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Ayodhya News: अमेरिकी संस्था ने दिखाई राम मंदिर ट्रस्ट के अभियान में रुचि

Mon, 27 Apr 2026 10:57 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Mon, 27 Apr 2026 10:57 PM IST
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American Organization Shows Interest in Ram Mandir Trust's Campaign
नितिन मिश्र
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अयोध्या। प्राचीन एवं दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और संग्रहण के लिए राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी विज्ञापन को देश ही नहीं, विदेश से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। अमेरिका की एक संस्था ने भी इस अभियान में रुचि दिखाई है। अब तक ट्रस्ट को देशभर से करीब 80 कॉल प्राप्त हो चुकी हैं, जिनमें से कुछ औपचारिक आवेदन भी मिले हैं। प्राप्त आवेदनों में से तीन पर अंतिम निर्णय चार मई को नई दिल्ली में होने वाली विशेषज्ञ समिति की बैठक में लिया जाएगा।

यह पहल प्रधानमंत्री संग्रहालय, नई दिल्ली के अंतर्गत संचालित अभियान के तहत की जा रही है, जिसके अंतर्गत रामकथा संग्रहालय के रिपोजिटरी सेंटर में दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। विज्ञापन जारी होने के बाद बड़ी संख्या में ऐसे लोगों ने ट्रस्ट से संपर्क किया है, जिनके पास राम और रामायण से जुड़ी प्राचीन पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। इसी क्रम में अमेरिका स्थित ‘बजना’ संस्था ने अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. संजीव सिंह से संपर्क कर अभियान में सहयोग की इच्छा जताई है। संस्था के पदाधिकारियों अध्यक्ष अनुराग कुमार और विनय कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल उनके पास कोई दुर्लभ पांडुलिपि उपलब्ध नहीं है, लेकिन वे अमेरिका और भारत में रह रहे लोगों से संपर्क कर ऐसी पांडुलिपियों की खोज करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें खरीदकर ट्रस्ट को समर्पित भी किया जाएगा। डॉ. संजीव सिंह के अनुसार, महाराष्ट्र, अहमदाबाद, दिल्ली, मुंबई, कर्नाटक और तमिलनाडु सहित कई राज्यों से लोगों ने संपर्क कर नियम एवं शर्तों की जानकारी ली है।
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उपयोगी नहीं पाया गया मुरादाबाद के युवक का आवेदन
- डॉ. संजीव सिंह ने बताया कि फिलहाल तीन महत्वपूर्ण पांडुलिपियों पर अंतिम निर्णय चार मई को नई दिल्ली में होने वाली विशेषज्ञ समिति की बैठक में लिया जाएगा, जिसमें निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र भी शामिल होंगे। इनमें अहमदाबाद से प्राप्त लगभग 200 वर्ष पुरानी लिथोग्राफी प्रिंटेड रामायण, लखनऊ के एक वृद्ध के पास संरक्षित करीब 150 वर्ष पुरानी रामायण और कुमारगंज के जंगजीत सिंह के पास मौजूद लगभग 300 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि शामिल हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुरादाबाद के अंकित अग्रवाल का आवेदन उपयोगी नहीं पाया गया है। अग्रवाल 1992 के बाद से रामचरितमानस और सुंदरकांड का मुद्रण कर रहे हैं, जिसे ट्रस्ट के मानकों के अनुरूप दुर्लभ पांडुलिपि नहीं माना जा सकता।
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