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परिषदीय स्कूलों के किचन गार्डन में उगाई जाएगीं सब्जियां
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औरैया। परिषदीय स्कूलों की खाली जमीन पर अब किचन गार्डन तैयार किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों के खाली जमीन के साथ छतों पर फलों और सब्जियों की खेती की जाएगी यह सब्जियां व फल एमडीएम बनाने में इस्तेमाल होंगी। इसके साथ ही बच्चों को फलों व सब्जी के बारे में आसानी से जानकारी दी जा सकेगी। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने डीएम को भेजे पत्र में दिशा-निर्देश जारी किया है।
किचन गार्डन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के खाली जमीन का सदुपयोग करना है। इसके साथ ही बच्चों को फलों व सब्जियों के बारे में जानकारी देना व किस सब्जी में कौन सा पोषक तत्व पाया जाता है। इसकी भी जानकारी देना है, इसके साथ ही किचन गार्डन में पैदा की जाने वाली सब्जियों का इस्तेमाल कर एमडीएम को और अधिक पोषक बनाना है। किचन गार्डन का विकास अध्यापकों के साथ ही बच्चों व अभिभावकों के माध्यम से कराया जाएगा, ताकि लोगों में मिल-जुलकर काम करने की भावना का विकास हो। वहीं शहर के परिषदीय स्कूलों की छतों पर गमले आदि में फल व सब्जियां लगाई जाएंगी। इस किचन गार्डन के सफल संचालन के लिए सरकार विद्यालयों को प्रतिवर्ष 5000 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराएगी। जिससे किचन गार्डन को हराभरा बनाए रखा जाएगा।
बोई जाएगी मौसम सब्जियां
औरैया। सरकार की योजना में यह भी बताया गया है कि किस सीजन में कौन सी फल व सब्जियां किचन गार्डन में लगाई जाएंगी। जायद सीजन में भिंडी, पालक, लौकी, करेला, खीरा, कद्दू, बैंगन, चुकंदर, शलजम, गाजर, मूली, तोरई, खरीफ सीजन में भिंडी, बैंगन, करेला, तरोई, कद्दू, लौकी, प्याज, सेम, रबी सीजन में टमाटर, मटर, मिर्च, पत्ता गोफी, फूल गोफी, पालक, सरसों, मैथी, सोया, बथुआ, शिमला मिर्च, लहसुन, चुकंदर, गाजर आदि उगाई जाएंगी।
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जिले स्तर पर बीएसए होंगे नोडल
औरैया। जिले स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी किचन गार्डन के नोडल होंगे। विकास खंड स्तर पर बीईओ को जिम्मेदारी दी गई है। जिनके माध्यम से किचन गार्डन के विकास के लिए ग्राम्य विकास, पंचायतराज, उद्यान, कृषि, वन, बाल विकास व पुष्टाहार विभाग में समन्वय स्थापित किया जाएगा।
शासन से इस आश्य का पत्र प्राप्त हुई है। बीईओ को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में इस व्यवस्था के लागू होने से बच्चों को पोषक तत्वों के साथ मानसिक विकास होगा।
सूर्य प्रकाश सिंह
बीएसए
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किचन गार्डन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य विद्यालयों के खाली जमीन का सदुपयोग करना है। इसके साथ ही बच्चों को फलों व सब्जियों के बारे में जानकारी देना व किस सब्जी में कौन सा पोषक तत्व पाया जाता है। इसकी भी जानकारी देना है, इसके साथ ही किचन गार्डन में पैदा की जाने वाली सब्जियों का इस्तेमाल कर एमडीएम को और अधिक पोषक बनाना है। किचन गार्डन का विकास अध्यापकों के साथ ही बच्चों व अभिभावकों के माध्यम से कराया जाएगा, ताकि लोगों में मिल-जुलकर काम करने की भावना का विकास हो। वहीं शहर के परिषदीय स्कूलों की छतों पर गमले आदि में फल व सब्जियां लगाई जाएंगी। इस किचन गार्डन के सफल संचालन के लिए सरकार विद्यालयों को प्रतिवर्ष 5000 रुपये की धनराशि उपलब्ध कराएगी। जिससे किचन गार्डन को हराभरा बनाए रखा जाएगा।
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बोई जाएगी मौसम सब्जियां
औरैया। सरकार की योजना में यह भी बताया गया है कि किस सीजन में कौन सी फल व सब्जियां किचन गार्डन में लगाई जाएंगी। जायद सीजन में भिंडी, पालक, लौकी, करेला, खीरा, कद्दू, बैंगन, चुकंदर, शलजम, गाजर, मूली, तोरई, खरीफ सीजन में भिंडी, बैंगन, करेला, तरोई, कद्दू, लौकी, प्याज, सेम, रबी सीजन में टमाटर, मटर, मिर्च, पत्ता गोफी, फूल गोफी, पालक, सरसों, मैथी, सोया, बथुआ, शिमला मिर्च, लहसुन, चुकंदर, गाजर आदि उगाई जाएंगी।
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जिले स्तर पर बीएसए होंगे नोडल
औरैया। जिले स्तर पर बेसिक शिक्षा अधिकारी किचन गार्डन के नोडल होंगे। विकास खंड स्तर पर बीईओ को जिम्मेदारी दी गई है। जिनके माध्यम से किचन गार्डन के विकास के लिए ग्राम्य विकास, पंचायतराज, उद्यान, कृषि, वन, बाल विकास व पुष्टाहार विभाग में समन्वय स्थापित किया जाएगा।
शासन से इस आश्य का पत्र प्राप्त हुई है। बीईओ को दिशा-निर्देश दिए गए हैं। विद्यालयों में इस व्यवस्था के लागू होने से बच्चों को पोषक तत्वों के साथ मानसिक विकास होगा।
सूर्य प्रकाश सिंह
बीएसए