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Auraiya News: शेरगढ़ में यमुना खतरे के निशान के पार
Thu, 31 Jul 2025 12:27 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 31 Jul 2025 12:27 AM IST
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शेरगढ़ घाट पर उफनाती यमुना नदी।
- फोटो : शेरगढ़ घाट पर उफनाती यमुना नदी।
औरैया। कोटा बैराज से छोड़े गए तीन लाख क्यूसेक पानी से बुधवार की दोपहर शेरगढ़ में यमुना खतरे के निशान को पार कर गई। इससे यमुना की तलहटी के गांवों में पानी घुस गया।
अजीतमल के 12 व सदर तहसील के अस्ता व नौरी गांव बाढ़ से घिर गए हैं। मई व अस्ता संपर्क मार्ग पर दो फुट तक पानी भर गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि दो दिन में हालात और बिगड़ सकते हैं।
चार दिन पहले राजस्थान के कोटा बैराज से चंबल नदी में तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। चंबल का दायरा कम होने से पचनद के संगम से यह पानी यमुना में पहुंचा है। इससे यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा।
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मंगलवार की शाम जुहीखा में यमुना जलस्तर खतरे से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया था। इससे गौहानी कलां, बड़ेरा और सिकरोड़ी गांव में पानी घुसने से इन गांवों का संपर्क टूट चुका है। जिला व तहसील प्रशासन ने यहां बाढ़ राहत चौकियां स्थापित कर लोगों को सुरक्षित पहुंचाने का काम शुरू किया है।
वहीं, लगातार पानी की रफ्तार बढ़ने से बुधवार की दोपहर एक बजे तक शेरगढ़ घाट पर जलस्तर खतरे का निशान को पार कर गया। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। उससे अभी दो दिन तक राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
उधर, यमुना की तलहटी में बसे गांवों में बाढ़ के हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर सबसे ज्यादा अजीतमल तहसील के यमुना पट्टी के गांवों में दिखाई दे रहा है। औरैया तहसील के अयाना क्षेत्र में बसे कुछ गांव के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। मई अस्ता गांव के संपर्क मार्गों तक पानी पहुंच गया है।
एसडीएम सदर राकेश कुमार ने बताया कि यमुना की बाढ़ से तहसील के दो गांव मई और अस्ता प्रभावित हैं। यहां के संपर्क मार्ग पर दो फुट तक पानी पहुंच गया है। आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की गई है। अस्ता गांव के मंदिर पर बाढ़ राहत चौकी स्थापित की गई है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। वह स्वयं कैंप कर रहे हैं।
29 तक पानी चेतावनी बिंदु 112 तक पहुंचा था
शेरगढ़ घाट के पास स्थापित केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के मुताबिक बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना का जलस्तर 28 जुलाई की रात से बढ़ना शुरू हुआ है। 29 जुलाई तक पानी चेतावनी बिंदु 112 तक पहुंचा था। बुधवार की सुबह पानी खतरे के निशान 113 पर पहुंच गया। दोपहर एक बजे के बाद जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।
श्मशान घाट डूबा, मिट्टी में कटान शुरू
पानी की रफ्तार इतनी तेज है कि पुल के आसपास की अड्डी व जमा मिट्टी में कटान शुरू हो गया। श्मशान घाट पूरी तरह डूब गया है। नगर पालिका द्वारा बनवाए गए शवदाह स्थलों के आसपास पानी भर गया है। लोगों को शव का अंतिम संस्कार करने में मुश्किल हो रही। लोगों को यमुना से काफी दूर अंतिम संस्कार करने का इंतजाम करना पड़ रहा है।
आपदा में रोजगार की तलाश में मछुआरे
औरैया। यमुना में पानी का बहाव इतना तेज है कि अड्डी तक कट रही हैं। इसके बावजूद कई मछुआरे इस आपदा में अपना रोजगार तलाश रहे हैं। वह जान जोखिम में डालकर मछली का शिकार कर रहे हैं। शेरगढ़ घाट पर यमुना का पुल इस समय मरम्मत के कारण बंद हैं। पुल के दोनों तरफ आवाजाही रोकने के लिए पुलिस तैनात है। इसके बाद भी मछुआरे बीहड़ में घुसकर यमुना पुल के पास पहुंचकर मछली पकड़ रहे। इससे मिट्टी ढहने व चारों तरफ पानी भरने से हादसा हो सकता है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों ने उन्हें कई बार वहां से चले जाने को कहा, लेकिन उन लोगों ने अनसुना कर दिया। (संवाद)
सिकरोड़ी में घुसा पानी, पलायन कर रहे ग्रामीण
