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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे को जमीन देने वाले किसानों की तलाश शुरू
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औरैया। आगरा से लखनऊ के बीच की दूरी कम करने और सुहाने सफर के लिए सपा शासन काल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का निर्माण किया गया था। यह मार्ग अब एक बार फिर विवादों की स्थिति में आ गया है। इस बार मार्ग में जमीन अधिग्रहण में गड़बड़ियां सामने आईं हैं।
जिसकी जांच शासन द्वारा शुरू हो चुकी है। जांच की आंच औरैया भी पहुंची है। इस संबंध में जिले के अधिकारियों को भी शासन के मिले पत्र से हड़कंप मचा है, अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े साक्ष्य जुटाने भी शुरू कर दिए हैं।
सपा शासनकाल में बने इस एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी की शिकायतों पर शासन ने मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी थी। गुपचुप चली इस जांच में प्रारंभिक जांच में घपले की बात सामने आई है।
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जिस पर इस संबंध में शासन ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एक्सप्रेस वे के लिए जमीन देने वाले किसानों की लिस्ट तैयार करने, किसान जमीन के मालिक कब से थे इसकी जानकारी के अलावा अन्य ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिए हैं। आरोप यह भी है कि अधिकारियों ने किसानों से सस्ते में जमीन खरीदकर बड़ा खेल किया था।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का लगभग तीन किलोमीटर का हिस्सा औरैया जिले के एरवाकटरा ब्लॉक में आता है। एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए पांच गांव तुरुकपुर याशीन, नगला बांस, उमरैन, नगला दौलत, हरनागरपुर के 400 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। यह एक्सप्रेस-वे पहले तीन बार विवादों में रहा और यह अब एक बार फिर विवाद में आया है।
जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि शासन से आगरा-लखनऊ के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र के आधार पर साक्ष्य जुटाने के लिए संबंधित तहसील के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जा चुके है। शीघ्र रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।
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जिसकी जांच शासन द्वारा शुरू हो चुकी है। जांच की आंच औरैया भी पहुंची है। इस संबंध में जिले के अधिकारियों को भी शासन के मिले पत्र से हड़कंप मचा है, अधिकारियों ने जमीन अधिग्रहण से जुड़े साक्ष्य जुटाने भी शुरू कर दिए हैं।
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सपा शासनकाल में बने इस एक्सप्रेस वे के लिए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी की शिकायतों पर शासन ने मामले की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपी थी। गुपचुप चली इस जांच में प्रारंभिक जांच में घपले की बात सामने आई है।
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जिस पर इस संबंध में शासन ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर एक्सप्रेस वे के लिए जमीन देने वाले किसानों की लिस्ट तैयार करने, किसान जमीन के मालिक कब से थे इसकी जानकारी के अलावा अन्य ब्यौरा जुटाने के निर्देश दिए हैं। आरोप यह भी है कि अधिकारियों ने किसानों से सस्ते में जमीन खरीदकर बड़ा खेल किया था।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस वे का लगभग तीन किलोमीटर का हिस्सा औरैया जिले के एरवाकटरा ब्लॉक में आता है। एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए पांच गांव तुरुकपुर याशीन, नगला बांस, उमरैन, नगला दौलत, हरनागरपुर के 400 किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था। यह एक्सप्रेस-वे पहले तीन बार विवादों में रहा और यह अब एक बार फिर विवाद में आया है।
जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने बताया कि शासन से आगरा-लखनऊ के संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। पत्र के आधार पर साक्ष्य जुटाने के लिए संबंधित तहसील के अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए जा चुके है। शीघ्र रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी।