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बढ़े तापमान से पैदावार में गिरावट के आसार
अमर उजाला ब्यूरो औरैया।
Updated Wed, 22 Feb 2017 11:36 PM IST
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फरवरी माह में चढ़े तापमान से रबी की फसलों में उत्पादन गिरने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों की मानें तो 10 से 15 फीसदी तक उत्पादन में गिरावट हो सकती है। कृषि वैज्ञानिक उत्पादन में गिरावट रोकने के लिए हर हफ्ते सिंचाई की राय दे रहे हैं।
फरवरी माह में रविवार से अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। अमूमन इतना तापमान अप्रैल में होता है। होली से पहले यह बढ़ा हुआ तापमान फसलों के लिए नुकसानदायक है। पिछले दिनों तापमान में गिरावट, पाला गिरने व ओलावृष्टि से फसलें प्रभावित हो गई थीं। अब बढ़ा हुआ तापमान मुश्किलें खड़ा कर रहा है।
अगैती गेहूं की बुवाई के साथ ही किसानों ने पिछैती बुवाई भी की है।
किसानों को होली तक मौसम ठंडा रहने की उम्मीद थी। होली के एक पखवाड़े पहले ही मौसम में गर्मी बढ़ गई। इससे उत्पादन गिरने के आसार हैं। यूं गेहूं की फसल में तीन से चार बार सिंचाई की जरूरत होती है। पिछैती फसल में चार से पांच बार पानी देना पड़ता है। किसान अब तक तीन बार सिंचाई कर चुके हैं। मौसम में बदलाव से छह बार तक सिंचाई करनी पड़ सकती है। ऐसे में लागत मूल्य बढ़ जाएगा।
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बंबा सूखे, नलकूपों का सहारा
नहरों में पानी है लेकिन बंबा सूखे हैं। टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। बिजली आपूर्ति नियमित न मिलने से डीजल ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है।
कीटों से बचाव
फसलों में कीटों का भी असर है। उपयुक्त नमी की दशा में आठ किलोग्राम प्रति बीघा की दर से यूरिया की टॉप ड्रेसिंग की जा सकती है। पौधों पर माहूं कीट का प्रकोप होने पर इमिडाक्लोर पिट दवा का एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करने से राहत मिलेगी।
चना व अरहर पर अधिक नुकसान
तेज तापमान से चना व अरहर की फली में छेदक कीट लगा सकता है। फली छेदक कीट दाना खराब कर देता है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में किसान कीटनाशक का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो तीन से चार दिन तक यह तापमान चना व अरहर को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या कहते हैं किसान
-भाग्यनगर ब्लाक के किसान मेवालाल का कहना है कि अभी गेहूं में दाना बनना शुरू हुआ है। ऐसा ही तापमान रहा तो दाना पतला हो जाएगा।
-औरैया ब्लाक के किसान रामआसरे का कहना है कि इतना तापमान घातक है। बढ़े तापमान से खेतों में नमी बनाए रखना चुनौती होगी।
रबी की फसल का रकवा
गेहूं- 1,13,500 हेक्टेयर
जौं- 2565 हेक्टेयर
सरसों-16832 हेक्टेयर
अलसी-50 हेक्टेयर
अरहर-85 हेक्टेयर
चना-8465 हेक्टेयर
मटर-72 हेक्टेयर
मसूर-80 हेक्टेयर
तीन दिन तक मौसम 30 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार को तीन डिग्री सेल्सियस गिरावट हुई। मौसम नरमी पकड़ सकता है। अगर तापमान बढ़ा तो दाने बनने में दिक्कत आएगी। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। विजय कुमार उप कृषि निदेशक
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फरवरी माह में रविवार से अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। अमूमन इतना तापमान अप्रैल में होता है। होली से पहले यह बढ़ा हुआ तापमान फसलों के लिए नुकसानदायक है। पिछले दिनों तापमान में गिरावट, पाला गिरने व ओलावृष्टि से फसलें प्रभावित हो गई थीं। अब बढ़ा हुआ तापमान मुश्किलें खड़ा कर रहा है।
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अगैती गेहूं की बुवाई के साथ ही किसानों ने पिछैती बुवाई भी की है।
किसानों को होली तक मौसम ठंडा रहने की उम्मीद थी। होली के एक पखवाड़े पहले ही मौसम में गर्मी बढ़ गई। इससे उत्पादन गिरने के आसार हैं। यूं गेहूं की फसल में तीन से चार बार सिंचाई की जरूरत होती है। पिछैती फसल में चार से पांच बार पानी देना पड़ता है। किसान अब तक तीन बार सिंचाई कर चुके हैं। मौसम में बदलाव से छह बार तक सिंचाई करनी पड़ सकती है। ऐसे में लागत मूल्य बढ़ जाएगा।
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बंबा सूखे, नलकूपों का सहारा
नहरों में पानी है लेकिन बंबा सूखे हैं। टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा है। फसलों की सिंचाई के लिए किसानों को नलकूपों का सहारा लेना पड़ रहा है। बिजली आपूर्ति नियमित न मिलने से डीजल ट्यूबवेल से सिंचाई करनी पड़ रही है।
कीटों से बचाव
फसलों में कीटों का भी असर है। उपयुक्त नमी की दशा में आठ किलोग्राम प्रति बीघा की दर से यूरिया की टॉप ड्रेसिंग की जा सकती है। पौधों पर माहूं कीट का प्रकोप होने पर इमिडाक्लोर पिट दवा का एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करने से राहत मिलेगी।
चना व अरहर पर अधिक नुकसान
तेज तापमान से चना व अरहर की फली में छेदक कीट लगा सकता है। फली छेदक कीट दाना खराब कर देता है। इससे उत्पादन प्रभावित होता है। ऐसे में किसान कीटनाशक का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो तीन से चार दिन तक यह तापमान चना व अरहर को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या कहते हैं किसान
-भाग्यनगर ब्लाक के किसान मेवालाल का कहना है कि अभी गेहूं में दाना बनना शुरू हुआ है। ऐसा ही तापमान रहा तो दाना पतला हो जाएगा।
-औरैया ब्लाक के किसान रामआसरे का कहना है कि इतना तापमान घातक है। बढ़े तापमान से खेतों में नमी बनाए रखना चुनौती होगी।
रबी की फसल का रकवा
गेहूं- 1,13,500 हेक्टेयर
जौं- 2565 हेक्टेयर
सरसों-16832 हेक्टेयर
अलसी-50 हेक्टेयर
अरहर-85 हेक्टेयर
चना-8465 हेक्टेयर
मटर-72 हेक्टेयर
मसूर-80 हेक्टेयर
तीन दिन तक मौसम 30 डिग्री सेल्सियस रहा। बुधवार को तीन डिग्री सेल्सियस गिरावट हुई। मौसम नरमी पकड़ सकता है। अगर तापमान बढ़ा तो दाने बनने में दिक्कत आएगी। इससे उत्पादन प्रभावित होगा। विजय कुमार उप कृषि निदेशक