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कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का हुआ शुभारंभ
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अछल्दा (औरैया)। दलीपुर गांव में कलश यात्रा के साथ भागवत कथा शुरू हुई। कलश यात्रा कथा मंडप से शुरू होकर नगर में भ्रमण करते हुए निचली गंग नहर से जल भरकर कथा स्थल पहुंचे। जहां विधिविधान से पूजा के बाद कथा शुरू हुई।
ग्राम दलीपुर में भागवत कथा के शुभारंभ में गांव से कस्बे तक कलश की विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा ग्राम दलीपुर से शुरू हुई। इसमें महिलाएं सिर पर कलश रखकर नृत्य करते चल रही थीं। आचार्य जगमोहन त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को भागवत का महात्म्य बताया। कलश यात्रा के साथ भागवत कथा के शुभारंभ पर आचार्य ने कहा कि हमें अपना जीवन सफल बनाने को भागवत कथा सुननी चाहिए।
कथा के पहले दिन आचार्य ने महात्म्य वर्णन, भक्त नारद संवाद की कथा पर प्रकाश डाला। बोले कि प्रभु का गुणगान करने से हमारे कष्ट दूर होते हैं और हमें सुखी जीवन प्राप्त होता है। परमात्मा बड़ा ही कृपालु हैं, उसका भजन करने से मन को भी संतुष्टि मिलती है। कथा स्थल पर काफी श्रद्धालु मौजूद रहे। इस दौरान आयोजक सुरेश, कृष्ण मुरारी, महेश, दिनेश, रमेश, राजेश, सुरेंद्र, किशनचंद ने बताया कि दूसरे दिन गुरुवार को प्रथम स्कंध प्रारंभ, व्यास-नारद संवाद, परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन की कथा होगी।
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ग्राम दलीपुर में भागवत कथा के शुभारंभ में गांव से कस्बे तक कलश की विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कलश यात्रा ग्राम दलीपुर से शुरू हुई। इसमें महिलाएं सिर पर कलश रखकर नृत्य करते चल रही थीं। आचार्य जगमोहन त्रिपाठी ने श्रद्धालुओं को भागवत का महात्म्य बताया। कलश यात्रा के साथ भागवत कथा के शुभारंभ पर आचार्य ने कहा कि हमें अपना जीवन सफल बनाने को भागवत कथा सुननी चाहिए।
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कथा के पहले दिन आचार्य ने महात्म्य वर्णन, भक्त नारद संवाद की कथा पर प्रकाश डाला। बोले कि प्रभु का गुणगान करने से हमारे कष्ट दूर होते हैं और हमें सुखी जीवन प्राप्त होता है। परमात्मा बड़ा ही कृपालु हैं, उसका भजन करने से मन को भी संतुष्टि मिलती है। कथा स्थल पर काफी श्रद्धालु मौजूद रहे। इस दौरान आयोजक सुरेश, कृष्ण मुरारी, महेश, दिनेश, रमेश, राजेश, सुरेंद्र, किशनचंद ने बताया कि दूसरे दिन गुरुवार को प्रथम स्कंध प्रारंभ, व्यास-नारद संवाद, परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन की कथा होगी।
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