अजीतमल। लगातार बढ़ रहे यमुना के जल स्तर से सिकरोड़ी गांव में पानी घुसने लगा है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं और वह पलायन करने लगे हैं। गांव में निचले स्थानों पर रहने वाले कई परिवार जरूरत का सामान लेकर गांव की सड़क पर पहुंचने लगे हैं। हालांकि प्रशासन ने इनके लिए बाढ़ राहत चौकी की व्यवस्था की है। (संवाद)
हर साल बाढ़ की चपेट में आता गौहानी कलां मार्ग
अजीतमल। जब-जब यमुना में बाढ़ आती है। तब गौहानी कलां का संपर्क मार्ग पानी में डूब जाता है। इस मार्ग को न आज तक पक्का किया गया है और न ही यहां रपटा पर बनी पुलिया को ऊंचा किया गया है। यही कारण है कि जब भी यमुना में पानी बढ़ता है। यह पुलिया व कच्चा मार्ग पानी में डूब जाता है।
साल 2019 में तत्कालीन डीएम ने इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजने का आदेश दिया था। तहसील प्रशासन की ओर से रिपोर्ट तैयार कर लोक निर्माण विभाग को तभी सौंप दी गई थी, लेकिन न रपटा की पुलिया ऊंची हुई और न ही कच्चा मार्ग ही पक्का हो सका है। मालूम हो कि 19 अगस्त 2019 को निरीक्षण करने पहुंचे तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह व एसपी सुनीति की गाड़ियां गौहानी कला तक नहीं पहुंच सकी थीं।
तब दोनों अफसर कोतवाली निरीक्षक की गाड़ी में बैठकर गौहानी कलां पहुंच सके थे। तब डीएम से ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग पक्का कराने और सिकरोड़ी मार्ग की रपटा पुलिया ऊंची कराने की मांग की थी। डीएम ने मौके पर मौजूद तत्कालीन तहसीलदार संध्या शर्मा को प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के आदेश दिए थे। एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि पहले भी इस मार्ग के निर्माण के लिए रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब वह फिर से रिपोर्ट भिजवाएंगे। (संवाद)
एसडीएम ने डेरा डाला, वाटरप्रूफ टेंट व जनरेटर की व्यवस्था
अजीतमल। सिकरोड़ी में बाढ़ का पानी घुसने व आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा होने पर एसडीएम निखिल राजपूत व तहसील प्रशासन कैंप कर रहा है। लोगों को राहत देने के लिए हनुमानगढ़ी स्कूल में सभी व्यवस्थाएं कराई गई हैं।
इसके अलावा टेंट लगाए जा रहे हैं और बिजली के लिए जनरेटर, पेयजल व राशन की व्यवस्था भी कराई जा रही है। ग्रामीणों के मवेशियों के लिए भी इंतजाम करने में प्रशासन जुटा हुआ है। लोगों को पानी बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी जा रही है। (संवाद)
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अजीतमल के 12 व सदर तहसील के अस्ता व नौरी गांव बाढ़ से घिर गए हैं। मई व अस्ता संपर्क मार्ग पर दो फुट तक पानी भर गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि दो दिन में हालात और बिगड़ सकते हैं।
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चार दिन पहले राजस्थान के कोटा बैराज से चंबल नदी में तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। चंबल का दायरा कम होने से पचनद के संगम से यह पानी यमुना में पहुंचा है। इससे यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ रहा।
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मंगलवार की शाम जुहीखा में यमुना जलस्तर खतरे से करीब एक मीटर ऊपर पहुंच गया था। इससे गौहानी कलां, बड़ेरा और सिकरोड़ी गांव में पानी घुसने से इन गांवों का संपर्क टूट चुका है। जिला व तहसील प्रशासन ने यहां बाढ़ राहत चौकियां स्थापित कर लोगों को सुरक्षित पहुंचाने का काम शुरू किया है।
वहीं, लगातार पानी की रफ्तार बढ़ने से बुधवार की दोपहर एक बजे तक शेरगढ़ घाट पर जलस्तर खतरे का निशान को पार कर गया। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक जिस रफ्तार से पानी बढ़ रहा है। उससे अभी दो दिन तक राहत मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
उधर, यमुना की तलहटी में बसे गांवों में बाढ़ के हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। इसका असर सबसे ज्यादा अजीतमल तहसील के यमुना पट्टी के गांवों में दिखाई दे रहा है। औरैया तहसील के अयाना क्षेत्र में बसे कुछ गांव के लोग बाढ़ की आशंका से भयभीत हैं। मई अस्ता गांव के संपर्क मार्गों तक पानी पहुंच गया है।
