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...अब इनका कौन है पालनहार

Sat, 23 Apr 2016 11:33 PM IST
Auraiya, Uttar pradesh, India
Auraiya, Uttar pradesh, India Updated Sat, 23 Apr 2016 11:33 PM IST
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Who is the Lord ... Now they
बर्बाद गेहूं की फसल काटता किसान - फोटो : amar ujala beuro
सूखे की मार से पीड़ित कुछ ऐसे भी किसान हैं जिनका दुखड़ा सुनने वाला कोई नहीं हैं। पानी की कमी के चलते फसली नुकसान के दायरे में आए लघु सीमांत किसानों का एक वर्ग शासन की ओर से दी जा रही इमदाद से पूरी तरह अछूता है। इस वर्ग में ऐसे किसान शामिल हैं। जिनका न तो बैंक में खाता है, और न ही वह किसी सहकारी समितियों से जुड़े हैं। इनके पास किसान क्रेेडिट कार्ड भी नहीं है। अपनी पूंजी से कृषि कार्य करने वाले इन किसानों की हालत बयां करती अमर उजाला की रिपोर्ट।
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अब हम क्या करें
धक्के खाकर भी किसान क्रेडिट कार्ड और सरकारी फसली ऋण लेने में नाकाम रहे सदर विकास खंड खेत्र के बीहड़ गांव अयाना के किसान देवेश सिंह कुशवाहा सूखे की चपेट में आ गए हैं। रबी सीजन में देवेश ने गांव के राजकिशोर मिश्रा का एक बीघा खेत बटाई पर लेकर चना बोया था। फसल बुआई के समय अन्य किसानों की तरह देवेश ने बेहतर उत्पादन से होने वाली कमाई को लेकर तमाम सपने देख रखे थे। लेकिन सूखे की भेंट चढ़ी फसल ने उसके सपनों को सुखा कर रख दिया। 15 किलो बीज की एवज में फसल कटाई के बाद देवेश के हिस्से में मात्र आठ किलो चना ही आया। नुकसान से किसान देवेश सदमे में हैं। खेतों पर चने की फसल को देखते देवेश बस यही कहता रहा कि अब हम क्या करें।
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क्या हम तक पहुंचेगी राहत राशि
बैंके तय मानकों से अधिक ब्याज वसूलती हैं, ऐसा गांव के किसानों से सुन रखा था। इसलिए न तो हमने किसान क्रेडिट कार्ड लिया और न ही किसी बैंक से फसली कर्जा लेने का प्रयास किया। अपनी जमा पूंजी से बटाई के दो बीघा पर गेहूं की फसल बोई थी। गांव के अन्य किसानों की तरह समय पर पानी न मिल पाने से पप्पू शर्मा की फसल भी प्रभावित हुई है। फसल काट रहे पप्पू शर्मा कहते हैं कि मुआवजे की भी आस नहीं है। दो एकड़ भूमि पर 14 क्विंटल ही गेहूं पैदा होने की उम्मीद है। खेत मालिक को आधा भाग देने पर उसके हिस्से में सात क्विंटल ही गेहूं पड़ रहे हैं। जबकि नौ जनों के परिवार में अकेले 12 क्विंटल गेहूं की खपत है। ऐसे में क्या हमारे जैसे किसानों तक मुख्यमंत्री की राहत राशि पहुंचेगी।
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मुश्किल में फसल कटाई
सूखे से खेतों में ही झड़ रहे दाने को देख फसलों की कटाई कराना भी किसानों के लिए आफत का रूप लेती जा रही है। थ्रेसर संचालक भी कम उत्पादन देख गेहूं फसल की मड़ाई करने में हाथ खड़े कर रहे हैं। ऐसे में सूखे की मार से आहत किसान जार-जार दिखाई दे रहा है।

गेहूं कटाई पर यह है खर्च
गेहूं की मड़ाई के लिए थ्रेसर संचालक प्रति क्विंटल 8 से 10 किलो गेहूं लेता है। एक बीघे में 10 से 12 क्विंटल औसत उत्पादन के सापेक्ष सूखे से प्रभावित खेतों में इस बार तीन से चार क्विंटल ही गेहूं निकल रहा है। थ्रेसर कटाई में आमदनी अठन्नी, खर्चा रुपैया देख थ्रेसर संचालक भी गेहूं की मड़ाई करने से पीछे हटते दिख रहे हैं।


फसल उत्पादन को लेकर न्याय पंचायत वार गांवों को चयनित क्रॉप कटिंग कराई जा रही है। सत्यापन रिपोर्ट के बाद ही मुआवजे को लेकर कुछ कहना उचित होगा।
    जितेंद्र श्रीवास्तव, एसडीएम सदर

वास्तविक नुकसान पर हो क्रॉप कटिंग
सूखे की भेंट चढ़ी गेहूं फसल के उत्पादन के आंकलन के लिए 22 अप्रैल तक जिला प्रशासन की ओर से क्राप कटिंग कराई गई है। क्रॉप कटिंग अभियान में लगाए गए डीएम, एडीएम व सीडीओ सहित कृषि व राजस्व विभाग के 38 जिला स्तरीय अधिकारियों ने जिले भर के 79 गांवों में किसानों के गेहूं फसल की क्राप कटिंग कराई है। जल्द ही जिला प्रशासन क्रॉप कटिंग रिपोर्ट भी जारी करने वाला है। सूखे के चलते उजड़े किसानों के लिए भगवान बने उक्त अधिकारियों से वास्तविक नुकसान पर ही क्रॉप कटिंग रिपोर्ट बनाने की फरियाद कर रहे।
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