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ऑन लाइन क्लास से अभिभावकों पर बढ़ा भार
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फफूंद(औरैया)। कोरोना काल में सबसे ज्यादा प्रभावित हुई शिक्षा का बुरा हाल है। ऑनलाइन क्लास के नाम पर स्कूलों से खानापूरी की जा रही है। वहीं, लैपटॉप और मोबाइल खरीदने के साथ डाटा के लिए प्लान लेने से अभिभावकों का भार बढ़ गया है। बच्चों में पढ़ रही मोबाइल की लत भी उन्हें बिगड़ैल बना रही है। इस बात को लेकर अभिभावक खासे परेशान है। पिछले डेढ़ वर्षों से बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को लेकर अब लोग ऑफ लाइन क्लास संचालन की मांग कर रहे हैं। जिससे बच्चों में स्कूल का माहौल मिले और शिक्षा के स्तर में बढ़ोतरी हो। वहीं, कुछ अभिभावक तीसरी लहर को लेकर चिंतित हैं।
बेटी कक्षा एक में पढ़ती है, स्कूल में दाखिला होते ही कोरोना संक्रमण फैल गया। स्कूल से ऑनलाइन क्लास चलने लगी। जिसके लिए नया मोबाइल और इंटरनेट का बंदोबस्त किया। स्कूल ज्ञान मिलने के बजाए उसे मोबाइल की लत पड़ गई। स्कूल से भी शिक्षा पर जोर नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बच्चों का माहौल बिगड़ने लगा है। सरकार को चाहिए कि स्कूल में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करें। - मनीष दुबे
सबसे बुरा हाल प्राइवेट स्कूलों का है। ये लोग पूरे साल की फीस अपनी मर्जी से लेते रहे। इसके बाद भी शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा। रोज-रोज के नए नियम से अधिक भार पड़ा है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने के साथ ऑनलाइन गेम, यूट्यूब पर कार्टून में ज्यादा हो रही है। इससे शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है।-दीपक अग्रवाल
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ऑनलाइन क्लास शुरू होने पर बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कोरोना काल से पहले बच्चे पढ़ने में ठीक थे। उन्हें किताबी ज्ञान था। लेकिन ऑनलाइन क्लास से वह एक सीमित दायरे में रह गए हैं। स्कूल प्रबंधन भी खानापूरी कर क्लास संचालित कर रहे हैं। इससे बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है।-हुमायूं मिर्जा
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बेटी कक्षा एक में पढ़ती है, स्कूल में दाखिला होते ही कोरोना संक्रमण फैल गया। स्कूल से ऑनलाइन क्लास चलने लगी। जिसके लिए नया मोबाइल और इंटरनेट का बंदोबस्त किया। स्कूल ज्ञान मिलने के बजाए उसे मोबाइल की लत पड़ गई। स्कूल से भी शिक्षा पर जोर नहीं दिया जा रहा है। ऐसे में बच्चों का माहौल बिगड़ने लगा है। सरकार को चाहिए कि स्कूल में ऑफलाइन कक्षाएं शुरू करें। - मनीष दुबे
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सबसे बुरा हाल प्राइवेट स्कूलों का है। ये लोग पूरे साल की फीस अपनी मर्जी से लेते रहे। इसके बाद भी शिक्षा का स्तर नहीं सुधरा। रोज-रोज के नए नियम से अधिक भार पड़ा है। बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि कम होने के साथ ऑनलाइन गेम, यूट्यूब पर कार्टून में ज्यादा हो रही है। इससे शिक्षा का माहौल नहीं बन पा रहा है।-दीपक अग्रवाल
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ऑनलाइन क्लास शुरू होने पर बच्चे पढ़ाई में ध्यान नहीं दे पा रहे हैं। कोरोना काल से पहले बच्चे पढ़ने में ठीक थे। उन्हें किताबी ज्ञान था। लेकिन ऑनलाइन क्लास से वह एक सीमित दायरे में रह गए हैं। स्कूल प्रबंधन भी खानापूरी कर क्लास संचालित कर रहे हैं। इससे बच्चों पर गलत असर पड़ रहा है।-हुमायूं मिर्जा