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प्रभु ने फिर निराश किया औरैया वासियों को
अमर उजाला ब्यूरो, औरैया।
Updated Fri, 26 Feb 2016 12:43 AM IST
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साल दर साल आने वाले रेल बजट की तरह ही इस बार भी औरैया की जनता ‘‘रेल सी देखती रह गई’’। इस बार सुरेश प्रभु की रेल जिले में बिना रुके ही धड़धड़ाती हुई गुजर गई।
भाजपा की केंद्र में सरकार और जिले में भाजपा के सांसद से लोगों ने खासी उम्मीदें संजोकर रखी थीं। बता दें कि जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन फफूंद की आमदनी 12 करोड़ रुपये सालाना के आंकड़े को पार कर चुकी है।
औरैया की सीमा में वैसे तो कंचौसी, फफूंद, पाता, अछल्दा चार रेलवे स्टेशन आते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से जुड़ने एवं गेल, एनटीपीसी जैसे संयंत्रों को जोड़ने वाले फफूंद रेलवे स्टेशन को जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन का दर्जा प्राप्त है।
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एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का स्टापेज है। आय के मामले में इटावा और कानपुर के मध्य सर्वाधिक आय देने का रिकार्ड फफूंद रेलवे स्टेशन के पास है।
यहां की सालाना आय 11 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। साल दर साल टिकट कीमतों में वृद्धि होने से आय में वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रमुख ट्रेनों का ठहराव न होने एवं यात्री सुविधाएं न मिलने से यात्रियों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
आलम यह है कि गेल, एनटीपीसी एवं जिले के प्रशासनिक अधिकारी, यात्री सुविधाएं न होने के कारण बेहतर ट्रेनों के लिए इटावा जाकर ट्रेन पकड़ते हैं। अधिकारियों को इटावा तक कार से जाने में हजारों रुपए के ईधन की बर्बादी होती है।
वर्षों से यह हैं जिलेवासियों की मांगें- जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन फफूंद पर अप एवं डाउन जोधपुर हावड़ा, रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस, अप एवं डाउन नीलांचल एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस के फफूंद रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिए जाने की मांग कई वर्षों से लंबित है।
साथ ही इटावा- आगरा पैसेंजर को फफूंद से चलाए जाने की मांग भी वर्षों से की जा रही है। इन ट्रेनों के ठहराव के लिए पिछले वर्षों में आमरण अनशन तक किया जा चुका है।
अगस्त 2013 में तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल इन मांगों के लिए रेल मंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं। कंचौसी, पाता एवं अछल्दा में भी कई ट्रेनों के ठहराव की मांगें भी उठती रही हैं।
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भाजपा की केंद्र में सरकार और जिले में भाजपा के सांसद से लोगों ने खासी उम्मीदें संजोकर रखी थीं। बता दें कि जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन फफूंद की आमदनी 12 करोड़ रुपये सालाना के आंकड़े को पार कर चुकी है।
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औरैया की सीमा में वैसे तो कंचौसी, फफूंद, पाता, अछल्दा चार रेलवे स्टेशन आते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय से जुड़ने एवं गेल, एनटीपीसी जैसे संयंत्रों को जोड़ने वाले फफूंद रेलवे स्टेशन को जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन का दर्जा प्राप्त है।
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एक दर्जन से अधिक ट्रेनों का स्टापेज है। आय के मामले में इटावा और कानपुर के मध्य सर्वाधिक आय देने का रिकार्ड फफूंद रेलवे स्टेशन के पास है।
यहां की सालाना आय 11 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है। साल दर साल टिकट कीमतों में वृद्धि होने से आय में वृद्धि हो रही है, लेकिन प्रमुख ट्रेनों का ठहराव न होने एवं यात्री सुविधाएं न मिलने से यात्रियों की संख्या में लगातार कमी दर्ज की जा रही है।
आलम यह है कि गेल, एनटीपीसी एवं जिले के प्रशासनिक अधिकारी, यात्री सुविधाएं न होने के कारण बेहतर ट्रेनों के लिए इटावा जाकर ट्रेन पकड़ते हैं। अधिकारियों को इटावा तक कार से जाने में हजारों रुपए के ईधन की बर्बादी होती है।
वर्षों से यह हैं जिलेवासियों की मांगें- जिले के प्रमुख रेलवे स्टेशन फफूंद पर अप एवं डाउन जोधपुर हावड़ा, रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस, अप एवं डाउन नीलांचल एक्सप्रेस, पूर्वा एक्सप्रेस के फफूंद रेलवे स्टेशन पर ठहराव दिए जाने की मांग कई वर्षों से लंबित है।
साथ ही इटावा- आगरा पैसेंजर को फफूंद से चलाए जाने की मांग भी वर्षों से की जा रही है। इन ट्रेनों के ठहराव के लिए पिछले वर्षों में आमरण अनशन तक किया जा चुका है।
अगस्त 2013 में तत्कालीन केंद्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल इन मांगों के लिए रेल मंत्री को पत्र भी लिख चुके हैं। कंचौसी, पाता एवं अछल्दा में भी कई ट्रेनों के ठहराव की मांगें भी उठती रही हैं।