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Auraiya News: यमुना खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर, सिकरोड़ी पहुंची एसडीआरएफ
Thu, 31 Jul 2025 10:58 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 31 Jul 2025 10:58 PM IST
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औरैयाअजीतमल। कोटा बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना रौद्र रूप में आ गई है। शेरगढ़ घाट पर पानी खतरे के निशान से तीन मीटर ऊपर तक पहुंच गया है। सिकरोड़ी गांव में बाढ़ के हालात हैं। गांव में पानी भरने से 56 परिवारों को सुरक्षित ठिकानों पर भेजा गया है। इसके अलावा सदर व अजीतमल क्षेत्र के कई गांव बाढ़ से घिर गए हैं। सिकरोड़ी में हालात गंभीर होने पर एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई है। सिकरोड़ी के स्कूल में भी पानी भर गया है। हालात बिगड़ने से अधिकारी क्षेत्र में कैंप कर रहे हैं।
चंबल में कोटा बैराज से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी के कारण पिछले तीन दिन से यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को शेरगढ़ घाट पर जल स्तर खतरे के निशान को पार किया था लेकिन गुरुवार को इसमें बेतहाशा वृद्धि हुई और जल स्तर खतरे के निशान से तीन मीटर के करीब पार हो गया। केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के मुताबिक पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। इससे जल स्तर में और वृद्धि होने की संभावना है।
उधर, अजीतमल तहसील का सिकरोड़ी गांव सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। गांव में बाढ़ का पानी घुसने से 56 परिवारों को बाहर निकाला गया है। उन्हें बाढ़ चौकी व टेंटों में रखा गया है। दो दिन से प्रशासन 600 लोगों के खाने व राशन आदि की किट वितरित करा रहा है। इसके अलावा सदर तहसील के फरिहा, नौरी, जुहीखा व अस्ता गांवों में बाढ़ का खतरा मड़ंरा रहा है। बुधवार रात को ही नौरी व फरिहा में पानी घुस गया था जबकि अजीतमल के गौहानीकलां, बड़ेरा व भूरेपुर कलां भी बाढ़ की चपेट में हैं।
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इन गांवों के रास्तों व निचले स्थानों पर पानी पहुंचने से आवागमन ठप हो गया है। प्रशासन ने बड़ेरा में एक व गौहानीकलां में दो नावों की व्यवस्था की है। सिकरोड़ी के स्कूल में पानी भर जाने से पढ़ाई बंद कर दी गई है। वहीं हनुमानगढ़ी के स्कूल में राहत चौकी खोल दी गई है। इससे यह स्कूल भी बंद है। एसडीएम अजीतमल निखिल राजपूत ने बताया कि सिकरोड़ी में पानी बढ़ने से एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई है। बाढ़ पर लगातार नजर रखी जा रही है। कई विभागों के कर्मचारी व अफसर बाढ़ क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं। भोजन, दवा, बिजली, पानी व टेंट आदि की व्यवस्था की गई है।
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सालभर जो कमाते, बाढ़ में हो जाता बर्बाद
अजीतमल। यमुना की बाढ़ से प्रभावित सिकरोड़ी गांवों के लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। उनका कहना है कि सालभर खेतों में पसीना बहाकर जो कमाते हैं। बाढ़ में सब बर्बाद हो जाता है। यह समस्या हर साल खड़ी होती है। घर के होने के बाद भी बाढ़ के दिनों में वे बेघर हो जाते हैं। पाॅलिथीन के कैंप बनाकर परिवार समेत रहना पड़ता है। मवेशी भी खुले आसमान के नीचे रखने पड़ते हैं। काफी अनाज खराब हो जाता है। घर गृहस्थी का सामान इधर से उधर करना पड़ जाता है।
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हर साल यही हालात
फोटो-31एयूआरपी17 - होतीलाल। संवाद
होती लाल ने बताया कि हर वर्ष का यही हाल रहता है। जब-जब बैराज से पानी छोड़ा जाता है। तब यह गांव बाढ़ की चपेट में आ जाता है। पूरे वर्ष जो कमाते हैं, वह बाढ़ में सब बर्बाद हो जाता है।
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जो सामान नहीं ला पाते वो हो जाता बर्बाद
फोटो-31एयूआरपी 18- ऊषा देवी। संवाद
ऊषा देवी ने बताया कि जो भी जरूरी सामान था। वही लेकर घर से निकल आते हैं जो सामान बच जाता है। वह बाढ़ का पानी घर में घुसने से बर्बाद हो जाता है।
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फोटो-31एयूआरपी19 - आशा देवी। संवाद
