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Auraiya News: साढ़े चार साल से जेल में बंद गैंगस्टर के आरोपी को तीन साल की सजा
Tue, 19 May 2026 11:56 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 19 May 2026 11:56 PM IST
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औरैया। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट विनय प्रकाश सिंह ने सदर कोतवाली क्षेत्र के साढ़े चार साल पुराने एक मामले में जेल में निरुद्ध चल रहे अभियुक्त को तीन साल की सजा सुनाई। साथ ही दोषी पर पांच हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया।
खास बात यह है कि दोषी साढ़े चार साल से जेल में बंद है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उसकी रिहाई की स्थिति बन गई है। यह फैसला दोषी के जेल से भेजे गए जुर्म इकबाल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए सुनाया गया। सदर कोतवाली पुलिस ने आठ अक्तूबर 2021 को शहर के मोहल्ला गोविंद नगर निवासी सौरभ सक्सेना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल भेजा था। तब से वह जिला कारागार इटावा में बंद था।
सौरभ ने जेल से प्रार्थना पत्र भेजकर गरीबी व पैरवी करने वाला कोई नहीं होने का हवाला देते हुए अदालत से अपील की। कहा कि उसे कम से कम सजा देकर जुर्म स्वीकार करने के आधार पर मुकदमे का निस्तारण करने की कृपा करें।
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विशेष न्यायालय ने सौरभ के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए अपने आदेश में लिखा कि अभियुक्त ने स्वेच्छा से जुर्म स्वीकार कर न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया है, बल्कि अदालत का समय भी बचाया है। कोर्ट ने उसे तीन साल की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जेल में बिताई गई अवधि को उसकी मूल सजा में समायोजित किया जाए। वह आठ अक्तूबर 2021 से जेल में है। ऐसे में उसकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।
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खास बात यह है कि दोषी साढ़े चार साल से जेल में बंद है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उसकी रिहाई की स्थिति बन गई है। यह फैसला दोषी के जेल से भेजे गए जुर्म इकबाल प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए सुनाया गया। सदर कोतवाली पुलिस ने आठ अक्तूबर 2021 को शहर के मोहल्ला गोविंद नगर निवासी सौरभ सक्सेना के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत जेल भेजा था। तब से वह जिला कारागार इटावा में बंद था।
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सौरभ ने जेल से प्रार्थना पत्र भेजकर गरीबी व पैरवी करने वाला कोई नहीं होने का हवाला देते हुए अदालत से अपील की। कहा कि उसे कम से कम सजा देकर जुर्म स्वीकार करने के आधार पर मुकदमे का निस्तारण करने की कृपा करें।
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विशेष न्यायालय ने सौरभ के प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए अपने आदेश में लिखा कि अभियुक्त ने स्वेच्छा से जुर्म स्वीकार कर न सिर्फ न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग किया है, बल्कि अदालत का समय भी बचाया है। कोर्ट ने उसे तीन साल की सजा सुनाते हुए पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जुर्माना अदा न करने की स्थिति में उसे 15 दिन का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जेल में बिताई गई अवधि को उसकी मूल सजा में समायोजित किया जाए। वह आठ अक्तूबर 2021 से जेल में है। ऐसे में उसकी जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।