एसडीएम सदर राकेश कुमार ने बताया कि यमुना की बाढ़ से तहसील के दो गांव मई और अस्ता प्रभावित हैं। यहां के संपर्क मार्ग पर दो फुट तक पानी पहुंच गया है। आवागमन के लिए नाव की व्यवस्था की गई है। अस्ता गांव के मंदिर पर बाढ़ राहत चौकी स्थापित की गई है। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट है। वह स्वयं कैंप कर रहे हैं।
29 तक पानी चेतावनी बिंदु 112 तक पहुंचा था
शेरगढ़ घाट के पास स्थापित केंद्रीय जल आयोग के कंट्रोल रूम के मुताबिक बैराज से छोड़े गए पानी से यमुना का जलस्तर 28 जुलाई की रात से बढ़ना शुरू हुआ है। 29 जुलाई तक पानी चेतावनी बिंदु 112 तक पहुंचा था। बुधवार की सुबह पानी खतरे के निशान 113 पर पहुंच गया। दोपहर एक बजे के बाद जलस्तर खतरे के निशान को पार कर गया।
श्मशान घाट डूबा, मिट्टी में कटान शुरू
पानी की रफ्तार इतनी तेज है कि पुल के आसपास की अड्डी व जमा मिट्टी में कटान शुरू हो गया। श्मशान घाट पूरी तरह डूब गया है। नगर पालिका द्वारा बनवाए गए शवदाह स्थलों के आसपास पानी भर गया है। लोगों को शव का अंतिम संस्कार करने में मुश्किल हो रही। लोगों को यमुना से काफी दूर अंतिम संस्कार करने का इंतजाम करना पड़ रहा है।
आपदा में रोजगार की तलाश में मछुआरे
औरैया। यमुना में पानी का बहाव इतना तेज है कि अड्डी तक कट रही हैं। इसके बावजूद कई मछुआरे इस आपदा में अपना रोजगार तलाश रहे हैं। वह जान जोखिम में डालकर मछली का शिकार कर रहे हैं। शेरगढ़ घाट पर यमुना का पुल इस समय मरम्मत के कारण बंद हैं। पुल के दोनों तरफ आवाजाही रोकने के लिए पुलिस तैनात है। इसके बाद भी मछुआरे बीहड़ में घुसकर यमुना पुल के पास पहुंचकर मछली पकड़ रहे। इससे मिट्टी ढहने व चारों तरफ पानी भरने से हादसा हो सकता है। केंद्रीय जल आयोग के कर्मचारियों ने उन्हें कई बार वहां से चले जाने को कहा, लेकिन उन लोगों ने अनसुना कर दिया। (संवाद)
सिकरोड़ी में घुसा पानी, पलायन कर रहे ग्रामीण
अजीतमल। लगातार बढ़ रहे यमुना के जल स्तर से सिकरोड़ी गांव में पानी घुसने लगा है। इससे ग्रामीण भयभीत हैं और वह पलायन करने लगे हैं। गांव में निचले स्थानों पर रहने वाले कई परिवार जरूरत का सामान लेकर गांव की सड़क पर पहुंचने लगे हैं। हालांकि प्रशासन ने इनके लिए बाढ़ राहत चौकी की व्यवस्था की है। (संवाद)
हर साल बाढ़ की चपेट में आता गौहानी कलां मार्ग
अजीतमल। जब-जब यमुना में बाढ़ आती है। तब गौहानी कलां का संपर्क मार्ग पानी में डूब जाता है। इस मार्ग को न आज तक पक्का किया गया है और न ही यहां रपटा पर बनी पुलिया को ऊंचा किया गया है। यही कारण है कि जब भी यमुना में पानी बढ़ता है। यह पुलिया व कच्चा मार्ग पानी में डूब जाता है।
साल 2019 में तत्कालीन डीएम ने इसकी रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजने का आदेश दिया था। तहसील प्रशासन की ओर से रिपोर्ट तैयार कर लोक निर्माण विभाग को तभी सौंप दी गई थी, लेकिन न रपटा की पुलिया ऊंची हुई और न ही कच्चा मार्ग ही पक्का हो सका है। मालूम हो कि 19 अगस्त 2019 को निरीक्षण करने पहुंचे तत्कालीन डीएम अभिषेक सिंह व एसपी सुनीति की गाड़ियां गौहानी कला तक नहीं पहुंच सकी थीं।
तब दोनों अफसर कोतवाली निरीक्षक की गाड़ी में बैठकर गौहानी कलां पहुंच सके थे। तब डीएम से ग्रामीणों ने संपर्क मार्ग पक्का कराने और सिकरोड़ी मार्ग की रपटा पुलिया ऊंची कराने की मांग की थी। डीएम ने मौके पर मौजूद तत्कालीन तहसीलदार संध्या शर्मा को प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के आदेश दिए थे। एसडीएम निखिल राजपूत ने बताया कि पहले भी इस मार्ग के निर्माण के लिए रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। अब वह फिर से रिपोर्ट भिजवाएंगे। (संवाद)
एसडीएम ने डेरा डाला, वाटरप्रूफ टेंट व जनरेटर की व्यवस्था
अजीतमल। सिकरोड़ी में बाढ़ का पानी घुसने व आसपास के गांवों में बाढ़ का खतरा होने पर एसडीएम निखिल राजपूत व तहसील प्रशासन कैंप कर रहा है। लोगों को राहत देने के लिए हनुमानगढ़ी स्कूल में सभी व्यवस्थाएं कराई गई हैं।
इसके अलावा टेंट लगाए जा रहे हैं और बिजली के लिए जनरेटर, पेयजल व राशन की व्यवस्था भी कराई जा रही है। ग्रामीणों के मवेशियों के लिए भी इंतजाम करने में प्रशासन जुटा हुआ है। लोगों को पानी बढ़ने पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने की सलाह दी जा रही है। (संवाद)