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Ayodhya News: असिस्टेंट प्रोफेसर को परीक्षक नियुक्त किए जाने पर रोक
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अयोध्या। अंबेडकर नगर के बीएनकेबी महाविद्यालय के भूगोल विभाग के स्ववित्त पोषित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सूर्यनाथ मौर्य को डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में परीक्षक नियुक्त किए जाने पर रोक लगाते हुए मूल्यांकन कार्य से वंचित कर दिया गया है। इस संबंध में विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक विनय कुमार सिंह की ओर से आदेश जारी किया गया है।
परीक्षा नियंत्रक के आदेश में कहा गया है कि सहायंक आचार्य डॉ. मौर्य ने अंबेडकर नगर के ही सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय में भूगोल विषय की प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षा के संबंध में तीन जुलाई को एक शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसके निस्तारण के लिए कुलपति ने एक समिति का गठन किया था। इस समिति की ओर से संबंधित पक्षों के लिखित और मौखिक पक्ष पर विचार करने के बाद डॉ. मौर्य की शिकायत निराधार, प्रमाणहीन और मिथ्या आधारित होने के कारण निरस्त किए जाने की संस्तुति की गई थी।
इस रिपोर्ट को कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की ओर से अनुमोदन प्रदान करते हुए डॉ. मौर्य के शिकायती प्रार्थना पत्र को निरस्त किए जाने और उन्हें विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए परीक्षक न बनाने के साथ मूल्यांकन कार्य से वंचित करने का निर्णय लिया गया है। कुलपति के आदेश पर डॉ. मौर्य के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया गया है। डॉ. मौर्य ने वाह्य परीक्षक के रूप में सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय में बीए के दूसरे सेमेस्टर की भूगोल विषय की प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षा में गड़बड़ी और दंबंगई समेत कई आरोप लगाए थे। उनका आरोप था कि प्रायोगिक परीक्षा में अनुपस्थित छात्रों को भी उपस्थित दिखाकर पूरे अंक देने का उन पर दबाव बनाया गया था। इतना ही नहीं कॉलेज लॉग इन से मनमाने अंक विश्वविद्यालय पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए थे।
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परीक्षा नियंत्रक के आदेश में कहा गया है कि सहायंक आचार्य डॉ. मौर्य ने अंबेडकर नगर के ही सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय में भूगोल विषय की प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षा के संबंध में तीन जुलाई को एक शिकायती प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इसके निस्तारण के लिए कुलपति ने एक समिति का गठन किया था। इस समिति की ओर से संबंधित पक्षों के लिखित और मौखिक पक्ष पर विचार करने के बाद डॉ. मौर्य की शिकायत निराधार, प्रमाणहीन और मिथ्या आधारित होने के कारण निरस्त किए जाने की संस्तुति की गई थी।
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इस रिपोर्ट को कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह की ओर से अनुमोदन प्रदान करते हुए डॉ. मौर्य के शिकायती प्रार्थना पत्र को निरस्त किए जाने और उन्हें विश्वविद्यालय की परीक्षाओं के लिए परीक्षक न बनाने के साथ मूल्यांकन कार्य से वंचित करने का निर्णय लिया गया है। कुलपति के आदेश पर डॉ. मौर्य के प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया गया है। डॉ. मौर्य ने वाह्य परीक्षक के रूप में सरदार पटेल स्मारक महाविद्यालय में बीए के दूसरे सेमेस्टर की भूगोल विषय की प्रायोगिक और मौखिकी परीक्षा में गड़बड़ी और दंबंगई समेत कई आरोप लगाए थे। उनका आरोप था कि प्रायोगिक परीक्षा में अनुपस्थित छात्रों को भी उपस्थित दिखाकर पूरे अंक देने का उन पर दबाव बनाया गया था। इतना ही नहीं कॉलेज लॉग इन से मनमाने अंक विश्वविद्यालय पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए थे।
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