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Auraiya News: छत से गिरकर घायल हुई थी किशोरी, आरोपी बरी
Sun, 31 May 2026 11:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 31 May 2026 11:56 PM IST
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औरैया। थाना अछल्दा क्षेत्र में छत से गिरकर घायल हुई किशोरी के मामले में सत्र अदालत ने साक्ष्य और गवाहों के मुकर जाने के बाद आरोपी दंपती को दोषमुक्त कर दिया।
वहीं, अदालत ने मामले में झूठी तहरीर देने के आरोप में वादी के खिलाफ वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला 25 नवंबर 2020 का है। थाना अछल्दा के गांव वंशी निवासी लालू ने पुलिस को तहरीर दी थी कि रात करीब नौ बजे पड़ोस में रहने वाले जगराम और उनकी पत्नी रेशमा ने उनकी बेटी रचना को छत से धक्का दे दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मारपीट और हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया था। शनिवार को सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया।
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अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों पीड़िता रचना, उसके पिता लालू, माता रामशीला और भाई बलवीर ने अदालत के सामने कहा कि अभियुक्तों ने कोई धक्का नहीं दिया था। पीड़िता ने बताया कि छत पर बाउंड्री न होने के कारण अंधेरे में उसका पैर फिसल गया था, जिससे वह नीचे गिर गई और उसे चोटें आईं।
अभियोजन पक्ष के गवाहों के पलटने के कारण अदालत ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जगराम और रेशमा को दोषमुक्त कर दिया।
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एससी-एसटी के फर्जी मुकदमे में पांच आरोपी बरी
औरैया। बिधूना कोतवाली क्षेत्र में करीब आठ साल पुराने एक मामले में विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने फैसला सुनाते हुए पांचों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मुकदमा रंजिश के चलते पेशबंदी में दर्ज कराया गया था।
मामला वर्ष 2018 का है, जब गांव नूराबाद निवासी मधु ने बिधूना कोतवाली में तत्कालीन ग्राम प्रधान अनिल कुमार यादव, गांव किरकिचियापुर निवासी महेंद्र पाल, अशोक कुमार, गजेंद्र कुमार और धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 12 जनवरी 2017 की सुबह आरोपियों ने बुलडोजर से उसके आवासीय पट्टे की नींव उखाड़ दी, गाली-गलौज करते हुए पीट दिया था। पुलिस ने एससी-एसटी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
शनिवार को इस मामले की सुनवाई की गई। मामला विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने साक्ष्यों के साथ दलीलें पेश कीं। न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका। बाद में पांचों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। (संवाद)
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वहीं, अदालत ने मामले में झूठी तहरीर देने के आरोप में वादी के खिलाफ वाद दर्ज करने का आदेश दिया है। मामला 25 नवंबर 2020 का है। थाना अछल्दा के गांव वंशी निवासी लालू ने पुलिस को तहरीर दी थी कि रात करीब नौ बजे पड़ोस में रहने वाले जगराम और उनकी पत्नी रेशमा ने उनकी बेटी रचना को छत से धक्का दे दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
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पुलिस ने तहरीर के आधार पर मारपीट और हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोप पत्र दाखिल किया था। शनिवार को सत्र न्यायाधीश कैलाश कुमार की अदालत में सुनवाई के दौरान मामला पूरी तरह पलट गया।
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अभियोजन पक्ष के मुख्य गवाहों पीड़िता रचना, उसके पिता लालू, माता रामशीला और भाई बलवीर ने अदालत के सामने कहा कि अभियुक्तों ने कोई धक्का नहीं दिया था। पीड़िता ने बताया कि छत पर बाउंड्री न होने के कारण अंधेरे में उसका पैर फिसल गया था, जिससे वह नीचे गिर गई और उसे चोटें आईं।
अभियोजन पक्ष के गवाहों के पलटने के कारण अदालत ने उन्हें पक्षद्रोही घोषित कर दिया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद जगराम और रेशमा को दोषमुक्त कर दिया।
एससी-एसटी के फर्जी मुकदमे में पांच आरोपी बरी
औरैया। बिधूना कोतवाली क्षेत्र में करीब आठ साल पुराने एक मामले में विशेष न्यायालय एससी-एसटी एक्ट ने फैसला सुनाते हुए पांचों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मुकदमा रंजिश के चलते पेशबंदी में दर्ज कराया गया था।
मामला वर्ष 2018 का है, जब गांव नूराबाद निवासी मधु ने बिधूना कोतवाली में तत्कालीन ग्राम प्रधान अनिल कुमार यादव, गांव किरकिचियापुर निवासी महेंद्र पाल, अशोक कुमार, गजेंद्र कुमार और धर्मेंद्र कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि 12 जनवरी 2017 की सुबह आरोपियों ने बुलडोजर से उसके आवासीय पट्टे की नींव उखाड़ दी, गाली-गलौज करते हुए पीट दिया था। पुलिस ने एससी-एसटी समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।
शनिवार को इस मामले की सुनवाई की गई। मामला विशेष न्यायाधीश विकास गोस्वामी की अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने साक्ष्यों के साथ दलीलें पेश कीं। न्यायाधीश विकास गोस्वामी ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका। बाद में पांचों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। (संवाद)