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कोरोना ने फिर दिखाई घर वापसी की राह
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औरैया। कोरोना की तीसरी लहर में एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की घर वापसी शुरू हो गई है। पिछले एक पखवाड़े में करीब एक हजार से ज्यादा प्रवासी कामगार महानगरों से गांव लौट चुके हैं। इसके साथ ही घर वापस आने वालों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। ऐसे लोगों को चुनावी बयार से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। हालांकि घर वापसी कर रहे लोगों के सामने रोजगार का संकट भी है।
जिले के करीब 80 हजार कामगार दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। ये कामगार शादी-विवाह, त्योहारों अथवा चुनाव के समय ही गांव आते हैं। पिछले साल हुए लॉकडाउन के बीच अधिकांश अपने घर लौटे थे। जिन्हें मनरेगा व अन्य योजनाओं के तहत जिला प्रशासन ने काम दिलाया था। बाद में हालात सुधरने पर ये मजदूर काम की तलाश में परदेश लौट गए थे। कोरोना की दोनों लहरों से सबक लेकर प्रवासी मजदूर तीसरी लहर के प्रचंड होने से पहले ही घर वापसी करने लगे है।
ऐसे में ग्राम पंचायतों के समक्ष उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। डीपीआरओ संदीप कुमार ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक कुल 477 निगरानी समितियां काम कर रही हैं। अभी टीकाकरण के लिए जोर दिया जा रहा है। यदि बाहर से आने वाले लोग रोजगार चाहेंगे तो उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर काम मुहैया कराया जाएगा। फिलहाल अभी तक सरकार से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। (संवाद)
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जिले के करीब 80 हजार कामगार दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। ये कामगार शादी-विवाह, त्योहारों अथवा चुनाव के समय ही गांव आते हैं। पिछले साल हुए लॉकडाउन के बीच अधिकांश अपने घर लौटे थे। जिन्हें मनरेगा व अन्य योजनाओं के तहत जिला प्रशासन ने काम दिलाया था। बाद में हालात सुधरने पर ये मजदूर काम की तलाश में परदेश लौट गए थे। कोरोना की दोनों लहरों से सबक लेकर प्रवासी मजदूर तीसरी लहर के प्रचंड होने से पहले ही घर वापसी करने लगे है।
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ऐसे में ग्राम पंचायतों के समक्ष उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने की चुनौती खड़ी हो गई है। डीपीआरओ संदीप कुमार ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक कुल 477 निगरानी समितियां काम कर रही हैं। अभी टीकाकरण के लिए जोर दिया जा रहा है। यदि बाहर से आने वाले लोग रोजगार चाहेंगे तो उन्हें ग्राम पंचायत स्तर पर काम मुहैया कराया जाएगा। फिलहाल अभी तक सरकार से कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। (संवाद)
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