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हरित क्रांति लाने को भागीरथ बने आदेश
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Sun, 17 Apr 2016 11:10 PM IST
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रिश्तेदार के तिलक समारोह में कन्या पक्ष को पौधों का उपहार देते पाल आदेश कुमार
- फोटो : amar ujala beuro
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भाग्यनगर ब्लाक के शेरपुर सरैंया गांव के पाल आदेश कुमार ने गांव और आसपास के क्षेत्र में हरित क्रांति लाने की अनूठी पहल की है। पेशे से राज-मिस्त्री आदेश कुमार बीते दो सालों से किसी भी आयोजन में बतौर उपहार पौधे भेंट करते हैं। फिर चाहे वह शादी समारोह हो या फिर किसी का तेरहवीं संस्कार। उनका मकसद को बस धरती को हरा-भरा करना है।
आठवीं कक्षा तक पढ़े 46 साल के आदेश कुमार उर्फ मुनीम मिस्त्री का जुड़ाव गांव से बहुत है। शहर से फफूंद रोड पर स्थित गांव शेरपुर सरैया निवासी आदेश कुमार के पिता लालजीत सिंह किसान हैं। कुछ दिनों शहर औरआस-पास के गांवों में राज मिस्त्री का काम करने के बाद आदेश गुजरात चले गए। राजधानी गांधी नगर में काम करते हुए आदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बतौर मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हुए बहुत करीब से देखा। वह उनके काम की शैली के कायल हो गए।
14 साल गुजरात में काम करने के बाद अब आदेश गांव लौट आए हैं। बीते दो सालों से वह गांव में राज-मिस्त्री का काम कर रहे हैं। इस दौरान मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित होकर समाज में हरित क्रांति लाने का भागीरथ विचार बना लिया। इसके लिए आदेश ने विवाह, तिलकोत्सव से लेकर तेरहवीं संस्कार के मौके पर लोगों को पौधे भेंट करने की अनूठी पहल छेड़ दी। गांव, रिश्तेदारी व व्यवहारी के यहां जन्म, लग्न और अंतिम संस्कार के मौके पर नि:शुल्क पौध बांटकर यादगार स्वरूप उसे रोपित कराने में पूरी निष्ठा से जुटे हैं।
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पौधे बांट कर समाज में हरित क्रांति लाने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली है। पर्यावरण संरक्षित करने के लिए खुशी और गम दोनों अवसरों को यादगार बनाने के लिए पौधे रोपित कराना ही मेरा लक्ष्य है। इस काम में लोगों का सहयोग भी मिल रहा है।
पाल आदेश कुमार
21 आयोजनों में बांटे 800 पौधे
करीब दो साल पहले गुजरात छोड़कर अपने गांव लौटे आदेश कुमार ने अब तक 800 पौधे बांटे हैं। उन्होंने बताया कि यह पौधे उन्होंने जन्म, मरण और लगन के 21 आयोजनों में बांटे हैं। इनमें तेरहवीं के चार, जन्मोत्सव के 11 और छह तिलक व विवाह समारोह रहे हैं। आयोजनों में पांच, सात, नौ, 11 और 21 के शुभ अंकों की संख्या तक पौधे भेंट कर रहे हैं। इन सबके बीच खास बात यह कि आदेश की ओर से बांटे गए सभी पौधे हरे-भरेहैं।
दिहाड़ी के 20 रुपये पौधों को अर्पित
आदेश कुमार ने अपनी मुहिम में दूसरों पर निर्भरता के बजाए अपने खून-पसीने की कमाई समर्पित की है। उन्होंने बताया कि राज-मिस्त्री के काम से मिलने वाली दिहाड़ी से रोज 20 रुपये पौधों के इंतजाम के लिए निकालते हैं।
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आठवीं कक्षा तक पढ़े 46 साल के आदेश कुमार उर्फ मुनीम मिस्त्री का जुड़ाव गांव से बहुत है। शहर से फफूंद रोड पर स्थित गांव शेरपुर सरैया निवासी आदेश कुमार के पिता लालजीत सिंह किसान हैं। कुछ दिनों शहर औरआस-पास के गांवों में राज मिस्त्री का काम करने के बाद आदेश गुजरात चले गए। राजधानी गांधी नगर में काम करते हुए आदेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बतौर मुख्यमंत्री के रूप में काम करते हुए बहुत करीब से देखा। वह उनके काम की शैली के कायल हो गए।
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14 साल गुजरात में काम करने के बाद अब आदेश गांव लौट आए हैं। बीते दो सालों से वह गांव में राज-मिस्त्री का काम कर रहे हैं। इस दौरान मोदी के स्वच्छ भारत मिशन से प्रेरित होकर समाज में हरित क्रांति लाने का भागीरथ विचार बना लिया। इसके लिए आदेश ने विवाह, तिलकोत्सव से लेकर तेरहवीं संस्कार के मौके पर लोगों को पौधे भेंट करने की अनूठी पहल छेड़ दी। गांव, रिश्तेदारी व व्यवहारी के यहां जन्म, लग्न और अंतिम संस्कार के मौके पर नि:शुल्क पौध बांटकर यादगार स्वरूप उसे रोपित कराने में पूरी निष्ठा से जुटे हैं।
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पौधे बांट कर समाज में हरित क्रांति लाने की प्रेरणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली है। पर्यावरण संरक्षित करने के लिए खुशी और गम दोनों अवसरों को यादगार बनाने के लिए पौधे रोपित कराना ही मेरा लक्ष्य है। इस काम में लोगों का सहयोग भी मिल रहा है।
पाल आदेश कुमार
21 आयोजनों में बांटे 800 पौधे
करीब दो साल पहले गुजरात छोड़कर अपने गांव लौटे आदेश कुमार ने अब तक 800 पौधे बांटे हैं। उन्होंने बताया कि यह पौधे उन्होंने जन्म, मरण और लगन के 21 आयोजनों में बांटे हैं। इनमें तेरहवीं के चार, जन्मोत्सव के 11 और छह तिलक व विवाह समारोह रहे हैं। आयोजनों में पांच, सात, नौ, 11 और 21 के शुभ अंकों की संख्या तक पौधे भेंट कर रहे हैं। इन सबके बीच खास बात यह कि आदेश की ओर से बांटे गए सभी पौधे हरे-भरेहैं।
दिहाड़ी के 20 रुपये पौधों को अर्पित
आदेश कुमार ने अपनी मुहिम में दूसरों पर निर्भरता के बजाए अपने खून-पसीने की कमाई समर्पित की है। उन्होंने बताया कि राज-मिस्त्री के काम से मिलने वाली दिहाड़ी से रोज 20 रुपये पौधों के इंतजाम के लिए निकालते हैं।