{"_id":"574b2e044f1c1b622910900d","slug":"no-budget-just-the-files-in-preparation","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट का पता नहीं, सिर्फ फाइलों में तैयारियां ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बजट का पता नहीं, सिर्फ फाइलों में तैयारियां
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Sun, 29 May 2016 11:29 PM IST
विज्ञापन
अंधड़ से बिजली सप्लाई ठप
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
केंद्र सरकार के दो साल पूरे हो गए है। सरकार ने अच्छे दिन के सपने दिखाए मगर उनकी एक भी योजना के अच्छे दिन नही आ सके। कस्बों को विद्युतीकरण से संतृप्त करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से लगभग डेढ़ साल पहले लागू की गई पं. दीन दयाल उपाध्याय विद्युतीकरण योजना आज तक फाइलों में ही दौड़ रही है। इस योजना के मद में कितना बजट जारी हुआ या नहीं, इसका जिला स्तरीय अधिकारियों को आज तक कोई जानकारी नहीं है। ऐसे में कस्बों में व्याप्त बिजली समस्या को दूर करने के लिए विभाग के पास फिलहाल कोई योजना नही है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्याओं को दूर करने के लिए डेढ़ साल पहले केंद्र सरकार ने जिले में पं. दीन दयाल उपाध्याय योजना लागू की थी। इस योजना का मुख्य काम कस्बों की जर्जर बिजली व्यवस्था को ठीक करके उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मुहैया कराया जाना है। खास बात यह है कि शुरूआती दौर में इस योजना के जिले में आने पर बिजली अधिकारी सहित लोगों ने खुशी जताई थी।
डेढ़ साल पहले तत्कालीन अधीक्षण अभियंता धनीराम मौर्य ने योजना की फाइल को तैयार करवाकर स्वीकृति के लिए एमडी कार्यालय दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड आगरा भेजी थी। लेकिन योजना में कुछ बदलाव हो जाने के कारण आज तक फाइल पर कुछ भी काम नहीं किया जा सका। मामले में एक्सईएन पंकज शर्मा ने बताया कि आज तक इस योजना का क्या हुआ कुछ भी पता नहीं है। शायद फाइलों में ही दौड़ रही है जबकि जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं हुई है।
विज्ञापन
क्या है योजना---
कस्बों में जर्जर बिजली लाइनों को बदलना, पुराने मीटर बदलकर नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाया जाना, कम क्षमता के ट्रांसफार्मरों को उच्चीकृत करना, विद्युतीकरण से रहित कस्बों को बिजली व्यवस्थाओं से संतृप्त करना तथा संबंधित बिजली केंद्र की क्षमता को कस्बे के उपभोक्ताओं की क्षमता के मुताबिक उच्चीकृत किया जाना आदि शामिल है।
औरैया जिले के लिए योजना आई थी। इसकी फाइल स्वीकृत होने के लिए दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड आगरा कार्यालय में मौजूद है। प्रस्ताव पर मोहर लगी है या नहीं अभी पूरी हकीकत नहीं मालूम है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी कस्बों में काम शुरू करा दिया जाएगा।
हरि प्रसाद, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल
विज्ञापन
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्याओं को दूर करने के लिए डेढ़ साल पहले केंद्र सरकार ने जिले में पं. दीन दयाल उपाध्याय योजना लागू की थी। इस योजना का मुख्य काम कस्बों की जर्जर बिजली व्यवस्था को ठीक करके उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा मुहैया कराया जाना है। खास बात यह है कि शुरूआती दौर में इस योजना के जिले में आने पर बिजली अधिकारी सहित लोगों ने खुशी जताई थी।
विज्ञापन
डेढ़ साल पहले तत्कालीन अधीक्षण अभियंता धनीराम मौर्य ने योजना की फाइल को तैयार करवाकर स्वीकृति के लिए एमडी कार्यालय दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड आगरा भेजी थी। लेकिन योजना में कुछ बदलाव हो जाने के कारण आज तक फाइल पर कुछ भी काम नहीं किया जा सका। मामले में एक्सईएन पंकज शर्मा ने बताया कि आज तक इस योजना का क्या हुआ कुछ भी पता नहीं है। शायद फाइलों में ही दौड़ रही है जबकि जमीनी हकीकत कुछ भी नहीं हुई है।
विज्ञापन
क्या है योजना---
कस्बों में जर्जर बिजली लाइनों को बदलना, पुराने मीटर बदलकर नए इलेक्ट्रानिक मीटर लगाया जाना, कम क्षमता के ट्रांसफार्मरों को उच्चीकृत करना, विद्युतीकरण से रहित कस्बों को बिजली व्यवस्थाओं से संतृप्त करना तथा संबंधित बिजली केंद्र की क्षमता को कस्बे के उपभोक्ताओं की क्षमता के मुताबिक उच्चीकृत किया जाना आदि शामिल है।
औरैया जिले के लिए योजना आई थी। इसकी फाइल स्वीकृत होने के लिए दक्षिणांचल विद्युत वितरण खंड आगरा कार्यालय में मौजूद है। प्रस्ताव पर मोहर लगी है या नहीं अभी पूरी हकीकत नहीं मालूम है। जैसे ही स्वीकृति मिलेगी कस्बों में काम शुरू करा दिया जाएगा।
हरि प्रसाद, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल