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अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021: 11 झांकियां दिलाएंगी रामायण काल की याद, विशेष शिवलिंग होगा आकर्षण का केंद्र

Tue, 02 Nov 2021 11:34 AM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Tue, 02 Nov 2021 11:34 AM IST
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सार
रामलीला कमेटी के संस्थापक नवल किशोर पांडेय ने अमर उजाला को बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला का मंचन कर रहे हैं। अयोध्या दिव्य दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए उनके कलाकारों को लगभग एक हफ्ते से प्रतिदिन प्रशिक्षण दिया जा रहा है...
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Ayodhya Divya Deepotsav 2021: 11 tableaux will remind of Ramayana period
अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021: - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021 की तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं। इस समय राम की पैड़ी घाट से लेकर अयोध्या के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए कलाकार जुटे हुए हैं। दीपोत्सव कार्यक्रम में 11 झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी, जिनमें रामायणकालीन विभिन्न दृश्यों को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इसमें राम दरबार, पुष्पक विमान से भगवान राम की अयोध्या वापसी, भगवान बाल्मीकि की कुटी, अशोक वाटिका, हनुमान द्वारा लंका दहन और अन्य दृश्य दिखाए जाएंगे।

अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021:
अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021: - फोटो : Amar Ujala

एक हफ्ते से चल रहा है प्रशिक्षण

भगवान राम के जीवन से जुड़े दृश्यों को दिखाने के लिए श्रीप्रमोद वन बिहारी विहारिणीजू रामलीला मंडल कमेटी के लगभग 21 सदस्य रामायण के विभिन्न किरदारों को निभा रहे हैं। रामलीला कमेटी के संस्थापक नवल किशोर पांडेय ने अमर उजाला को बताया कि वे पिछले 40 वर्षों से देश के विभिन्न हिस्सों में रामलीला का मंचन कर रहे हैं। अयोध्या दिव्य दीपोत्सव कार्यक्रम के लिए उनके कलाकारों को लगभग एक हफ्ते से प्रतिदिन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब सभी कलाकार अपने रामायणकालीन किरदारों को निभाने के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुके हैं।

अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021:
अयोध्या दिव्य दीपोत्सव 2021: - फोटो : Amar Ujala

भाव और समर्पण की भी जरूरत

झांकियों में भगवान शिव का एक रूप माना जाना वाला शिवलिंग भी होगा, जिसे भगवान राम ने समुद्र पार करने के पूर्व समुद्र तट पर स्थापित किया था। इसे एक विशेष झांकी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। शिवलिंग को अंतिम रूप देते हुए कलाकार प्रदीप व्याहुत ने बताया कि जब से अयोध्या दीपोत्सव कार्यक्रम की शुरुआत हुई है, तब से वे हर वर्ष शिवलिंग को अंतिम रूप देने का कार्य वे करते आ रहे हैं। एक झांकी को तैयार करने के लिए लगभग 15 दिन का समय लगता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्हें बहुत सावधानी से काम करने की जरूरत होती है। इन मूर्तियों को अंतिम रूप देने के लिए केवल कला की जानकारी होना ही नहीं, बल्कि इनके लिए भाव और समर्पण की भी जरूरत होती है जो इन कलाकारों की कोशिश में दिखाई पड़ रहा है।

झांकियों को अंतिम रूप देने का कार्य अयोध्या के साकेत डिग्री कॉलेज में किया जा रहा है। बताया गया है कि झांकियां इस कॉलेज से निकलकर अयोध्या की विभिन्न गलियों से होते हुए राम की पैड़ी घाट पर ले जाई जाएंगी, जहां पर मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

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