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Ayodhya News: सुबूतों के अभाव में दंपती समेत चार आरोपी दोषमुक्त
Fri, 06 Nov 2026 12:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 06 Nov 2026 12:14 AM IST
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अयोध्या। किशोरी के अपहरण, दुष्कर्म और जान से मारने की धमकी देने के मामले में अदालत ने दंपती समेत चार आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। दोषमुक्त होने वालों में मुख्य आरोपी कुलदीप उर्फ कुंदन, उसके पिता राम अभिलाख, मां छाया देवी और बहन शशि शामिल हैं। विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम निरुपमा विक्रम ने साक्ष्यों के अभाव में यह फैसला सुनाया।
अभियोजन के अनुसार, मामला वर्ष 2022 में रामजन्मभूमि थाना क्षेत्र का है। 29 दिसंबर की रात करीब दो बजे गांव का ही कुंदन उर्फ कुलदीप मांझी 16 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गया था। किशोरी की तलाश में परिजन उसके घर पहुंचे तो उन्हें जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया। इस मामले में रामजन्मभूमि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
पांच जनवरी 2023 को पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धारा भी बढ़ाई गई। सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि रंजिश के चलते पूरे परिवार को झूठा फंसाया गया है। पीड़िता के बयानों में विरोधाभास हैं और घटना का कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोप साबित न होने पर चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
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अभियोजन के अनुसार, मामला वर्ष 2022 में रामजन्मभूमि थाना क्षेत्र का है। 29 दिसंबर की रात करीब दो बजे गांव का ही कुंदन उर्फ कुलदीप मांझी 16 वर्षीय किशोरी को बहला-फुसलाकर ले गया था। किशोरी की तलाश में परिजन उसके घर पहुंचे तो उन्हें जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया। इस मामले में रामजन्मभूमि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
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पांच जनवरी 2023 को पुलिस ने किशोरी को बरामद कर लिया। इसके बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विवेचना के दौरान आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धारा भी बढ़ाई गई। सुनवाई के दौरान अदालत में पीड़िता समेत अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने दलील दी कि रंजिश के चलते पूरे परिवार को झूठा फंसाया गया है। पीड़िता के बयानों में विरोधाभास हैं और घटना का कोई स्वतंत्र गवाह भी नहीं है। अदालत ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद आरोप साबित न होने पर चारों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।