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Auraiya News: डिलीवरी रूम में छह माह से टपक रहा गंदा पानी, संक्रमण का खतरा
Sun, 08 Feb 2026 11:49 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sun, 08 Feb 2026 11:49 PM IST
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फोटो-26-डिलीवरी रूम में फर्श पर गिरता पानी। संवाद
ककोर। मेडिकल कॉलेज चिचौली में बुनियादी सुविधाएं इन दिनों बेपटरी हैं। महिला अस्पताल इसकी चपेट में है। यहां पर सीवरेज की लाइनें चोक होने से छह माह से डिलीवरी रूम में गंदा पानी टपक रहा है।
ऐसे में संक्रमण का खतरा मड़रा रहा है, ऐसे में प्रसूताआें को बगल के वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। जबकि बदबू फैलने से अस्पताल का स्टाफ और प्रसूताएं परेशान हैं।
मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की बिल्डिंग में पहली मंजिल पर लेबर रूम है। यहां पर ओटी और वार्ड हैं, जबकि दूसरी मंजिल पर जनरल वार्ड हैं। अस्पताल में लेबर रूम का शौचालय चोक हो चुका है। वहीं, अन्य शौचालयों की लाइन भी चोक है।
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ऐसे में डिलीवरी रूम में सीवरेज का पानी टपकता रहता है। एक कमरे को तो मजबूरन बंद करा दिया गया है, लेकिन यहां गंदगी बदबू की समस्या बढ़ाती है। साथ ही साथ यहां प्रसूताआें को संक्रमण का खतरा बना है।
अस्पताल में इस तरह की समस्याएं दूर करने के लिए साल 2022 में दो करोड़ रुपये बजट मिला था। मेंटीनेंस के लिए जारी हुई इस धनराशि से पीडब्ल्यूडी कानपुर के द्वारा काम कराया जाना था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह काम पूरा नहीं हो सका है। अब छह माह से शौचालय चोक होने से पानी टपकने की दिक्कत बनी है।
इससे प्रसूता और अन्य मरीजों को इधर से उधर शिफ्ट करके काम चलाया जा रहा है। शौचालय की लाइन चोक होने की वजह से मरीजों को दूसरे फ्लोर पर शौच करना पड़ रहा है। खास तौर पर प्रसव व अन्य ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जिम्मेदार इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
रोज चार से 10 महिलाओं के प्रसव हो रहे
महिला अस्पताल की बिल्डिंग में रोजाना चार से 10 महिलाओं के प्रसव होते हैं। इसके बाद इन्हें वार्ड में भर्ती भी रखा जाता है। डिलीवरी रूम में टपकता सीवरेज का गंदा पानी मरीजों के लिए नुकसानदायक है। जच्चा बच्चा विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी भी यह जानते हैं, लेकिन सीमित जगह में खतरे के बीच स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।
छह माह से दिक्कत, रोज नजरें फेर लेते अधिकारी
स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर रहें, मरीजों को समय से उपचार व सुविधाएं मिले। इसे लेकर सीएमएस से लेकर प्राचार्य रोजाना अस्पताल के हर वार्ड का चक्कर लगाते हैं। कर्मचारियों व डॉक्टरों की मौजूदगी से लेकर मरीजों व तीमारदारों से फीडबैक भी लिया जाता है, लेकिन टपकते सीवरेज की समस्या से नजरें फेरी जा रही हैं। यही वजह है कि छह माह से यह समस्या लगातार बनी हुई है।
महिला अस्पताल की बिल्डिंग में मेंटीनेंस को लेकर दो करोड़ बजट मिला था। यह काम कराने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से बात की जा चुकी है। जल्द टीम यहां आएगी। समस्या को जल्द दूर कराया जाएगा।
-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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ऐसे में संक्रमण का खतरा मड़रा रहा है, ऐसे में प्रसूताआें को बगल के वार्ड में भर्ती किया जा रहा है। जबकि बदबू फैलने से अस्पताल का स्टाफ और प्रसूताएं परेशान हैं।
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मेडिकल कॉलेज के महिला अस्पताल की बिल्डिंग में पहली मंजिल पर लेबर रूम है। यहां पर ओटी और वार्ड हैं, जबकि दूसरी मंजिल पर जनरल वार्ड हैं। अस्पताल में लेबर रूम का शौचालय चोक हो चुका है। वहीं, अन्य शौचालयों की लाइन भी चोक है।
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ऐसे में डिलीवरी रूम में सीवरेज का पानी टपकता रहता है। एक कमरे को तो मजबूरन बंद करा दिया गया है, लेकिन यहां गंदगी बदबू की समस्या बढ़ाती है। साथ ही साथ यहां प्रसूताआें को संक्रमण का खतरा बना है।
अस्पताल में इस तरह की समस्याएं दूर करने के लिए साल 2022 में दो करोड़ रुपये बजट मिला था। मेंटीनेंस के लिए जारी हुई इस धनराशि से पीडब्ल्यूडी कानपुर के द्वारा काम कराया जाना था, लेकिन चार साल बीत जाने के बाद भी यह काम पूरा नहीं हो सका है। अब छह माह से शौचालय चोक होने से पानी टपकने की दिक्कत बनी है।
इससे प्रसूता और अन्य मरीजों को इधर से उधर शिफ्ट करके काम चलाया जा रहा है। शौचालय की लाइन चोक होने की वजह से मरीजों को दूसरे फ्लोर पर शौच करना पड़ रहा है। खास तौर पर प्रसव व अन्य ऑपरेशन कराने वाले मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, जिम्मेदार इसे लेकर चुप्पी साधे हुए हैं।
रोज चार से 10 महिलाओं के प्रसव हो रहे
महिला अस्पताल की बिल्डिंग में रोजाना चार से 10 महिलाओं के प्रसव होते हैं। इसके बाद इन्हें वार्ड में भर्ती भी रखा जाता है। डिलीवरी रूम में टपकता सीवरेज का गंदा पानी मरीजों के लिए नुकसानदायक है। जच्चा बच्चा विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी भी यह जानते हैं, लेकिन सीमित जगह में खतरे के बीच स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।
छह माह से दिक्कत, रोज नजरें फेर लेते अधिकारी
स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर रहें, मरीजों को समय से उपचार व सुविधाएं मिले। इसे लेकर सीएमएस से लेकर प्राचार्य रोजाना अस्पताल के हर वार्ड का चक्कर लगाते हैं। कर्मचारियों व डॉक्टरों की मौजूदगी से लेकर मरीजों व तीमारदारों से फीडबैक भी लिया जाता है, लेकिन टपकते सीवरेज की समस्या से नजरें फेरी जा रही हैं। यही वजह है कि छह माह से यह समस्या लगातार बनी हुई है।
महिला अस्पताल की बिल्डिंग में मेंटीनेंस को लेकर दो करोड़ बजट मिला था। यह काम कराने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों से बात की जा चुकी है। जल्द टीम यहां आएगी। समस्या को जल्द दूर कराया जाएगा।
-डॉ. मुकेश वीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

फोटो-26-डिलीवरी रूम में फर्श पर गिरता पानी। संवाद