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विद्युतीकरण में लापरवाही, बर्खास्त होगी कार्रदाई संस्था
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Sun, 29 May 2016 11:20 PM IST
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अंधड़ से बिजली सप्लाई ठप
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना कार्यदाई संस्था की लापरवाही से अधर में है। योजना के तहत 1745 कस्बों का मार्च 2017 तक विद्युतीकरण होना है। लेकिन अभी तक सिफ्र 228 गांवों में ही बिजली पहुंच पाई है। कई बार विभाग की ओर नोटिस दिए जाने के बाद भी कंपनी के काम में कोई सुधार नहीं किया है। इसके चलते विभाग अब कार्रवाई संस्था को बर्खास्त किए जाने की तैयारी कर रहा है।
जिले में सौ से अधिक आबादी वाले 1745 कस्बों और मजरों को विद्युतीकरण से संतृप्त करने के लिए लागू की गई आरजीजीवाई (राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना) जिले में कार्यदाई संस्था की मनमानी के कारण दम तोड़ती दिख रही है। मार्च 2015 में कार्यदाई संस्था ज्योति इंफ्रास्ट्रक्चर को विद्युतीकरण का काम सौंपा गया था। एक्सईएन पंकज शर्मा ने बताया कि कंपनी की ओर से काम को पूरा करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
नोटिस दिए जाने के बाद कंपनी ने काम शुरू किया, लेकिन किसी गांव में खंभे लगा दिए तो किसी में गड्ढ़े खोदकर छोड़ दिए। एक्सईएन का तो यहां तक कहना है कि कंपनी के पास पैसा ही नहीं है। इसलिए वह काम नहीं करवा पा रही है। कार्यदाई संस्था को मार्च 2017 तक 1745 गांवों व मजराें को विद्युतीकरण से संतृप्त करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद एक साल में अब तक लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 228 गांव व मजरों तक ही बिजली पहुंचा सकी है। जो कि काम के प्रति लापवाही दिखाता है।
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निर्धारित समय में लक्ष्य की अनदेखी किए जाने पर अब विभाग की ओर से कंपनी को बर्खास्त किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक्सईएन ने बताया कि उक्त 228 गांवों में विद्युतीकरण का कितना काम हुआ है। इसकी जांच के लिए टाटा कंसल्टेंसी कंपनी को जांच के लिए तैनात किया गया है। इस कंपनी के अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही उक्त गांवों में विद्युतीकरण के कार्य की पुष्टि मानी जाएगी।
आरजीजीवाई योजना की कार्यदाई संस्था ज्योति इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से काम के प्रति लगातार लापरवाही बरती जा रही है। नोटिस दिए जाने के बाद भी कोई सुधार न होते देख अब कार्यदाई संस्था को टर्मिनेट किए जाने की तैयारी की जा रही है।
हरि प्रसाद, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल
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जिले में सौ से अधिक आबादी वाले 1745 कस्बों और मजरों को विद्युतीकरण से संतृप्त करने के लिए लागू की गई आरजीजीवाई (राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना) जिले में कार्यदाई संस्था की मनमानी के कारण दम तोड़ती दिख रही है। मार्च 2015 में कार्यदाई संस्था ज्योति इंफ्रास्ट्रक्चर को विद्युतीकरण का काम सौंपा गया था। एक्सईएन पंकज शर्मा ने बताया कि कंपनी की ओर से काम को पूरा करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई गई।
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नोटिस दिए जाने के बाद कंपनी ने काम शुरू किया, लेकिन किसी गांव में खंभे लगा दिए तो किसी में गड्ढ़े खोदकर छोड़ दिए। एक्सईएन का तो यहां तक कहना है कि कंपनी के पास पैसा ही नहीं है। इसलिए वह काम नहीं करवा पा रही है। कार्यदाई संस्था को मार्च 2017 तक 1745 गांवों व मजराें को विद्युतीकरण से संतृप्त करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद एक साल में अब तक लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 228 गांव व मजरों तक ही बिजली पहुंचा सकी है। जो कि काम के प्रति लापवाही दिखाता है।
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निर्धारित समय में लक्ष्य की अनदेखी किए जाने पर अब विभाग की ओर से कंपनी को बर्खास्त किए जाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। एक्सईएन ने बताया कि उक्त 228 गांवों में विद्युतीकरण का कितना काम हुआ है। इसकी जांच के लिए टाटा कंसल्टेंसी कंपनी को जांच के लिए तैनात किया गया है। इस कंपनी के अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही उक्त गांवों में विद्युतीकरण के कार्य की पुष्टि मानी जाएगी।
आरजीजीवाई योजना की कार्यदाई संस्था ज्योति इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर से काम के प्रति लगातार लापरवाही बरती जा रही है। नोटिस दिए जाने के बाद भी कोई सुधार न होते देख अब कार्यदाई संस्था को टर्मिनेट किए जाने की तैयारी की जा रही है।
हरि प्रसाद, चीफ इंजीनियर, कानपुर मंडल