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Auraiya News: रोडवेज में चालकों की कमी, डिपो में लगा जमावड़ा
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औरैया। डिपो चालकों की कमी से जूझ रहा है। इसकी वजह से बसें डिपो परिसर और बाहर सड़कों पर बेकार खड़ी रहती हैं। वहीं सुबह-शाम बस न मिलने से यात्रियों को भी दिक्कतें हो रही है। बसों के खड़े होने से विभाग को घाटा भी हो रहा है, लेकिन अधिकारी इससे बचने के लिए बहानेबाजी करते नजर आ रहे हैं।
औरैया डिपो के पास विभिन्न रूटों पर संचालन के लिए कुल 77 बसें है। बसों को विधिवत चलाने के लिए डिपो के पास 166 परिचालक तो है, लेकिन चालकों की संख्या 144 है। जिस पर भर्ती चल रही है। चालकों की कमी के कारण अक्सर बसें डिपो में खड़ी रहती है। पिछले एक सप्ताह से डिपो परिसर और बाहर सड़क पर 24 से 26 बसें सुबह 10 से शाम नौ बजे तक खड़ी देखी जा रही है।
चालकों की कमी से बसें ठीक तरह से संचालित नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। विवशतावश उन्हें अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। चालकों की इस कमी को पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों ने संविदा पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ चालकों का चयन किया गया है, लेकिन उनकी तैनाती तभी की जाएगी। जब वह फाइनल टेस्ट पास कर लेंगे और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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शनिवार को भी डिपो परिसर में 25 बसें खड़ी देखने को मिलीं जबकि सवारियां भटकती नजर आईं। सबसे अधिक परेशानी उरई, झांसी मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को हुई। तो वहीं इटावा और आगरा मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ा। बस न मिलने पर वह मां मंगलाकाली व देवकली चौराहा पर पहुंचे। जहां उन्हें अन्य डिपो की बसें मिली। हालांकि इस दौरान उन्हें भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण परेशान होना पड़ा।
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वर्जन
डिपो में चालकों की कमी है। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। डिपो में बसों के खड़ी होने का कारण कुछ कर्मचारियों का बीमार होना भी है। वहीं इस समय सवारियां भी दिन के समय कम निकल रही हैं।
- अपर्णा मीनाक्षी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
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सक्षम चालकों से कार्यालय में लिया जा काम
विभागीय सूत्रों की मानें तो सक्षम स्थायी चालकों को बस पर न भेजकर उनसे कार्यालय में काम लिया जा रहा है। जबकि कई अक्षम चालक बसें चला रहे हैं, जो बसों को आए दिन नुकसान पहुंचा देते हैं। कार्यालय में काम करने वाले ऐसे चालकों की संख्या छह से अधिक बताई जा रही है।
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औरैया डिपो के पास विभिन्न रूटों पर संचालन के लिए कुल 77 बसें है। बसों को विधिवत चलाने के लिए डिपो के पास 166 परिचालक तो है, लेकिन चालकों की संख्या 144 है। जिस पर भर्ती चल रही है। चालकों की कमी के कारण अक्सर बसें डिपो में खड़ी रहती है। पिछले एक सप्ताह से डिपो परिसर और बाहर सड़क पर 24 से 26 बसें सुबह 10 से शाम नौ बजे तक खड़ी देखी जा रही है।
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चालकों की कमी से बसें ठीक तरह से संचालित नहीं हो पा रही है। इसका खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। विवशतावश उन्हें अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। चालकों की इस कमी को पूरा करने के लिए विभागीय अधिकारियों ने संविदा पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। कुछ चालकों का चयन किया गया है, लेकिन उनकी तैनाती तभी की जाएगी। जब वह फाइनल टेस्ट पास कर लेंगे और उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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शनिवार को भी डिपो परिसर में 25 बसें खड़ी देखने को मिलीं जबकि सवारियां भटकती नजर आईं। सबसे अधिक परेशानी उरई, झांसी मार्ग पर सफर करने वाले यात्रियों को हुई। तो वहीं इटावा और आगरा मार्ग पर जाने वाले यात्रियों को काफी देर तक बसों का इंतजार करना पड़ा। बस न मिलने पर वह मां मंगलाकाली व देवकली चौराहा पर पहुंचे। जहां उन्हें अन्य डिपो की बसें मिली। हालांकि इस दौरान उन्हें भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण परेशान होना पड़ा।
वर्जन
डिपो में चालकों की कमी है। इसके लिए भर्ती प्रक्रिया चल रही है। डिपो में बसों के खड़ी होने का कारण कुछ कर्मचारियों का बीमार होना भी है। वहीं इस समय सवारियां भी दिन के समय कम निकल रही हैं।
- अपर्णा मीनाक्षी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक
सक्षम चालकों से कार्यालय में लिया जा काम
विभागीय सूत्रों की मानें तो सक्षम स्थायी चालकों को बस पर न भेजकर उनसे कार्यालय में काम लिया जा रहा है। जबकि कई अक्षम चालक बसें चला रहे हैं, जो बसों को आए दिन नुकसान पहुंचा देते हैं। कार्यालय में काम करने वाले ऐसे चालकों की संख्या छह से अधिक बताई जा रही है।