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Auraiya News: सीटें भरने के लिए निजी कॉलेज संचालकों ने फिर शुरू किए जतन
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औरैया। जनपद के निजी महाविद्यालयों में सीटे भरने को लेकर प्रयास एक बार फिर तेज कर दिए गए है। कॉलेज संचालकों द्वारा एक ओर जहां बिचौलियों को मोटा कमीशन तय किया गया है। तो वहीं छात्रों को तरह-तरह के प्रलोभन देकर उन्हें अच्छे नंबरों से पास कराने का ठेका लिया जा रहा है।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध जनपद में 70 से अधिक महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम स्नातक की 40 हजार के करीब सीटें हैं। इनको भरने के लिए इस बार निजी कॉलेज संचालकों को बार-बार मेहनत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद भी वह 50 प्रतिशत सीटें भरने में भी सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। एक बार फिर निजी कॉलेज संचालकों ने सीटें भरने के लिए जतन शुरू किए हैं।
जनपद में 12वीं पास कर चुके छात्रों को स्नातक या व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ स्कूल संचालकाें की ओर से छात्रों से लगने वाली सालाना फीस में छूट तो प्रदान की ही जा रही है। साथ ही यूनीवर्सिटी में जमा होने वाली फीस न होने पर उसमें भी छात्र की मदद कर प्रवेश देने का प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि छात्रों को यह भी आश्वासन दिया जा रहा है कि वह कॉलेज आएं या न आएं। उ
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न्हें अच्छे नंबरों से पास कराया जाएगा। सीटें भरने के चक्कर में निजी कॉलेज संचालक शिक्षा के स्तर को लगातार नीचे गिरा रहे हैं। लेकिन इस पर न ही कोई रोक टोक हो रही है और न ही कोई सख्ती। जनपद में वित्तपोषित और राजकीय कॉलेजों को छोड़ दें तो अन्य कॉलेजों में यह कवायद की जा रही है।
एक महाविद्यालय से जुड़े शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दो सालों से लगातार प्रवेश में कमी देखने को मिल रही है। सीटें कम भरने से संचालकों की चिंताएं बढ़ गईं हैं। संचालक चाह रहे हैं कि किसी भी तरह सीटों को भरा जाए। सीटें भरने के लिए पुराने छात्रों से भी स्कूल की टीमों द्वारा संपर्क किया जा रहा है। यही नहीं पिछले दिनों टीमों ने जिन गांवों में जाकर 12वीं पास छात्रों की जो सूची बनाई थी। उनसे भी फोन पर संपर्क किया जा रहा है।
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प्रवेश पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा
तिलक महाविद्यालय के प्राचार्य रवि कुमार ने बताया कि हमारे यहां दो सेक्शन की सीटें भर चुकी हैं। कक्षाएं शुरू करा दी गई हैं। अभी भी लगातार प्रवेश हो रहे हैं। पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार अधिक प्रवेश देखने को मिले हैं। छात्र अब पढ़ाई करके पास होना चाहता है। नकल करके नहीं। नकल कराकर पास कराने वाले निजी महाविद्यालयों को सीटें भरने के लिए आज भी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके द्वारा ही तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। छात्र भी अब जागरूक हो चुके हैं। आने वाले समय में ऐसे स्कूलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। जहां सख्ती अधिक होगी और नकल भी नहीं हो सकेगी।
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छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से संबद्ध जनपद में 70 से अधिक महाविद्यालय संचालित हैं। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम स्नातक की 40 हजार के करीब सीटें हैं। इनको भरने के लिए इस बार निजी कॉलेज संचालकों को बार-बार मेहनत करनी पड़ रही है। इसके बावजूद भी वह 50 प्रतिशत सीटें भरने में भी सफलता प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। एक बार फिर निजी कॉलेज संचालकों ने सीटें भरने के लिए जतन शुरू किए हैं।
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जनपद में 12वीं पास कर चुके छात्रों को स्नातक या व्यावसायिक पाठ्यक्रम की पढ़ाई के लिए लुभावने ऑफर दिए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ स्कूल संचालकाें की ओर से छात्रों से लगने वाली सालाना फीस में छूट तो प्रदान की ही जा रही है। साथ ही यूनीवर्सिटी में जमा होने वाली फीस न होने पर उसमें भी छात्र की मदद कर प्रवेश देने का प्रयास कर रहे हैं। यहां तक कि छात्रों को यह भी आश्वासन दिया जा रहा है कि वह कॉलेज आएं या न आएं। उ
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न्हें अच्छे नंबरों से पास कराया जाएगा। सीटें भरने के चक्कर में निजी कॉलेज संचालक शिक्षा के स्तर को लगातार नीचे गिरा रहे हैं। लेकिन इस पर न ही कोई रोक टोक हो रही है और न ही कोई सख्ती। जनपद में वित्तपोषित और राजकीय कॉलेजों को छोड़ दें तो अन्य कॉलेजों में यह कवायद की जा रही है।
एक महाविद्यालय से जुड़े शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले दो सालों से लगातार प्रवेश में कमी देखने को मिल रही है। सीटें कम भरने से संचालकों की चिंताएं बढ़ गईं हैं। संचालक चाह रहे हैं कि किसी भी तरह सीटों को भरा जाए। सीटें भरने के लिए पुराने छात्रों से भी स्कूल की टीमों द्वारा संपर्क किया जा रहा है। यही नहीं पिछले दिनों टीमों ने जिन गांवों में जाकर 12वीं पास छात्रों की जो सूची बनाई थी। उनसे भी फोन पर संपर्क किया जा रहा है।
प्रवेश पिछली बार की अपेक्षा ज्यादा
तिलक महाविद्यालय के प्राचार्य रवि कुमार ने बताया कि हमारे यहां दो सेक्शन की सीटें भर चुकी हैं। कक्षाएं शुरू करा दी गई हैं। अभी भी लगातार प्रवेश हो रहे हैं। पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार अधिक प्रवेश देखने को मिले हैं। छात्र अब पढ़ाई करके पास होना चाहता है। नकल करके नहीं। नकल कराकर पास कराने वाले निजी महाविद्यालयों को सीटें भरने के लिए आज भी मशक्कत करनी पड़ रही है। उनके द्वारा ही तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं। छात्र भी अब जागरूक हो चुके हैं। आने वाले समय में ऐसे स्कूलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। जहां सख्ती अधिक होगी और नकल भी नहीं हो सकेगी।