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Auraiya News: फर्जी वसीयत से किया चार बीघा जमीन का नामांतरण निरस्त

Fri, 02 Oct 2026 09:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2026 09:54 PM IST
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Mutation of four bighas of land based on a forged will cancelled.
औरैया। फफूंद कस्बे के आराजी दरगाह की चार बीघा जमीन के नामांतरण विवाद में अपर आयुक्त न्यायिक द्वितीय, कानपुर मंडल सुरेंद्र कुमार ने फैसला सुनाते हुए फर्जी वसीयत के आधार पर हुए नामांतरण को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने तहसीलदार और उपजिलाधिकारी के पूर्व आदेशों को भी निरस्त कर दिया। न्यायालय ने माना कि साक्ष्यों का सही ढंग से परीक्षण किए बिना, मौका मुआयना और पक्षकारों को सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश पारित किए गए।
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मामले में वादी आदित्य कुमार ने मृतक नाथूराम पुत्र बुद्धा लाल की 26 अगस्त 2023 की पंजीकृत वसीयत के आधार पर नामांतरण कराया था। इसके विरोध में नाथूराम के पुत्र अशोक कुमार और पत्नी राम कुमारी ने निगरानी दायर की। सदर तहसील में निगरानी खारिज होने के बाद अशोक कुमार ने कानपुर कमिश्नरी में निगरानी दाखिल की।
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निगरानीकर्ताओं का आरोप था कि एक आंख खराब होने वाले नाथूराम ने कभी वसीयत नहीं की। उनका आरोप था कि परिवार का सदस्य नहीं होने वाले आदित्य कुमार ने राम सिंह नायक नामक व्यक्ति को फर्जी नाथूराम बनाकर खड़ा किया और उसकी फोटो लगाकर फर्जी वसीयत पंजीकृत करा ली। निगरानी में पक्षकार राम सिंह, राजेश और कमलेश कुमार ने शपथपत्र देकर कहा कि उन्हें प्लाट की गवाही के नाम पर तहसील ले जाया गया और उनकी फोटो नाथूराम के स्थान पर लगाकर फर्जी वसीयत करा ली गई।
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निगरानीकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अंगूठा लगाने वाली राम कुमारी के फर्जी हस्ताक्षर से शपथपत्र दाखिल किया गया। वसीयतनामे में लगे नाथूराम के दोनों फोटो भी अलग-अलग हैं। अपर आयुक्त ने पत्रावली के अवलोकन में पाया कि वसीयत के मूल दस्तावेज पर लगी फोटो ऑनलाइन फोटो से मेल नहीं खाती और वह राम सिंह की प्रतीत होती है। न्यायालय ने दोनों आदेश निरस्त कर दिए। पीड़ित अशोक कुमार ने कहा कि सदर तहसील स्तर पर सरकारी सिस्टम की खामियों के चलते उन्हें कानपुर कमिश्नरी तक दौड़ लगानी पड़ी। वहां से उन्हें राहत मिली है।
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