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Ayodhya News: बेहोशी के चिकित्सकों ने दर्द रहित ऑपरेशन के दिए टिप्स

Sun, 27 Jul 2025 08:47 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sun, 27 Jul 2025 08:47 PM IST
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Anesthesia doctors gave tips for painless operation
अयोध्या। एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स ऑफ इंडिया के यूपी चैप्टर की ओर से आयोजित यूपीमेसिकॉन कार्यशाला का रविवार को समापन हुआ। आखिरी दिन बेहोशी के चिकित्सकों ने दर्द रहित ऑपरेशन को लेकर कई टिप्स दिए।
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मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. जेपी तिवारी ने कहा कि सर्जरी और एनेस्थीसिया का सामंजस्य बेहद जरूरी है। डे केयर सर्जरी के दौर में दर्द रहित सर्जरी आवश्यक है। इसके लिए तमाम आधुनिक तकनीकों से रू-ब-रू रहें। समय के साथ बदल रही तकनीक को स्वीकारने को तैयार रहना चाहिए।
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डॉ. सर्वजीत वर्मा ने कहा कि बेहोशी के प्रोटोकॉल अपनाना जरूरी है। ऑपरेशन से पूर्व मरीज का भलीभांति परीक्षण किया जाए। खांसी, बलगम की दिक्कत हो तो पहले उसका इलाज किया जाए। शुगर, बीपी का मरीज होने पर इसे नियंत्रित किया जाए। धूम्रपान करने वाले मरीज को इसे बंद करने की सलाह दी जाए। मरीज की अच्छी तरह काउंसलिंग हो। उसे ऑपरेशन की प्रक्रिया, इसके दुष्प्रभाव आदि से अवगत कराया जाए।
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ऑपरेशन के दौरान पड़ने वाली जरूरतों के पहले से इंतजाम रहें। मरीज का उपवास अधिक समय तक न हो, इसका ध्यान रखा जाए। ऑपरेशन के समय जहां तो संभव हो नली का प्रयोग कम किया जाए। दूरबीन विधि से होने वाले ऑपरेशनों को बढ़ावा दिया जाए। नर्व ब्लॉक करके काम चल जाए तो बेहतर है। ऐसी दवाएं दी जाएं, जिससे दर्द नियंत्रित रहे और मरीज पूरी तरह संतुष्ट होकर जाए।
डॉ. नेहा सिंह ने बताया कि ऑपरेशन की ब्लाइंड प्रक्रिया के बजाय अल्ट्रासाउंड प्रक्रिया पर काम किया जाए। ओटी में ही मरीज का बेसिक अल्ट्रासाउंड करके काफी हद तक केस की जानकारी मिलेगी। एनेस्थीसिया का अधिक उपयोग न करें। मरीज के वजन और सर्जरी के अनुसार उसे एनेस्थीसिया दी जाए। मरीज को परिवार की तरह समझें और आधुनिक तकनीकियां सीखते रहें।
डॉ. खुशबू शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन के बाद होने वाले दर्द से मरीज बहुत घबराता है, इसलिए दर्द निवारक तकनीक के तहत ऑपरेशन किए जाएं। ऑपरेशन के दौरान और उसके बाद दर्द कम करने पर फोकस रहे। दर्द प्रबंधन पर विधिवत काम किया जाए, ताकि ऑपरेशन से बाहर आने पर रोगी को पता न चले। इसके लिए चिकित्सक का विधिवत प्रशिक्षण जरूरी है। नर्व ब्लॉक तकनीक से मरीज को ऐसा इंजेक्शन दिया जाता है, जिसका असर ऑपरेशन के तीन-चार दिन तक रहे। ज्यादातर मामलों में इस विधि का उपयोग किया जा रहा है।

वहीं, मेडिकल कॉलेज के ए ब्लॉक में एमबीबीएस के विद्यार्थियों ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। इससे पहले मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सत्यजीत वर्मा ने देश-विदेश से आए चिकित्सकों को सम्मानित किया। इस मौके पर आयोजन सचिव और वरिष्ठ सर्जन डॉ. महेश चंद्र पांडेय, न्यूरो सर्जन डॉ. विक्रांत यादव, डॉ. देवाजीत शर्मा, डॉ. मनीष वर्मा आदि मौजूद रहे।
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