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Ayodhya News: नए सदस्यों, सीईओ के चयन और प्रशासनिक पुनर्गठन पर होगा मंथन
Sun, 28 Jun 2026 10:48 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 28 Jun 2026 10:48 PM IST
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की 11 जुलाई को प्रस्तावित बैठक को राम मंदिर के भविष्य के प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रस्ट के भीतर हाल में हुए बदलावों के बाद पहली बार होने वाली इस बैठक में नए सदस्यों के चयन, रिक्त पदों को भरने और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नया स्वरूप देने पर अहम निर्णय लिए जा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा पहले से रिक्त एक ट्रस्टी पद के कारण ट्रस्ट के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बैठक में नए सदस्यों के नामों पर चर्चा के साथ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक संस्थागत और जवाबदेह बनाने पर भी विचार होगा। हालांकि ट्रस्ट के पुनर्गठन के बावजूद इसकी मूल वैचारिक और संगठनात्मक संरचना में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पहले की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े अनुभवी लोगों का प्रभाव ट्रस्ट में बना रह सकता है, क्योंकि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े इन संगठनों की भूमिका शुरू से महत्वपूर्ण रही है।
बैठक में राम मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह निर्णय होता है तो मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी एक पेशेवर अधिकारी के हाथों में दी जा सकती है, जबकि ट्रस्ट नीतिगत निर्णयों पर अधिक ध्यान देगा। इसके अलावा, अयोध्या के किसी प्रतिष्ठित विद्वान धर्माचार्य को भी ट्रस्ट में शामिल किए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इससे स्थानीय संत समाज और धार्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा तथा महत्वपूर्ण निर्णयों में स्थानीय धार्मिक दृष्टिकोण को भी प्रमुखता मिलेगी।
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सूत्रों के अनुसार, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे तथा पहले से रिक्त एक ट्रस्टी पद के कारण ट्रस्ट के पुनर्गठन की प्रक्रिया तेज हो गई है। माना जा रहा है कि बैठक में नए सदस्यों के नामों पर चर्चा के साथ ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को अधिक संस्थागत और जवाबदेह बनाने पर भी विचार होगा। हालांकि ट्रस्ट के पुनर्गठन के बावजूद इसकी मूल वैचारिक और संगठनात्मक संरचना में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि पहले की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) से जुड़े अनुभवी लोगों का प्रभाव ट्रस्ट में बना रह सकता है, क्योंकि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े इन संगठनों की भूमिका शुरू से महत्वपूर्ण रही है।
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बैठक में राम मंदिर के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह निर्णय होता है तो मंदिर के दैनिक प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी एक पेशेवर अधिकारी के हाथों में दी जा सकती है, जबकि ट्रस्ट नीतिगत निर्णयों पर अधिक ध्यान देगा। इसके अलावा, अयोध्या के किसी प्रतिष्ठित विद्वान धर्माचार्य को भी ट्रस्ट में शामिल किए जाने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इससे स्थानीय संत समाज और धार्मिक परंपरा का प्रतिनिधित्व और मजबूत होगा तथा महत्वपूर्ण निर्णयों में स्थानीय धार्मिक दृष्टिकोण को भी प्रमुखता मिलेगी।
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