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नाउम्मीदी के सात वर्ष बीते, किसानों को मुआवजे की लड़ाई परवान चढने की उम्मीद
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फोटो 10एयूआरपी27 - प्लास्टिक पार्क ले आउट
- फोटो : AURAIYA
दिबियापुर (औरैया)। औरैया में प्लास्टिक पार्क विकसित करने के लिए एक बार फिर से शासन स्तर पर प्रयास शुरू हुए हैं। नाउम्मीदी के सात वर्ष गुजरने के बाद जहां किसानों को मुआवजे की लड़ाई परवान चढ़ने की उम्मीद जगी है। वहीं, एसपीवी में पंजीकरण कराके प्लास्टिक के उद्योग लगाने सपना पाले लोगों में भी आस जगी है।
गेल पाता संयंत्र में उत्पादित होने वाले प्लास्टिक दाने के रूप में कच्चा माल व एनटीपीसी में उत्पादित होने वाली बिजली से निर्बाध बिजली आपूर्ति के मद्देनजर कंचौसी और दिबियापुर के बीच जमीन पर प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक पार्क स्थापना का सपना सजोया था। यूपी प्लास्टिक सिटी डेवलेपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एसपीवी) का गठन भी किया गया। वर्ष 2012 के अंत में प्लास्टिक उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को ड्राफ्ट के रूप में पांच हजार रुपये जमा करके पंजीकरण कराने के लिए कहा गया था।
एसपीवी के पार्टनर बनने वालों को इंडस्ट्रीज लगाने के लिए प्लाट आवंटित करने की बात कही गई। तमाम स्थानीय लोगों ने पांच हजार रुपये जमा करके पंजीकरण भी कराए। प्लांट लगाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट दाखिल कराई गई। 19 अप्रैल 2013 को अखबारों में विज्ञापन देकर बताया गया कि एसपीवी में सदस्यता शुल्क जमा करने वालों से भूखंड का प्रीमियम दर 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 10 फीसदी धनराशि जमा कराएं। इसके लिए 12 अगस्त 2013 को साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया। पर, प्लास्टिक सिटी योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। एसपीवी में पंजीकरण कराने वाले अधिकतर लोग अब प्लास्टिक पार्क बसने की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। तो कई ऐसे हैं जो अपना पंजीकरण का रुपया वापस पाने के लिए जोड़ तोड़ लगा रहे हैं। ऐसे में प्लास्टिक सिटी दिबियापुर को लेकर गेल के साथ अनुबंध होने व केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में रसायन एवं पैट्रो केमिकल विभाग के सचिव आरके चतुर्वेदी द्वारा पत्र लिखने के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है। क्षेत्रीय किसानों को भी मुआवजे का विवाद सुलझने की उम्मीद है।
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274.4 एकड़ पर स्थापित होगी इंडस्ट्रीज
उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट के अनुसार गेल, एनटीपीसी, सीपेट, एमएसएमई-डीआई एवं फाइनेंसिंयल इंस्टीट्यूट (हुडको, सिडबी, नाबार्ड एवं अन्य) के सहयोग से दिबियापुर का प्लास्टिक पार्क स्थापित होना है। 274.4 एकड़ भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट व 84.93 एकड़ भूमि पर आवासीय यूनिट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट होना है। कंचौसी एवं फफूंद रेलवे स्टेशनों से गुजरा रेलवे का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्लास्टिक सिटी को रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
मुंबई में हुआ था रोड शो
अखिलेश सरकार में औरैया में प्लास्टिक सिटी बसाने के लिए काफी प्रयास किए गए। पर, प्लास्टिक सिटी बस नहीं पाई। यहां तक इसके लिए मुंबई में रोड शो आयोजित कर बड़े उद्योगपतियों को आकर्षित करने का भी प्रयास किया गया था।
स्टांप शुल्क में छूट का फैसला
29 मई 2020 को स्टांप एवं पंजीयन विभाग की प्रमुख सचिव वीना कुमारी ने यहां पर लगने वाली औद्योगिक इकाइयों को स्टांप शुल्क में छूट देने की अधिसूचना जारी की थी। इसमें औद्योगिक प्रयोजन के लिए रजिस्ट्री या पट्टा के लिए स्टांप शुल्क में छूट देने का फैसले की जानकारी दी गई थी।
किसानों के मुआवजे को लेकर डीएम के साथ बैठक जल्द
कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने बताया कि कई निवेशक एवं कंपनियां प्लास्टिक पार्क में आने के लिए लालायित हैं। किसानों के मुआवजे की समस्या का समाधान कराने के लिए यूपीसीड़ा एवं डीएम के साथ बैठक होनी है। किसानों का किसी कीमत पर नुकसान नहीं होने देंगे। साथ ही जल्द प्लास्टिक पार्क शुरू कराने का प्रयास है।
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गेल पाता संयंत्र में उत्पादित होने वाले प्लास्टिक दाने के रूप में कच्चा माल व एनटीपीसी में उत्पादित होने वाली बिजली से निर्बाध बिजली आपूर्ति के मद्देनजर कंचौसी और दिबियापुर के बीच जमीन पर प्रदेश सरकार ने प्लास्टिक पार्क स्थापना का सपना सजोया था। यूपी प्लास्टिक सिटी डेवलेपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एसपीवी) का गठन भी किया गया। वर्ष 2012 के अंत में प्लास्टिक उद्योग लगाने के इच्छुक लोगों को ड्राफ्ट के रूप में पांच हजार रुपये जमा करके पंजीकरण कराने के लिए कहा गया था।
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एसपीवी के पार्टनर बनने वालों को इंडस्ट्रीज लगाने के लिए प्लाट आवंटित करने की बात कही गई। तमाम स्थानीय लोगों ने पांच हजार रुपये जमा करके पंजीकरण भी कराए। प्लांट लगाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट दाखिल कराई गई। 19 अप्रैल 2013 को अखबारों में विज्ञापन देकर बताया गया कि एसपीवी में सदस्यता शुल्क जमा करने वालों से भूखंड का प्रीमियम दर 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से 10 फीसदी धनराशि जमा कराएं। इसके लिए 12 अगस्त 2013 को साक्षात्कार के लिए भी बुलाया गया। पर, प्लास्टिक सिटी योजना अभी तक परवान नहीं चढ़ सकी। एसपीवी में पंजीकरण कराने वाले अधिकतर लोग अब प्लास्टिक पार्क बसने की उम्मीद ही छोड़ चुके हैं। तो कई ऐसे हैं जो अपना पंजीकरण का रुपया वापस पाने के लिए जोड़ तोड़ लगा रहे हैं। ऐसे में प्लास्टिक सिटी दिबियापुर को लेकर गेल के साथ अनुबंध होने व केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय में रसायन एवं पैट्रो केमिकल विभाग के सचिव आरके चतुर्वेदी द्वारा पत्र लिखने के बाद स्थानीय लोगों में उम्मीद जगी है। क्षेत्रीय किसानों को भी मुआवजे का विवाद सुलझने की उम्मीद है।
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274.4 एकड़ पर स्थापित होगी इंडस्ट्रीज
उत्तर प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलेपमेंट अथॉरिटी की वेबसाइट के अनुसार गेल, एनटीपीसी, सीपेट, एमएसएमई-डीआई एवं फाइनेंसिंयल इंस्टीट्यूट (हुडको, सिडबी, नाबार्ड एवं अन्य) के सहयोग से दिबियापुर का प्लास्टिक पार्क स्थापित होना है। 274.4 एकड़ भूमि पर इंडस्ट्रियल यूनिट व 84.93 एकड़ भूमि पर आवासीय यूनिट एवं इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट होना है। कंचौसी एवं फफूंद रेलवे स्टेशनों से गुजरा रेलवे का ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्लास्टिक सिटी को रेल कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
मुंबई में हुआ था रोड शो
अखिलेश सरकार में औरैया में प्लास्टिक सिटी बसाने के लिए काफी प्रयास किए गए। पर, प्लास्टिक सिटी बस नहीं पाई। यहां तक इसके लिए मुंबई में रोड शो आयोजित कर बड़े उद्योगपतियों को आकर्षित करने का भी प्रयास किया गया था।
स्टांप शुल्क में छूट का फैसला
29 मई 2020 को स्टांप एवं पंजीयन विभाग की प्रमुख सचिव वीना कुमारी ने यहां पर लगने वाली औद्योगिक इकाइयों को स्टांप शुल्क में छूट देने की अधिसूचना जारी की थी। इसमें औद्योगिक प्रयोजन के लिए रजिस्ट्री या पट्टा के लिए स्टांप शुल्क में छूट देने का फैसले की जानकारी दी गई थी।
किसानों के मुआवजे को लेकर डीएम के साथ बैठक जल्द
कृषि राज्यमंत्री लाखन सिंह राजपूत ने बताया कि कई निवेशक एवं कंपनियां प्लास्टिक पार्क में आने के लिए लालायित हैं। किसानों के मुआवजे की समस्या का समाधान कराने के लिए यूपीसीड़ा एवं डीएम के साथ बैठक होनी है। किसानों का किसी कीमत पर नुकसान नहीं होने देंगे। साथ ही जल्द प्लास्टिक पार्क शुरू कराने का प्रयास है।