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Auraiya News: गेल के सहयोग से 60 महिलाओं को मिला कंबल का कारोबार
Sun, 14 Dec 2025 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 14 Dec 2025 12:29 AM IST
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फोटो- 7- मशीनों के जरिए कंबल बुनाई का काम करतीं महिलाएं। स्रोत:कर्मी
औरैया। गेल ने कंबल निर्माण के कारोबार के जरिये महिलाओं को स्वावलंबी बनाने की पहल की है।
साल 2013 व 2014 में कन्हों व खानपुर की महिलाओं को प्रशिक्षण देते हुए इस कारोबार से जोड़ा गया। औरैया समेत कई जनपदों को यहां से कंबल सप्लाई हो रहे हैं। बाजार में कीमत भी महज 600 रुपये निर्धारित है।
गेल की ओर से कन्हो व खानपुर गांव की महिलाओं को पहली बार साल 2013 में इस कारोबार से जोड़ा गया था। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चार समूह इस काम के लिए आगे आए। इसमें लक्ष्य स्वयं सहायता समूह, विजयलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, मुस्कान स्वयं सहायता समूह व सहेली स्वयं सहायता समूह शामिल रहे। इन समूहों की 60 महिलाएं सर्दी के सीजन में संयंत्रों के जरिए कंबल बुनाई का काम करती है।
गेल के सहयोग से कार्यरत सकि्रय विकास प्रणाली संस्था (सीवीपीएस) इस कारोबार को धार दे रही है। कच्चे माल की आवक से लेकर महिलाओं से कंबल बनवाने और सप्लाई देने में संस्था अपनी भागीदारी निभा रही है। बाजार में यहां का कंबल 600 रुपये में मिल रहा है।
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एक कंबल के निर्माण पर महिलाओं को 180 रुपये मिल रहे हैं। रोजाना दो सौ से अधिक कंबल तैयार हो रहे हैं। दिल्ली तक इस कंबल की खेप पहुंच रही है। इस मांग को देखते हुए पिछले दिनों जिला प्रशासन ने भी 1000 कंबलों की खेप यहां से मंगवाई है। सकि्रय विकास प्रणाली संस्था के समन्वयक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कंबल की डिमांड बढ़ने के साथ ही कारोबार को और बढ़ाया जा रहा है।
रोज आठ-दस कंबल तैयार कर रहीं
सीजनल काम है
प्रतिदिन आठ से 10 कंबल तैयार कर लेते हैं। यह सीजनल काम है। ऐसे में सालभर के लिए काफी कुछ रुपयों का इंतजाम हो जाता है।-खुशी
रोज दो हजार मिलते
पिछले 8 सालों से सर्दी के सीजन में कंबलों का निर्माण कर रही हैं। रोजाना दो हजार से ज्यादा रुपये का काम कर लेते है।-आरती
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साल 2013 व 2014 में कन्हों व खानपुर की महिलाओं को प्रशिक्षण देते हुए इस कारोबार से जोड़ा गया। औरैया समेत कई जनपदों को यहां से कंबल सप्लाई हो रहे हैं। बाजार में कीमत भी महज 600 रुपये निर्धारित है।
गेल की ओर से कन्हो व खानपुर गांव की महिलाओं को पहली बार साल 2013 में इस कारोबार से जोड़ा गया था। इसके लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया। चार समूह इस काम के लिए आगे आए। इसमें लक्ष्य स्वयं सहायता समूह, विजयलक्ष्मी स्वयं सहायता समूह, मुस्कान स्वयं सहायता समूह व सहेली स्वयं सहायता समूह शामिल रहे। इन समूहों की 60 महिलाएं सर्दी के सीजन में संयंत्रों के जरिए कंबल बुनाई का काम करती है।
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गेल के सहयोग से कार्यरत सकि्रय विकास प्रणाली संस्था (सीवीपीएस) इस कारोबार को धार दे रही है। कच्चे माल की आवक से लेकर महिलाओं से कंबल बनवाने और सप्लाई देने में संस्था अपनी भागीदारी निभा रही है। बाजार में यहां का कंबल 600 रुपये में मिल रहा है।
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एक कंबल के निर्माण पर महिलाओं को 180 रुपये मिल रहे हैं। रोजाना दो सौ से अधिक कंबल तैयार हो रहे हैं। दिल्ली तक इस कंबल की खेप पहुंच रही है। इस मांग को देखते हुए पिछले दिनों जिला प्रशासन ने भी 1000 कंबलों की खेप यहां से मंगवाई है। सकि्रय विकास प्रणाली संस्था के समन्वयक धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि कंबल की डिमांड बढ़ने के साथ ही कारोबार को और बढ़ाया जा रहा है।
रोज आठ-दस कंबल तैयार कर रहीं
सीजनल काम है
प्रतिदिन आठ से 10 कंबल तैयार कर लेते हैं। यह सीजनल काम है। ऐसे में सालभर के लिए काफी कुछ रुपयों का इंतजाम हो जाता है।-खुशी
रोज दो हजार मिलते
पिछले 8 सालों से सर्दी के सीजन में कंबलों का निर्माण कर रही हैं। रोजाना दो हजार से ज्यादा रुपये का काम कर लेते है।-आरती