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Ayodhya News: शैक्षणिक आवश्यकता की अनदेखी कर शुरू किए गए थे कोर्स

Mon, 19 May 2025 10:04 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 19 May 2025 10:04 PM IST
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Courses were started ignoring educational requirements
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय ने वर्ष 2020-21 और फिर उसके बाद स्थानीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक आवश्यकता की अनदेखी करते हुए कई स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों की शुरुआत कर दी। इनमें से कुछ ऐसे पाठ्यक्रम भी रहे, जिन्हें पढ़ाने के लिए अनुमोदित शिक्षक ही नहीं मिले। इतना ही नहीं विद्यार्थियों के प्रवेश न लेने से सीटें भी रिक्त रह गईं।
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अब वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसमें से 10 से कम या शून्य छात्र संख्या वाले 38 पाठ्यक्रमों को चिह्नित करते हुए बंद करने का निर्णय किया है। इनमें ज्यादातर डिप्लोमा और सर्टिफिकेट पाठ्यक्रम हैं। यूजी डिप्लोमा इन जर्मन, पीजी डिप्लोमा इन फ्रैंच लैंग्वेज और पीजी डिप्लोमा इन जर्मन जैसे कई कोर्स तो ऐसे रहे, जिनमें विद्यार्थी तो दूर की बात खोजने पर भी पढ़ाने के लिए अनुमोदित शिक्षक ही नहीं मिले।
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इस तरह के ज्यादातर स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम वर्ष 2020-21 में तत्कालीन कुलपति प्रो. रविशंकर सिंह के कार्यकाल में शुरू किए गए थे। कुछ की शुरुआत पूर्व कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित के कार्यकाल में भी हुई। जानकारों के अनुसार इनमें से कई पाठ्यक्रमों में स्थानीय शैक्षिक आवश्यकता का ध्यान नहीं रखा गया। इस विश्वविद्यालय में ज्यादातर अयोध्या और आसपास के जिलों के ही छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं। प्राय: इनकी रूचि ऐसे कोर्स में नहीं होती है। संभवत: इसी के चलते ऐसे कोर्स की सीटें लगातार रिक्त रहीं।
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इतना ही नहीं कुछ कोर्स ऐसे भी रहे, जिनमें यदि कुछ छात्रों ने प्रवेश ले भी लिया और अनुमोदित शिक्षक नहीं मिले तो इन्हे अतिथि प्रवक्ताओं के भरोसे संचालित करने का प्रयास किया गया। इसके लिए सत्रवार अतिथि प्रवक्ताओं की तैनाती की जाती रही। इसके लिए संबंधित विभागाध्यक्ष की संस्तुति पर हर 11 माह में कुलपति की ओर से इनका नवीनीकरण भी किया जाता रहा। इन अतिथि प्रवक्ताओं को प्रति व्याख्यान आठ सौ रुपये का भुगतान किया जाता था।
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