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Ayodhya News: अयोध्या ने दिया ‘अतिथि देवो भव’ का संदेश
Tue, 25 Nov 2025 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Tue, 25 Nov 2025 11:12 PM IST
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3-जय श्री राम का जय घोष करते युवा।-संवाद
अयोध्या। अयोध्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह नगरी केवल आस्था की राजधानी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के मूल मंत्र ‘अतिथि देवो भव’ की जीवंत प्रतिमूर्ति भी है। ध्वजारोहण के पावन अवसर पर देश के कोने-कोने से आए मेहमानों का जिस गर्मजोशी, विनम्रता और आत्मीयता से स्वागत किया गया, उससे पूरा वातावरण कृतज्ञता और भावनाओं से सराबोर हो उठा।
सुबह से ही रामनगरी की सड़कों पर फूलों से सजा स्वागत-पथ, हर मोड़ पर खड़ी सेवा-टोलियाँ और मुस्कुराते चेहरे अतिथियों के मन को मोह रहे थे। मेहमानों के लिए राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से आवासीय, भोजन व जलपान की नि:शुल्क व्यवस्था की गई थी। जहां मेहमान ठहरे थे वहां से उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले जाने के लिए गोल्फकार्ट, बस व ई-रिक्शा लगाए गए थे। मंदिर परिसर में तो आतिथ्य का और भी भव्य स्वरूप देखने को मिला। स्वयंसेवकों की बड़ी टीम मार्गदर्शन, सूचना, जलापूर्ति और विश्राम व्यवस्था में जुटी रही। वरिष्ठ संतों और आचार्यों का स्वागत विशेष रूप से पारंपरिक वस्त्र, अक्षत, चंदन और चरण-पूजन से किया गया। राम मंदिर में सभी श्रद्धालुओं को रामलला का प्रसाद, रामलला की मूर्ति आदि भी उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
मेहमान के रूप में ध्वजारेाहण समाराेह में शामिल हुए डॉ़ अजय गुप्ता ने कहा कि पूरा आयोजन शानदार मैनेजमेंट का उदाहरण था, मेहमानों को पूरा ख्याल रखा गया। ध्वजारोहण समारोह का साक्षी बनना जीवन की दिव्य अनुभूति है। वहीं व्हीलचेयर के जरिये ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुए देवीचरण कौशल की आंखें नम थीं, बोले अतिथि देवो भव की जो परंपरा है उसका बखूबी निवर्हन किया गया। कलियुग में त्रेतायुग सजीव होता प्रतीत हो रहा था। वहीं अतिथि सेवा में लगे संघ के नगर कार्यवाह राहुल सिंह ने इसे सौभाग्य बताया। कहा कि रामलला के भक्तों की सेवा मिलना जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। हर आगंतुक को श्रद्धा, प्रेम और सौहार्द से सेवा प्रदान करना ही हमारा कर्तव्य है।
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सुबह से ही रामनगरी की सड़कों पर फूलों से सजा स्वागत-पथ, हर मोड़ पर खड़ी सेवा-टोलियाँ और मुस्कुराते चेहरे अतिथियों के मन को मोह रहे थे। मेहमानों के लिए राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से आवासीय, भोजन व जलपान की नि:शुल्क व्यवस्था की गई थी। जहां मेहमान ठहरे थे वहां से उन्हें कार्यक्रम स्थल तक ले जाने के लिए गोल्फकार्ट, बस व ई-रिक्शा लगाए गए थे। मंदिर परिसर में तो आतिथ्य का और भी भव्य स्वरूप देखने को मिला। स्वयंसेवकों की बड़ी टीम मार्गदर्शन, सूचना, जलापूर्ति और विश्राम व्यवस्था में जुटी रही। वरिष्ठ संतों और आचार्यों का स्वागत विशेष रूप से पारंपरिक वस्त्र, अक्षत, चंदन और चरण-पूजन से किया गया। राम मंदिर में सभी श्रद्धालुओं को रामलला का प्रसाद, रामलला की मूर्ति आदि भी उपहार स्वरूप भेंट किया गया।
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मेहमान के रूप में ध्वजारेाहण समाराेह में शामिल हुए डॉ़ अजय गुप्ता ने कहा कि पूरा आयोजन शानदार मैनेजमेंट का उदाहरण था, मेहमानों को पूरा ख्याल रखा गया। ध्वजारोहण समारोह का साक्षी बनना जीवन की दिव्य अनुभूति है। वहीं व्हीलचेयर के जरिये ध्वजारोहण समारोह में शामिल हुए देवीचरण कौशल की आंखें नम थीं, बोले अतिथि देवो भव की जो परंपरा है उसका बखूबी निवर्हन किया गया। कलियुग में त्रेतायुग सजीव होता प्रतीत हो रहा था। वहीं अतिथि सेवा में लगे संघ के नगर कार्यवाह राहुल सिंह ने इसे सौभाग्य बताया। कहा कि रामलला के भक्तों की सेवा मिलना जीवन का सबसे बड़ा वरदान है। हर आगंतुक को श्रद्धा, प्रेम और सौहार्द से सेवा प्रदान करना ही हमारा कर्तव्य है।
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