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Ayodhya News: आठ हजार मंदिरों में एक साथ हुई जन्मोत्सव की आरती
Sun, 06 Apr 2025 08:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 06 Apr 2025 08:12 PM IST
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अयोध्या। श्रीराम जन्मोत्सव आस्था का शिखर निरूपित करने वाला रहा। भव्य महल में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही अयोध्या में नित उत्सव की धारा बह रही है। अयोध्या हर उत्सव में आत्म गौरव की अनुभूति करती है। रामजन्मोत्सव पर भी उत्सवी माहौल में राम-राम की गूंज रही। रामनगरी के आठ हजार मंदिरों में एक साथ जन्मोत्सव की आरती हुई पूरी नगरी शंख नाद से गूंजने लगी तो त्रेता युग की स्मृति जीवंत होती नजर आई।
जन्मोत्सव के मुख्य आकर्षण राम मंदिर व कनक भवन सहित नगरी के छोटे-बड़े हजारों मंदिरों के गर्भगृह में घंटो पूर्व से निष्पादित रामजन्म का कर्मकांड ठीक 12 बजे तब अभिव्यक्त हुआ जब मंदिरों के पट खुले और भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौशल्या हितकारी...की स्तुति के साथ आरती शुरू हुई। श्रीराम जन्मोत्सव का प्रतिनिधि गीत जनम लियो रघुरइया अवध मा बाजे बधइया...भी गूंजने लगा। सर्वाधिक गहमागहमी वैष्णवों की प्रधानतम पीठ कनक भवन में रही। यहां सुबह नौ बजे से ही भक्तों ने डेरा जमा दिया था। नाचते-गाते, झूमते-थिरकते, भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी। ठीक 12 बजे जैसे ही जन्मोत्सव की आरती शुरू हुई मंजीरे, ढोल की थाप पर भक्त भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
हरे रामा, रामा, रामा, रामा, रामा, हरे-हरे...जैसे भजनों पर भक्त सुधबुध खोकर भक्ति में लीन हो गए। मंदिर में तिल रखने की जगह नहीं थी। जो जहां था, वहीं रुककर भगवान श्रीराम जन्म के उल्लास में मगन दिखा। इससे पहले श्रीराम जन्मोत्सव पर उमड़े श्रद्धालुओं में पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाने की होड़ दिखी।
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रामलला के दरबार में जैसे ही जन्मोत्सव की आरती हुई अंगद टीला परिसर में पटाखे फूटने लगे। अंगद टीला परिसर में ही श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। प्रसाद पाकर श्रद्धालु तृप्त होते रहे। वहीं रामलला को फलाहारी लड्डुओं का भी भोग अर्पित किया गया। धनिया की पंजीरी के साथ ही श्रद्धालुओं को भी लड्डुओं का वितरण किया गया।
राम मंदिर से सटे रंगमहल में रामलला का जन्मोत्सव राजसी भव्यता के साथ मनाया गया। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल, गोरखपुर जिला जज राजेश्वर शुक्ल, न्यायाधीश अयोध्या देवप्रिय सारस्वत भी रंगमहल में रामजन्मोत्सव के साक्षी बने। महंत रामशरण दास की अध्यक्षता में ठीक दोपहर 12 बजे जन्म की आरती उतारी गई। इस दौरान मौजूद हजारों भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इसी के साथ मंदिर में संचालित नौ दिवसीय अनुष्ठान की भी पूर्णाहुति हुई। दशरथ महल, सियाराम किला, लक्ष्मण किला, हरिधाम गोपाल पीठ, आचारी मंदिर, बावन मंदिर, श्रीराम बल्लभाकुंज समेत हजारों मंदिरों में जन्मोत्सव की अविरल धारा प्रवाहित होती रही।
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जन्मोत्सव के मुख्य आकर्षण राम मंदिर व कनक भवन सहित नगरी के छोटे-बड़े हजारों मंदिरों के गर्भगृह में घंटो पूर्व से निष्पादित रामजन्म का कर्मकांड ठीक 12 बजे तब अभिव्यक्त हुआ जब मंदिरों के पट खुले और भए प्रकट कृपाला, दीनदयाला, कौशल्या हितकारी...की स्तुति के साथ आरती शुरू हुई। श्रीराम जन्मोत्सव का प्रतिनिधि गीत जनम लियो रघुरइया अवध मा बाजे बधइया...भी गूंजने लगा। सर्वाधिक गहमागहमी वैष्णवों की प्रधानतम पीठ कनक भवन में रही। यहां सुबह नौ बजे से ही भक्तों ने डेरा जमा दिया था। नाचते-गाते, झूमते-थिरकते, भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी। ठीक 12 बजे जैसे ही जन्मोत्सव की आरती शुरू हुई मंजीरे, ढोल की थाप पर भक्त भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।
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हरे रामा, रामा, रामा, रामा, रामा, हरे-हरे...जैसे भजनों पर भक्त सुधबुध खोकर भक्ति में लीन हो गए। मंदिर में तिल रखने की जगह नहीं थी। जो जहां था, वहीं रुककर भगवान श्रीराम जन्म के उल्लास में मगन दिखा। इससे पहले श्रीराम जन्मोत्सव पर उमड़े श्रद्धालुओं में पावन सलिला सरयू में डुबकी लगाने की होड़ दिखी।
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रामलला के दरबार में जैसे ही जन्मोत्सव की आरती हुई अंगद टीला परिसर में पटाखे फूटने लगे। अंगद टीला परिसर में ही श्रद्धालुओं के लिए भोग प्रसाद की व्यवस्था की गई थी। प्रसाद पाकर श्रद्धालु तृप्त होते रहे। वहीं रामलला को फलाहारी लड्डुओं का भी भोग अर्पित किया गया। धनिया की पंजीरी के साथ ही श्रद्धालुओं को भी लड्डुओं का वितरण किया गया।
राम मंदिर से सटे रंगमहल में रामलला का जन्मोत्सव राजसी भव्यता के साथ मनाया गया। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल, गोरखपुर जिला जज राजेश्वर शुक्ल, न्यायाधीश अयोध्या देवप्रिय सारस्वत भी रंगमहल में रामजन्मोत्सव के साक्षी बने। महंत रामशरण दास की अध्यक्षता में ठीक दोपहर 12 बजे जन्म की आरती उतारी गई। इस दौरान मौजूद हजारों भक्तों को प्रसाद का वितरण किया गया। इसी के साथ मंदिर में संचालित नौ दिवसीय अनुष्ठान की भी पूर्णाहुति हुई। दशरथ महल, सियाराम किला, लक्ष्मण किला, हरिधाम गोपाल पीठ, आचारी मंदिर, बावन मंदिर, श्रीराम बल्लभाकुंज समेत हजारों मंदिरों में जन्मोत्सव की अविरल धारा प्रवाहित होती रही।