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Ayodhya News: टुकड़ों में बिलिंग करके टैक्स चोरी कर रहे कारोबारी
Tue, 24 Feb 2026 09:03 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 24 Feb 2026 09:03 PM IST
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अयोध्या। एक ही सामान की कई टुकड़ों में बिलिंग कराकर कारोबारियों ने कर चोरी का नायाब तरीका ढूंढ़ निकाला है। बीते दिनों पश्चिम बंगाल से हरियाणा जा रहा ट्रक पकड़ने पर इसका खुलासा हुआ है। सचल दल की टीम इस मामले में पड़ताल कर रही है।
50 हजार रुपये से अधिक के सामान के आयात-निर्यात के लिए ई-वे बिल आवश्यक होता है। इसमें सामान का संपूर्ण विवरण, उसका मूल्य, उसे पहुंचाने वाले स्थान का विवरण, चालक व ट्रांसपोर्टर का नाम, वाहन नंबर आदि दर्ज करना होता है। हाईवे व अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहनों की निगरानी में लगी स्टेट जीएसटी के सचल दल की टीम इस पर नजर रखती है। वाहन नंबर से बना ई-वे बिल देखकर कर चोरी पर अंकुश लगाया जाता है।
कुछ कारोबारी तो नियमानुसार आयात-निर्यात करते हैं, लेकिन कुछ लोग स्टेट जीएसटी को चूना लगाने की नई-नई तरकीब ढूंढ़ते हैं। बीते सप्ताह सचल दल की इकाई ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक संदिग्ध ट्रक रोकवाया। इसमें बीड़ी के लगभग 300 गत्ते लदे थे। सामान की अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये थी, लेकिन 20 से अधिक लोगों के नाम बिलिंग हुई थी। किसी बिल पर 50 हजार रुपये तक के सामान नहीं खरीदे गए थे।
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छानबीन में पता चला कि यह माल बंगाल से आ रहा था। बिलिंग के अनुरूप इन्हें हरियाणा ले जाना था, लेकिन चालक ने उत्तर प्रदेश के भीतर ही सामान पहुंचाने का दावा किया। वहीं, जिनके नाम बिल बनाया गया था, उनमें किसी के आधार कार्ड हरियाणा के नहीं थे। इससे आशंका जताई गई कि कारोबारी ने ई-वे बिल बनाने से बचने के लिए टुकड़ों में फर्जी बिलिंग कराई है। फिलहाल अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच जारी होने का दावा किया गया है।
अपर आयुक्त ग्रेड-2 अमित मोहन ने बताया कि कर चोरी करने के मकसद से इस तरह के कृत्य किए जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए विभाग अलर्ट है। ऐसे वाहनों की जांच लगातार की जा रही है।
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50 हजार रुपये से अधिक के सामान के आयात-निर्यात के लिए ई-वे बिल आवश्यक होता है। इसमें सामान का संपूर्ण विवरण, उसका मूल्य, उसे पहुंचाने वाले स्थान का विवरण, चालक व ट्रांसपोर्टर का नाम, वाहन नंबर आदि दर्ज करना होता है। हाईवे व अन्य प्रमुख मार्गों पर वाहनों की निगरानी में लगी स्टेट जीएसटी के सचल दल की टीम इस पर नजर रखती है। वाहन नंबर से बना ई-वे बिल देखकर कर चोरी पर अंकुश लगाया जाता है।
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कुछ कारोबारी तो नियमानुसार आयात-निर्यात करते हैं, लेकिन कुछ लोग स्टेट जीएसटी को चूना लगाने की नई-नई तरकीब ढूंढ़ते हैं। बीते सप्ताह सचल दल की इकाई ने पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर एक संदिग्ध ट्रक रोकवाया। इसमें बीड़ी के लगभग 300 गत्ते लदे थे। सामान की अनुमानित कीमत लगभग 10 लाख रुपये थी, लेकिन 20 से अधिक लोगों के नाम बिलिंग हुई थी। किसी बिल पर 50 हजार रुपये तक के सामान नहीं खरीदे गए थे।
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छानबीन में पता चला कि यह माल बंगाल से आ रहा था। बिलिंग के अनुरूप इन्हें हरियाणा ले जाना था, लेकिन चालक ने उत्तर प्रदेश के भीतर ही सामान पहुंचाने का दावा किया। वहीं, जिनके नाम बिल बनाया गया था, उनमें किसी के आधार कार्ड हरियाणा के नहीं थे। इससे आशंका जताई गई कि कारोबारी ने ई-वे बिल बनाने से बचने के लिए टुकड़ों में फर्जी बिलिंग कराई है। फिलहाल अभी इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है और जांच जारी होने का दावा किया गया है।
अपर आयुक्त ग्रेड-2 अमित मोहन ने बताया कि कर चोरी करने के मकसद से इस तरह के कृत्य किए जा रहे हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए विभाग अलर्ट है। ऐसे वाहनों की जांच लगातार की जा रही है।