आशा देवी ने बताया कि सरकार कुछ नहीं करती है। हर वर्ष यही कहा जाता है कि ऊंचे पर बसाएंगे। लेकिन जैसे ही बरसात खत्म होती है, कोई पूछने नहीं आता है। लोगों को हर वर्ष अपने पशुओं व जरूरी सामान लेकर घर से निकलना पड़ता है। जो मिलेगा वही खाकर गुजरा करना पड़ेगा।
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फोटो-31एयूआरपी20 - सुरेश कुमार। संवाद
सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी अमला आता है और आदेश देकर चला जाता है। अब बाढ़ का पानी घर में घुस गया है। जो सामान निकाल पाए, वही लेकर अब खुले में रहना पड़ेगा।
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चंबल में कोटा बैराज से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी के कारण पिछले तीन दिन से यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार को शेरगढ़ घाट पर जल स्तर खतरे के निशान को पार किया था लेकिन गुरुवार को इसमें बेतहाशा वृद्धि हुई और जल स्तर खतरे के निशान से तीन मीटर के करीब पार हो गया। केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के मुताबिक पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। इससे जल स्तर में और वृद्धि होने की संभावना है।
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उधर, अजीतमल तहसील का सिकरोड़ी गांव सर्वाधिक प्रभावित हुआ है। गांव में बाढ़ का पानी घुसने से 56 परिवारों को बाहर निकाला गया है। उन्हें बाढ़ चौकी व टेंटों में रखा गया है। दो दिन से प्रशासन 600 लोगों के खाने व राशन आदि की किट वितरित करा रहा है। इसके अलावा सदर तहसील के फरिहा, नौरी, जुहीखा व अस्ता गांवों में बाढ़ का खतरा मड़ंरा रहा है। बुधवार रात को ही नौरी व फरिहा में पानी घुस गया था जबकि अजीतमल के गौहानीकलां, बड़ेरा व भूरेपुर कलां भी बाढ़ की चपेट में हैं।
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इन गांवों के रास्तों व निचले स्थानों पर पानी पहुंचने से आवागमन ठप हो गया है। प्रशासन ने बड़ेरा में एक व गौहानीकलां में दो नावों की व्यवस्था की है। सिकरोड़ी के स्कूल में पानी भर जाने से पढ़ाई बंद कर दी गई है। वहीं हनुमानगढ़ी के स्कूल में राहत चौकी खोल दी गई है। इससे यह स्कूल भी बंद है। एसडीएम अजीतमल निखिल राजपूत ने बताया कि सिकरोड़ी में पानी बढ़ने से एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई है। बाढ़ पर लगातार नजर रखी जा रही है। कई विभागों के कर्मचारी व अफसर बाढ़ क्षेत्रों में कैंप कर रहे हैं। भोजन, दवा, बिजली, पानी व टेंट आदि की व्यवस्था की गई है।
सालभर जो कमाते, बाढ़ में हो जाता बर्बाद
अजीतमल। यमुना की बाढ़ से प्रभावित सिकरोड़ी गांवों के लोग अपनी किस्मत को कोस रहे हैं। उनका कहना है कि सालभर खेतों में पसीना बहाकर जो कमाते हैं। बाढ़ में सब बर्बाद हो जाता है। यह समस्या हर साल खड़ी होती है। घर के होने के बाद भी बाढ़ के दिनों में वे बेघर हो जाते हैं। पाॅलिथीन के कैंप बनाकर परिवार समेत रहना पड़ता है। मवेशी भी खुले आसमान के नीचे रखने पड़ते हैं। काफी अनाज खराब हो जाता है। घर गृहस्थी का सामान इधर से उधर करना पड़ जाता है।
हर साल यही हालात
फोटो-31एयूआरपी17 - होतीलाल। संवाद
होती लाल ने बताया कि हर वर्ष का यही हाल रहता है। जब-जब बैराज से पानी छोड़ा जाता है। तब यह गांव बाढ़ की चपेट में आ जाता है। पूरे वर्ष जो कमाते हैं, वह बाढ़ में सब बर्बाद हो जाता है।
जो सामान नहीं ला पाते वो हो जाता बर्बाद
फोटो-31एयूआरपी 18- ऊषा देवी। संवाद
ऊषा देवी ने बताया कि जो भी जरूरी सामान था। वही लेकर घर से निकल आते हैं जो सामान बच जाता है। वह बाढ़ का पानी घर में घुसने से बर्बाद हो जाता है।
फोटो-31एयूआरपी19 - आशा देवी। संवाद
आशा देवी ने बताया कि सरकार कुछ नहीं करती है। हर वर्ष यही कहा जाता है कि ऊंचे पर बसाएंगे। लेकिन जैसे ही बरसात खत्म होती है, कोई पूछने नहीं आता है। लोगों को हर वर्ष अपने पशुओं व जरूरी सामान लेकर घर से निकलना पड़ता है। जो मिलेगा वही खाकर गुजरा करना पड़ेगा।
फोटो-31एयूआरपी20 - सुरेश कुमार। संवाद
सुरेश कुमार ने बताया कि सरकारी अमला आता है और आदेश देकर चला जाता है। अब बाढ़ का पानी घर में घुस गया है। जो सामान निकाल पाए, वही लेकर अब खुले में रहना पड़ेगा।