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कोरोना के साथ डेंगू, मलेरिया और वायरल का काकटेल

Wed, 23 Sep 2020 12:18 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 23 Sep 2020 12:18 AM IST
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औरैया। मौसम के बदलाव ने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी है। कोरोना के साथ ही डेंगू, मलेरिया और वायरल के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों की समस्या यह है कि तीनों बीमारियों में एक ही तरह के लक्षण होते हैं, ऐसे में पहचान करना मुश्किल हो रहा है।
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50 शय्या जिला अस्पताल में रोजाना लगभग 500 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इसमें से 250 मरीज स्किन के हैं। वहीं, लगभग 100 मरीजों में बुखार के लक्षण होते हैं। बुखार वाले मरीजों में पहचान करना मुश्किल है कि कौन डेंगू, मलेरिया, वायरल का है और कौन मरीज कोरोना संक्रमित है। इन सभी में मुख्य लक्षण बुखार है।
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जिला अस्पताल के प्रभारी सीएमएस डॉ. पीके कटियार ने बताया कि 100 में से 90 मरीज बुखार के आ रहे हैं। लक्षण देखकर दवा दी जा रही है। अधिकतर मरीज वायरल के हैं। अभी तक यहां पर कोई भी मरीज डेंगू का नहीं मिला है। मलेरिया में मुख्य लक्षण ठंड देकर बुखार का होता है। हालांकि रात 12 बजे तेज बुखार आए तो मलेरिया होने की ज्यादा आशंका होती है। ऐसे भी तेज बुखार में ही सैंपल लेकर जांच कराई जाए तभी मलेरिया का पता चलता है। वहीं, स्किन के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पांच सौ में से 250 मरीज स्किल के हैं। शरीर में काले चक्कते पड़ जाते हैं। खुजली भी होती है। यह एक रोगी से दूसरे को भी हो जाता है। इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है। साथ ही साफ-सफाई का भी ध्यान रखें।
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50 शय्या अस्पताल के डॉ. अमित पोरवाल ने बताया कि साधारण तौर पर वायरल फीवर और कोरोना वायरस के लक्षण एक समान ही हैं, जैसे- सर्दी-जुकाम, बुखार, गले में खरास और खांसी आदि। कोरोना वायरस भी शुरुआती चरण में वायरल फीवर के तरह ही लक्षण दिखाता है। अगर आप पिछले दो सप्ताह में ऐसी जगह से आए हैं, जहां कोरोना वायरल महामारी फैली हुई है या पिछले दो हफ्तों में आप किसी कोविड-19 मरीज के संपर्क में आए हैं, तभी कोरोना की आशंका हो सकती है। अन्यथा आपको परेशान होने की जगह वायरल फीवर की दवा लेने की जरूरत है।

50 शय्या जिला अस्पताल में सुबह के समय भीड़ लगने पर काउंटर पर पर्चा बनवाने में धक्कामुक्की नहीं होगी। कोरोना संक्रमण के समय मरीजों की भीड़ 100 से 125 के बीच ही रहती थी, इससे वहां पर पर्चा बनवाने में कोई दिक्कत नहीं होती थी। मौसम परिवर्तन के साथ ही मरीजों की भीड़ भी बढने लगी है। इससे पर्चा बनवाने में धक्कामुक्की की हालात होने लगते हैं। इससे बचने के लिए लोहे की रेलिंग लगा दी गई है। अब तीन लाइनों में लोग लगकर पर्चा बनवा सकते हैं।
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