{"_id":"6aea36960a52965f6c05a2fe","slug":"ayodhya-cultural-heritage-shines-in-indonesia-ayodhya-news-c-97-1-ayo1002-162367-2026-11-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: इंडोनेशिया में लहराया अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत का परचम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: इंडोनेशिया में लहराया अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत का परचम
Wed, 04 Nov 2026 01:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Wed, 04 Nov 2026 01:01 AM IST
विज्ञापन
सान्या गुप्ता।
अयोध्या। रामनगरी की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर नई पहचान मिली है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र स्थित अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय की उपसंग्रहालय अध्यक्ष सान्या गुप्ता ने इंडोनेशिया में आयोजित दो अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोधपत्र प्रस्तुत किए। उन्होंने छठ पूजा की सांस्कृतिक दृढ़ता और दिवाली की पुरातात्विक निरंतरता के माध्यम से भारतीय परंपराओं का वैश्विक संदर्भ प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने दो स्वतंत्र सत्रों का संचालन भी किया।
सान्या गुप्ता को संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह के साथ सम्मेलनों में आमंत्रित किया गया था। संग्रहालय के महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्तता के कारण डॉ. सिंह इंडोनेशिया नहीं जा सके। ऐसे में उन्होंने सान्या को प्रतिनिधित्व के लिए भेजा।
पहला शोधपत्र 26 से 31 अक्तूबर तक बाली में आयोजित एशिया पैसिफिक कॉन्फ्रेंस ऑन मैरीटाइम अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज में प्रस्तुत किया गया। इसका विषय इन द लैप ऑफ रिवर : छठ पूजा एज एन इनटैन्जिबल कल्चरल रेजिलिएंस था। इसमें छठ पूजा को नदी से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की दृढ़ता के रूप में रेखांकित किया गया।
विज्ञापन
तीन नवंबर को योग्यार्ता में आयोजित इंडो-पैसिफिक प्रीहिस्ट्री एसोसिएशन के सम्मेलन में उन्होंने दूसरा शोधपत्र प्रस्तुत किया। इसमें दिवाली परंपराओं की पुरातात्विक निरंतरता और वैश्विक स्तर पर उनके बदलते स्वरूप पर चर्चा की गई।
इसके अलावा उन्होंने डॉ. संजीव कुमार सिंह के साथ ग्लोबल आर्कियोलॉजिकल फुटप्रिंट्स : माइग्रेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ कल्चरल ईथॉस विषय पर विशेष सत्र का संयोजन भी किया। उनकी इस उपलब्धि से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और रामकथा संग्रहालय की अकादमिक गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।
विज्ञापन
सान्या गुप्ता को संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव कुमार सिंह के साथ सम्मेलनों में आमंत्रित किया गया था। संग्रहालय के महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्तता के कारण डॉ. सिंह इंडोनेशिया नहीं जा सके। ऐसे में उन्होंने सान्या को प्रतिनिधित्व के लिए भेजा।
विज्ञापन
पहला शोधपत्र 26 से 31 अक्तूबर तक बाली में आयोजित एशिया पैसिफिक कॉन्फ्रेंस ऑन मैरीटाइम अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज में प्रस्तुत किया गया। इसका विषय इन द लैप ऑफ रिवर : छठ पूजा एज एन इनटैन्जिबल कल्चरल रेजिलिएंस था। इसमें छठ पूजा को नदी से जुड़ी सांस्कृतिक परंपरा और अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की दृढ़ता के रूप में रेखांकित किया गया।
विज्ञापन
तीन नवंबर को योग्यार्ता में आयोजित इंडो-पैसिफिक प्रीहिस्ट्री एसोसिएशन के सम्मेलन में उन्होंने दूसरा शोधपत्र प्रस्तुत किया। इसमें दिवाली परंपराओं की पुरातात्विक निरंतरता और वैश्विक स्तर पर उनके बदलते स्वरूप पर चर्चा की गई।
इसके अलावा उन्होंने डॉ. संजीव कुमार सिंह के साथ ग्लोबल आर्कियोलॉजिकल फुटप्रिंट्स : माइग्रेशन एंड ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ कल्चरल ईथॉस विषय पर विशेष सत्र का संयोजन भी किया। उनकी इस उपलब्धि से अयोध्या की सांस्कृतिक विरासत और रामकथा संग्रहालय की अकादमिक गतिविधियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिली है।