र, प्रो. नीलम पाठक, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. सिद्धार्थ शुक्ल, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. संग्राम सिंह व डॉ. अनिल कुमार यादव मौजूद रहे।
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इस दौरान राज्यपाल के दोनों विशेष कार्याधिकारी ने मानदंड (एट्रिब्यूट) पांच के तहत प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग, गेम बेस्ड लर्निंग व टेक्नोलॉजी बेस्ड लर्निंग के साथ पीयर टीचिंग के बिंदुओं को अपडेट किए जाने के निर्देश दिए। इसी क्रम में इंडस्ट्री और एकेडेमिया के आपसी तालमेल पर विशेष ध्यान देने की नसीहत दी।
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इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों की भूमिका को स्पष्ट करने के साथ उनके व्याख्यान के आयोजन और छात्र-छात्राओं की इंटर्नशिप व ट्रेनिंग के प्रमाण पत्रों के संदर्भ में प्रस्तुति दी गई। प्रस्तुति के आगे के क्रम में फील्ड इंडस्ट्री विजिट, फील्ड ट्रेनिंग, क्विज, केस स्टडी, असाइनमेंट, सेमिनार प्रेजेंटेशन और सेल्फ असेसमेंट जैसे बिंदुओं पर चर्चा की गई।
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टीचिंग, राइटिंग और परीक्षा में भारतीय भाषाओं को शामिल करने पर भी चर्चा हुई। विशेष कार्याधिकारी ने मानदंड सात और नौ के प्रमुख बिंदुओं पर प्रमाणित दस्तावेजों के पैटर्न पर सुझाव दिया। इस दौरान कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि नैक मूल्यांकन विश्वविद्यालय की गुणवत्ता का आकलन और उन्हें मान्यता देने की एक प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य शिक्षा के मानकों में सुधार लाना और छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की गारंटी देना है।
बैठक में कुलसचिव विनय कुमार सिंह, वित्त अधिकारी पूर्णेंदु शुक्ल, प्रो. एसएस मिश्र, प्रो. सीके मिश्र, प्रो. नीलम पाठक, प्रो. अनूप कुमार, प्रो. सिद्धार्थ शुक्ल, प्रो. फर्रुख जमाल, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा, प्रो. संग्राम सिंह व डॉ. अनिल कुमार यादव मौजूद रहे।